एकाधिपत्य और व्यवसायी समूहन की आशंका

कुछ विक्षुब्ध स्टील कंपनियों, जैसे भूषण स्टील, भूषण पावर एंड स्टील की दिवालियापन की कार्यावाही ने अनुचित प्रतिस्पर्धा के मुद्दों को सक्रिय कर दिया है। यदि टाटा स्टील वा एजेएसडब्ल्यू सफल होते हैं ऐसे विवादित संपत्ति को खरीदने में। यह एकीकरण स्टील इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित होगा। साथ ही यह बोली लगाने की कार्यविधि काॅम्पिटिशन काॅमिशन आॅफ इंडिया (सीसीआई) को आकर्षित जरूर करेगी। भारत में कुल स्टील की उत्पादन क्षमता सालाना 50 मिलियन टन है, जिसमें जेएसडब्यू और टाटा का 40ः स्टील उत्पादन में योगदान है। बता दें कि भूषण स्टील एलटीडी और भूषण पावर एंड स्टील एलटीडी दिवालियापन की कार्यावाही से जूझ रहा है। ये कंपनियां भारत में 15ः स्टील उत्पादन करती हैं।

भूषण स्टील एलटीडी और भूषण पाॅवर एंड स्टील एलटीडी के अर्जन से एकाधिकारात्मक क्रय 55ः मार्केट शेयर से ज्यादा होगा। अभी तक बोली लगाने में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू से आगे रहा है। सभी प्रतिद्वंद्वियों के लिए ऋणशोधनाक्षमता और दिवालियापन कोड (कोड) में बदलाव अनुग्रिहित हैं। इस परिदृश्य में स्टील प्रोडक्टस के खरीदारों में कीमतों के व्यवसायी समूहन की बढ़ोतरी का डर दिखेगा। साथ ही कुछ बाजारों और उत्पादों में एकाधिपत्य की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। इससे बहुत से क्षेत्रों में नकरात्मक नतीजा प्रत्यक्ष होगा, जैसे- आम आदमी के लिए चीजें महंगी हो जाएंगी। फिलहाल स्टील उत्पादों का निर्यात प्रतिषिद्ध है। नतीजतन देश में निर्यात का प्रवेश वर्जित है। बाजार की धारणाओं के अनुसार भूषण पावर एंड स्टील और भूषण स्टील लिमेटड के टाटा स्टील और जेएसडब्लयू ही बिडर्स हैं।

जीईओ रूफ के निदेशक जाॅर्ज जोशी के अनुसार हाल ही सरकार का आईबीसी कोड की शुरुआत का कदम सराहनीय है। उम्मीद है कि यह हमारे लिए हितकारी होगी, लेकिन व्यवसायी समूहन से स्टील इंडस्ट्री विक्षुब्ध होगी। इस परिदृश्य में लगता है कि एक या दो बड़े स्टील इंडस्ट्रियल हाउस ही मार्केट को कंट्रोल करनेंगी। यह कष्टप्रद होगा। नतीजतन इससे कीमतों में भारी इजाफा होगा, जिसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। पीबी ट्रेडर्स के निदेशक गौरी सबकार बेरीवाल के अनुसार कुछेक मार्केट में सिर्फ एक ही विक्रेता होगा। कारण स्टील उत्पादों पर प्रतिबंध है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होगी।

डायना रूफ के निदेशक सुशील जैन के अनुसार इससे अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रभाव पड़ेगा, जो महंगाई को बढ़ाएगा। यही नहीं यह अनुचित प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा। साथ ही ग्राहक और आम आदमी के लिए हितकर नहीं होगा। सिलिगुड़ी के स्टील टेªडर कैलाश अग्रवाल के अनुसार यदि भूषण पावर और भूषण स्टील एक ही खरीददार को बेच दी गईं, तो मार्केट में एकाधिकार हो जाएगा। ऐसे में कड़े कदम उठाने चाहिए, ताकि आम आदमी और भारतीय अर्थव्यवस्था के हितों को बचाया जाए।

 

टीम डिजिटल

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