भूपेद्र कौर प्रीत : हिंदी व पंजाबी के बीच एक प्रीत


नई
दिल्ली/ टीम डिजिटल। हिंदी व पंजाबी साहित्य के बीच एक प्रीत है जिसका नाम है भूपेंद्र कौर प्रीत । मूल रूप से हरियाणा के करनाल की निवासी भूपेंद्र कौर का जन्म पूना में हुआ क्योंकि पिता गुरचरण सिंह सेना में डाॅक्टर थे । फिर कुंजपुरा करनाल में प्रारम्भिक शिक्षा के बाद पंजाब के मुक्तसर के गांव मल्लण में शादी हो गयी । पति फाइनेंसर हैं लेकिन लेखन का माहौल देते हैं । बेशक जन्म देने वाले पिता गुरचरण सिंह थे लेकिन गोद लेकर पालने वाले पिता पंजाबी के प्रसिद्ध लेखक करतार सिंह सुमेर थे । इसलिए उन्होंने ही अपने हाथों कन्यादान किया और पंजाबी लेखन के लिए प्रोत्साहित भी किया । वे हरियाणा के लेखकों में सुमेर की बेटी की ही पहचान रखती हैं । वे तो हिंदी में लिखती थीं । पर सुमेर जी ने पंजाबी लेखन से जोडा । इससे यह हुआ कि वे हिंदी पंजाबी के अनुवाद सहज ही करने लगीं । वैसे उन्होंने शादी के दस साल बाद बी ए और एम ए की और बठिंडा के राजेंद्रा काॅलेज में पंजाबी की प्राध्यापिका भी रहीं लेकिन फिर मुक्तसर आ गयीं और दस वर्ष उपभोक्ता न्यायालय की जज भी रहीं । अब फ्रीलास राइटर । पूरा समय साहित्य को ।
– कब से लिखने लगीं थी ?
– तेरह चौदह वर्ष की उम्र में । करनाल की ही एक पत्रिका में प्रकाशित हुई । इसके बाद जनसाहित्य , प्रीतलडी , लौ आदि पत्रिकाओं में रचनाएं आईं ।
– प्रिय कवि कौन ?
– कोई एक नहीं लेकिन केदारनाथ सिंह , अनामिका , राजेश जोशी , चंद्रकांत देवताले आदि प्रिय हैं और इनकी श्रेष्ठ कविताओं का पंजाबी में अनुवाद भी किया है ।
– क्या चिंताएं हैं आपके साहित्य की ?
– पहले खुद की चिंता , फिर समाज की चिंता और फिर अपने अंदर की चिंता यानी अध्यात्म । प्रकृति और समाज की चिंताएं प्रमुख ।
– कितनी पुस्तकें आ चुकीं ?
– पांच काव्य संग्रह । एक हिंदी में भी – कविता की चौखट । पंजाबी में हिंदी कवयित्रियों को अनुवाद किया – औरतों ने कहा के संग्रह के रूप में । आदिवासी कविताओं पर भी काम किया । विश्व कविता पर और भारतीय कविता पर भी काम किया ।
– आपकी आवाज बहुत मधुर है । खनकती आवाज ।  क्या आप गाती भी हैं ?
– मैं गाती तो नहीं पर जालंथर दूरदर्शन पर पंजाबी नाटकों में एक्टिंग जरूर करती हूं । नानक सिंह की सभी कहानियां जो जालंधर दूरदर्शन पर आईं उनकी नायिका मुझे ही बनाया गया । इसके लिए मैं लखविंद्र जौहल और जसवंत दीद जैसे नाटक प्रोड्यूसरों की आभारी हूं । थियेटर में भी काम किया है ।
– कोई पुरस्कार मिले ?
– बलराज साहनी यादगार पुरस्कार , पंकस अकादमी पुरस्कार और फरीदकोट में मनोहरलाल स्मृति पुरस्कार ।
– अब आगे क्या लक्ष्य ?
– कुछ खास नहीं । बस । चुपचाप अपना काम करते रहना ।


कमलेश भारतीय,  पत्रकार

एडमिन

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account