साहित्य

कृष्णमोहन झा सदियों पुराने अयोध्या विवाद पर गत वर्ष 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने जब अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया और उसे सभी संबंधित पक्षों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया तभी से सारा देश अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के शुभारंभ की अधीरता से प्रतीक्षा कर रहा था ।करोडों राम भक्तों की वह
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बेटी जब छोटी थी तब उसकी एक किताब में कहानी थी । राजा भेष बदल कर घूम रहा था । दोपहर का समय हुआ । भूख लग आई । खेत के किनारे पेड़ के नीचे पसीना पसीना हुआ किसान रोटी की पोटली खोल कर बैठा ही था । -एक राहगीर हूं । भूख लगी है
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निशिकांत ठाकुर पिछले कुछ दिनों से लगातार देश में घटित घटनाओं पर अपनी राय अपने मित्रों के लिए रखता रहा। दरअसल , जो पढ़ता हूं, आगे पीछे सुनता हूं, उसी पर अपना विचार आपके समक्ष रखकर आपसे राय लेने का प्रयास करता रहा हूं। इसलिए इस बार कुछ अलग लीक से हटकर देने जा रहा
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छाए बादल दौड़-धूप कर आए बादल सूरज को ढक छाए बादल मोर मुदित हैं दादुर हर्षित झींगुर हर्ष कर रहे प्रदर्शित वायु बना रथ दौड़ रहा है मेघदूत हो रहे आकर्षित खूब नदी को भाए बादल सूरज को ढक छाए बादल पावस धरा को धुलने लगे रोम कूप सभी खुलने लगे रात तो रात घटाटोप
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नई दिल्ली।  वे बेकार थे और सडकों से अधिक दफ्तरों के चक्कर लगाते थे । भूखे थे और घर से पैसे आने बंद थे । एक होटल में पहुंचे और आवाज लगाई- मस्तराम को बुलाओ । मस्तराम हाजिर हुआ । वहां काउंटर पर सब्जियों से भरे पतीले रखे थे और वे सुबह से भूखे थे
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नई दिल्ली। वह दिन और दिनों जैसा ही था । अब दुर्घटना की याद हो आने पर वही दिन एक उदास दिन के रूप में याद आता है । मैं अपने काम में मगन था कि एकाएक छोटे भाई ने आकर सूचना क्या दी कि जैसे कोई वजनी पत्थर सिर पर दे मारा हो -विक्की
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नई दिल्ली। राहत इंदौरी का एक शेर है, बुज़ुर्ग कहते थे एक वक़्त आएगा जिस दिन, जहाँ पे डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा…बात गहरी है, क्योंकि एक परिवार, पीढ़ियों दर पीढ़ी आगे बढ़ता है. घर के बुजुर्गों से लेकर नवजात बच्चे तक, हम सभी रिश्तों की एक ऐसी डोर में बंधे होते हैं, जिसका धागा
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नई दिल्ली। हम सब शब्दों के जादूगर हैं । किसी भलेमानस ने कहा था और मैंने विश्वास नहीं किया था । अब मैं कह रहा हूं और आपको भी विश्वास नहीं आ रहा होगा । पहली बार हम किसी बात पर विश्वास करते भी नहीं । फिर शब्दों की जादूगरी का दावा लेखक ही क्यों
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नई दिल्ली। इस लॉकडाउन की दुनिया के कारण सभी का जीवन चुनौतीपूर्ण और कठिन हो गया है। इसमें सभी संभावनाएं हैं, कोई भी इंसान इसके प्रभाव से अछूता नहीं है। हम आज ऐसी परिस्थितियों में जीने के लिए मजबूर है जिन्हें हमने पहले कभी अनुभव नहीं किया है, इसने हम सभी को जीवन के वास्तविक
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– अशेष (आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री) हे मानव! तुम शक्तिपुंज हो….! अन्तस् में छिपी है ऊर्जा असीम तुमसे जगमगा सकता है संसार! तुममें है वह शक्ति अपार! यह न कहानी है न चमत्कार! केवल तुम्हें जागना है फिर देखना महिमा अपरंपार!! शक्ति को छिपना ही होता है जन्मजन्मांतर के छल प्रपंच! होते हैं सञ्चित मानस में
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