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बाल शोषण और यौन हिंसा के विरूð समाज चुप्पी तोडे : न्यायमूर्ति श्रीमती गीता मित्तल

नई दिल्ली। बाल शोषण और यौन हिंसा जैसे जघन्य अपराधों से समाज को मुक्ति दिलाने के लिए सभी को आगे आकर अपनी चुप्पी तोडनी होगी। समाज के प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी स्वतंत्रता और जीवन के लिए न्याय पाने का मौलिक अधिकार है । और इसके अन्तर्गत ही प्रत्येक नागरिक को ऐसे मामलों को दर्ज कराने के लिए कानूनी अवसर प्रदान किये गये है, जिनका उन्हें उपयोग करना चाहिए
यह बात आज दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्रीमती गीता मित्तल ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् के नवयुग विद्यालय-सरोजिनी नगर में विद्यार्थियों के लिए ‘‘बाल शोषण एवं यौन हिंसा – अन्र्तवैयक्तिक एवं डिजीटल इंटरफेस‘‘ विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का उद्घाटन करने के उपरान्त विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही ।
यह जागरूकता कार्यक्रम दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् के संयुक्त तत्वावधान मंे विद्यालयों के बच्चों को विशेषकर लडकियों को बाल शोषण और यौन हिंसा के विरूð जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया । नागरिकों को उनके वैधानिक आधिकारों के द्वारा न्याय तक पहुॅंच बनाने के उद्देश्य से आयोजित किये जाने वाले ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व को रेखाकिंत करते हुए दिल्ली की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश श्रीमती मित्तल ने कहा कि इस प्रकार की अपराध गतिविधियों को रोकने के लिए जनता को जागरूक कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त करना जरूरी है और खासतौर से कमजोर वर्गो और बच्चों एवं महिलाओं को ऐसे अपराधों के विरूð सशक्त करना और भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मिडिया और इंटरनेट गतिविधियों के रूझान में आई तेजी से इस प्रकार के अपराधों में गुणात्मक वृðि हुई है जिससे समाज के इस आधुनिक दानव के प्रति तत्काल ध्यान आकर्षित किया जाना जरूरी हो गया है । उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बाल शोषण और यौन हिंसा के प्रति चुप्पी साध कर, उनके मामले दर्ज न कराने के पीछे अधिकतर कारण यह होता है कि उल्लंघनकर्ता या अपराधी पीडि़त का ही कोई निकटजन या प्रियजन होता है ।
दिल्ली उच्च न्यायालय की रजिट्रार (सतर्कता), श्रीमती अदिति चैधरी ने इस कार्यक्रम में नवीं से बाहरवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों से बात-जीत करते हुए पोस्को एक्ट और जुवेनाइल एक्ट के उन प्रावधानों पर प्रकाश डाला, जो बच्चों को ऐसे अपराधों से बचाने के लिए बनाए गए हैं । इस कार्यक्रम में छात्राओं ने बिना किसी हिचक के उत्साहित होकर लगातार प्रश्न पुछे, जिनमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और साइबर स्पेस से संबंधित शोषण से जुड़े प्रश्न थंे । उन्होंने इस कार्यक्रम में बच्चों के अधिकारों और ऐसे अपराधांे को रोकने से संबंधित अन्य विभिन्न कानूनों की भी जानकारी दी ।
इस कार्यक्रम मंे साइबर कानूनों के विशेषज्ञ श्री पवन दुग्गल ने बच्चों को कहा कि यह विषय भारत के अंदर और भी गंभीर इस लिए है क्योंकि भारत विश्व के अन्दर ऐसे अपराधों के लिए दूसरे स्थान पर जाना जाता है । उन्होंने इस कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आई.टी.एक्ट) के उन प्रावधानों की जानकारी से भी अवगत कराया जो सोशल मिडिया और इंटरनेट गतिविधियों में बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करते है साथ-ही-साथ यदि कोई अपराध होता है तो उस मामले में न्याय दिलाने में भी सहायता करते हैं । दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून के विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में एक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों को बाल शोषण और यौन हिंसा के विरूð जागरूक करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया ।
इस अवसर पर पालिका परिषद् के अध्यक्ष श्री नरेश कुमार, सचिव श्रीमती रश्मि सिंह, मुख्य विधि सलाहकार सुश्री रविद्र बेदी, निदेशक (विधि), श्री राजशेखर, निदेशक (शिक्षा) श्री आर.पी.गुप्ता और दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के राज्य और जिला सचिव भी उपस्थित थें ।

 

टीम डिजिटल

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