साहित्य

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  हिन्दी बोलने मात्र से भारत का बोध होता है। विश्व के किसी भी कोने में कोई हिन्दी बोलते और सुनते नजर आएंगे, तो उनका सरोकार भारत से ही होगा। भारतीयता को हिन्दी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है श्री तरुण शर्मा ने। उन्होंने द हिन्दी नाम से
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दरभंगा ।  मैथिली साहित्य जगत के वरिष्ठ साहित्यकार पं विष्णु देव झा विकल की लिखी सतराहालेख ‘ज्ञान गंगा’ का विमोचन वृहस्पतिवार की देर शाम किया गया। शिक्षाविद् डाॅ सुभाष चन्द्र झा की अध्यक्षता में आयोजित विमोचन समारोह में विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू, आकाशवाणी, भागलपुर के कार्यक्रम प्रमुख डॉ प्रभात नारायण झा,
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  निवेदिता मिश्रा झा कुछ रंग उतरे आँचल से बह रही है दूध की धार और आँखों से रक्त टपकता पेट पर बल पड़ रहे और पपड़ियाँ तह तह पर चढ़ती पट सी गयी वो सफ़ेद ज़मीन सुनो तुम बना देना वहाँ स्मृति के लिए कुछ स्मारक और नहीं तो लगा देना छोटे छोटे पत्थरों
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग में एसिस्टेंट प्रोफैसर डाॅ संध्या शर्मा इस बात को साबित कर रही हैं कि मंजिल पर पहुंची तो मंजिल बढा ली । सांग में हरियाणा भर में अपनी पहचान बना चुकी डाॅ संध्या शर्मा इसी से संतुष्ट नहीं रही बल्कि अब और नये आकाश
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। हिंदी व पंजाबी साहित्य के बीच एक प्रीत है जिसका नाम है भूपेंद्र कौर प्रीत । मूल रूप से हरियाणा के करनाल की निवासी भूपेंद्र कौर का जन्म पूना में हुआ क्योंकि पिता गुरचरण सिंह सेना में डाॅक्टर थे । फिर कुंजपुरा करनाल में प्रारम्भिक शिक्षा के बाद पंजाब के मुक्तसर
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  कविता लिखकर मैं खुद को ऋणमुक्त महसूस करता हूं । कविता लेखन मेरी मजबूरी भी और सहज प्रक्रिया भी । नये नये प्रयोग कर पाता हूं कविता के माध्यम से । यह कहना है कवि , प्राध्यापक और फ्रकाशक मोहन सपरा का । मूल रूप से हरियाणा के सिरसा के निवासी
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नई दिल्ली। जैसे जैसे समय डिजिटल होता जा रहा है, चीजें बदलती जा रही हैं। आजकल के युवा अपनी सभ्यता, संस्कृति और साहित्य को भी आॅनलाइन पढना चाहते हैं। समझना चाहते हैं। हर हाथ में मोबाइल और हर घर तक इंटरनेट की पहुंच ने इसे सुलभ बना दिया है। इन्हीं सब सोच के तहत काॅरपोरेट
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हर आँख नम है हर शख्स शर्मिंदा है क्योंकि आज मानवता शर्मसार है इंसानियत लहूलुहान है। डॉ नीलम महेंद्र एक वो दौर था जब नर में नारायण का वास था लेकिन आज उस नर पर पिशाच हावी है। एक वो दौर था जब आदर्शों नैतिक मूल्यों संवेदनाओं से युक्त चरित्र किसी सभ्यता की नींव होते
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पटना। हिंदी और उर्दू में समान पकड रखने वाले मशहूर गजलकार देवेंद्र मांझी को बिहार की राजधानी पटना में सम्मानित किया गया। यह सम्मान बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा 9 जून 2019 को पटना में दिया गया। हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यनारायण आर्य जी द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया। स्वयं देवेंद्र मांझी ने कहा
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  नई दिल्ली। महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अत्यंत सक्रिय थे। संघर्ष के क्रम में उन्हें गिरफ्तारी से बचने प्रथम विश्वयुद्ध के समय 1915 मे जापान भागना पड़ा। उन्होंने वहां शिंजुकू में एक बेकरी संचालित करनेवाले दंपति आइज़ो और कोको सोमा के यहां तीन महीने के लिए शरण ली। यह बेकरी नाकामुराया
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