ऑपथैल्मोलॉजी पर 78वीं एनुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित

नई दिल्ली। भारत में, आँखों से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए उपलब्ध एडवांस ट्रेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए इंडिया ऑपथैल्मोलॉजी सोसाइटी (एआईओएस) द्वारा आयोजित 78वीं एनुअल कॉन्फ्रेंस को आज सफलतापूर्वक शुरु किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नीति आयोग के सीईओ, श्री अमिताभ कांत द्वारा की गई, जिसमें गुरुग्राम के एमएलए श्री सुधीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

एआईओएस के अगले अध्यक्ष, डॉक्टर महिपाल एस. सचदेव ने बताया कि, “एआईओसी 2020, भारतीय ऑपथैल्मोलॉजिस्ट्स के लिए एक खास मंच है, जहां उन्हें अपना अनुभव साझा करने के साथ भारत में ऑपथैल्मोलॉजी के भविष्य पर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें एक उच्च स्तर चर्चा की गई। 2000 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फेकल्टी इस चर्चा का हिस्सा होने के नाते ऑपथैल्मिक देखभाल से संबंधित सरल व मुश्किल थेरेपी के तरीकों के बारे में बात करेंगे और उचित सलाह भी देंगे। उनके द्वारा दी गई सलाह स्वर्ण मानक के रूप में काम करेंगी।”

आज के सत्र का थीम ‘ग्लोबल ऑपथैल्मोलॉजी बियॉन्ड 2020’ पर चर्चा और राय पर आधारित था, जहां ऑपथैल्मोलॉजी के क्षेत्र से सभी विशेषज्ञ और रिसर्च स्कॉलर्स ने खुलकर अपने विचार रखे।

4 दिन लंबी यह कॉन्फ्रेंस 13 से 16 फरवरी, 2020 तक जारी रहेगी। भारतीय ऑपथैल्मोलॉजिस्ट्स के लिए यह दुनिया का सबसे बड़ा मंच है, जहां उन्हें जाने-माने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फेकल्टी मेंबर्स के साथ विचार-विमर्श करने का अवसर मिल रहा है।

एआईओएस के अध्यक्ष, डॉक्टर एस. नटराजन ने बताया कि, “भारत में, लगभग 15 फीसदी आबादी आँखों से संबंधित ऐसी समस्याओं से ग्रस्त हैं, जिनका इलाज संभव है। ऑपथैल्मोलॉजी के क्षेत्र में प्रगति के साथ, आँखों की लगभग हर प्रकार की समस्या का इलाज संभव है, जिससे देश में बढ़ते अंधेपन के बोझ को कम किया जा सकता है।”

एआईओएस की महा सचिव, डॉक्टर नम्रता शर्मा ने बताया कि, “डब्ल्यूएचओ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्वस्तर पर अंधे लोगों की 30ः आबादी कुल 12 मिलियन मामलों को दर्शाती है। हर साल 2 मिलियन नए मामलों के साथ न सिर्फ मरीजों का जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि देश का विकास भी धीमा हो गया है। ऑपथैल्मोलॉजी के क्षेत्र में आई एडवांस टेक्नोलॉजी ही एकमात्र विकल्प है, जिसकी मदद से अंधेपन के मामलों में कमी लाई जा सकती है।“

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में डिबेट, कीनोट प्रेज़ेन्टेशन, चर्चा, पोस्टर प्रेज़ेन्टेशन, वर्कशॉप, नेटर्वकिंग आदि शामिल थे। द अमेरिकन अकैडमी ऑफ ऑपथैल्मोलॉजी, ग्लोबल आई जेनेटिक्स कंसोर्टियम, एशिया पेसिफिक ग्लूकोमा सोसाइटी और सार्क (एसएएआरसी) जैसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एसोसिएशन इस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा रहे।

 

टीम डिजिटल

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