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एकला चलो रे की राजनीति नहीं रही 

म्हारे हरियाणे के पंडित जी ने कहा है कि अब हम अकेले ही चुनाव लडेंगे । अपना हुक्का होगा और अपनी मरोड़ होगी । पंडित जी , जरा संभल के , बडे धोखे हैं इस राह में । बडी कठिन है डगर राजनीति की ।
अगर एक बार एक लहर में आपको स्वर्ण अवसर मिल गया तो यह मत समझिए कि हमेशा के लिए हो गया । नहीं । अबकि बार नहीं चलेगा आपका एकला चलो रे का राग । जनता सब जानती हैं और समझती हैं । वैसे भी स्वयं अमित शाह किसलिए महाराष्ट्र से पंजाब तक भागमभाग करते नजर आ रहे हैं ? बताइए ? अपनी मरोड़ तो केंद्रीय राजनीति में ही खत्म हो ली । अबकि हरियाणा में कैसे चालेगी ? सोचिए । बुरा मत मानिए । कुछ ऐसी बात कह रहा हूं जोकि सच्चाई हैं पर सत्ता में नेता जनता से दूर हो जाते हैं । कुछ सुरक्षा तंत्र तो कुछ चापलूस तंत्र आम आदमी का दुख आप तक पहुंचने नहीं देते । आपको सत्ता के समय सब हरा ही हरा दिखाया जाता हैंं और वैसा देखने की आपको आदत पड जाती हैंं । यह सच्चाई हैंं । यदि आप कोशिश कर आम आदमी के बीच जा पाएं तब अपनी बात अधूरी लगेगी आपको ।
पंडित जी , जनता ने भाजपा को पहली बार पूरी सरकार सौंपी ताकि आप कोई गिला शिकवा न कर सको कि पूरा राज नहीं दिया । फिर बताइए कि खिलाडियों का रोज अपमान क्यों हो रहा है ?  क्यों ऐसा किया जा रहा है ? इससे आपकी मरोड़ कसे रह पाएगी ?
स्कूलों में जो हालत है । आपको सब मालूम है । क्यों गांव गांव की छात्राओं को धरने देने पडे ? यातायात व्यवस्था के लिए ही न ? बालसमंद में लडकियों के काॅलेज की सुध अब ली जब प्रो संपत सिंह ने मामला उठाया । एक काॅलेज के लिए तरस रही हैं लडकियां जिनको पढाने का आह्वान कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी । क्या और कैसे पढाएंगे ? दूर जाती हैं तो यातायात अव्यवस्था से दो चार होती हैं । बसों में जिसका जितना बस चलता है , वह उनसे अभद्रता करता है । खेलती हैं तो कैटेगरी बना दी । नौकरी मांगती हैं तो स्वरोजगार का सबक दे दिया । बताइए । कहां हैंं आपकी मरोड़ का माहौल ?
अमित शाह ने दलबीर सिंह सुहाग से सेल्फी ली या फोटो खिंचवाई । किसलिए ?  क्योंकि वे प्रत्याशी ढूंढने निकले हैं । आप बताइए कैसे पार पाएंगे गठबंधन की राजनीति से ? इनेलो बसपा गठबंधन प्रभावशाली होगा या नहीं ? यह विचार की बात है । मंथन की बात है पर नुकसान तो भाजपा का ही होगा । जो सत्ता में होता है सबसे ज्यादा नुकसान उसी को होता है ।
जाट आरक्षण के मुद्दे पर जो कुछ हुआ वह सोचने लायक है । पहले वर्ष हरियाणा को इसकी आग में झुलसने को विवश होना पडा । अभी तक इस आरक्षण का कोई हल नहीं । आंदोलन जारी । विवाद होते होते बचा । सैनी के समर्थकों और जाट आरक्षण समर्थकों के बीच । सैनी की गतिविधियों को देखते भाजपा में कितने दिन और रखोगे ?
बहुत सारी बातें हैं । इसलिए यह मरोड तो भूल ही जाइए ।
– कमलेश भारतीय 

टीम डिजिटल

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  • बहुत आभार । न्यूज हरपल व दीप्ति एंग्रीश का । मेरे विचारों को बडे पाठक समूह तक पहुंचाने के लिए ।

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