प्रमुख सुर्खियाँ :

साहित्य

– संजीव राय इतिहास से विलुप्त पुराण से निर्वासित हम लौट रहे हैं इन्द्रप्रस्थ से हमने अपने नाखून से खोदे जलाशय बैल का जुआठ गले में बांध कर, अरावली में चलाया हल, अपनी पीठ को बनाकर हेंगा, विंध्य में उपजाया अन्न हम बनाते रहे सेना के लिए रथ, राजा के लिए सुरंग , मंत्री के
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तपन झा जिंदा रहे तो फिर से आयेंगे बाबू तुम्हारे शहरों को आबाद करने । वहीं मिलेंगे गगन चुंबी इमारतों के नीचे प्लास्टिक के तिरपाल से ढकी झुग्गियों में । चौराहों पर अपने औजारों के साथ फैक्ट्रियों से निकलते काले धुंए जैसे होटलों और ढाबों पर खाना बनाते । बर्तनो को धोते हर गली हर
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नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित विश्व प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्‍यार्थी लॉकडाउन से बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों और उनके बच्चों को लेकर चिंतित हैं। उनकी मदद के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास के साथ-साथ वे इसके लिए लगातार सरकार और कोरपोरेट जगत के लोगों से बातचीत कर रहे हैं। पिछले दिनों अपने गांवों
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कोटि-कोटि जगमग दीपों में, एक दीप मेरा भी अर्पण ।। पश्चिम जनित दुष्ट कोरोना, भरतभूमि पर नहीं टिकेगा। महाप्रलय भी ठहर न पाये, इसको भी इतिहास लिखेगा। कर्मवीर कर रहे लोकहित, शोणित की हर बूंद समर्पण।। एक दीप मेरा भी अर्पण..!! आये चाहे रिपुदल बल से, चाहे राष्ट्रद्रोह के छल से । धैर्य-शील अनुशासन के
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नई दिल्ली। मशहूर कलाकार और वास्तुकार सतीश गुजराल का निधन हो गया है। वह 94 वर्ष के थे। कला जगत से ताल्लुक रखने वाले रंजीत होसकोटे ने शुक्रवार को बताया कि गुजराल का बृहस्पतिवार देर रात यहां निधन हो गया। उन्होंने , ‘‘वह पिछले कुछ वक्त से अस्वस्थ थे।’’ पद्म विभूषण से सम्मानित गुजराल वास्तुकार,
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नई दिल्ली। कुछ कहानियां हमें यादों की पुरानी बस्तियों में ले जाती हैं जबकि कुछ ऐसी होती हैं जिनमें बुने रहस्य सनसनी पैदा कर देते हैं । रोमांच और भय पैदा करने वाली ऐसी कहानियां आपको एक ऐसे रहस्‍यमयी सफर पर ले जाती हैं, जो वाकई रौंगटे खड़े कर देने वाला होता है। कहानीकार सुधांशु
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सचिन गंगराड़े देश की पत्रकारिता जगत के सशक्त हस्ताक्षर कृष्णमोहन झा आज 21 फरवरी को अपने कर्मठ और यशस्वी जीवन के 44 वे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस शुभ अवसर पर जब मैं अपने ह्रदय के उदगारों को अभिव्यक्ति देने के लिए कागज व कलम लेकर बैठा हूं तो बरबस ही मेरे मानस
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नई दिल्ली। साहित्य व कला का महाकुम्भ सेंटर फ़ॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम्स, नई दिल्ली के द्वारा मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा संस्करण का शुरुआत राजनगर किला परिसर में आज से शुरू हो रहा है। चार दिवसीय इस आयोजन का उद्घघाटन मिथिला चित्रकला के प्रतिमान पद्मश्री गोदावरी दत्त द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में
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नई दिल्ली। जयपुर बुकमार्क – जयपुर बुकमार्क (JBM) ने अपने 7वें संस्करण के लिए 100 से अधिक वक्ताओं की सूची जारी की| सूची में आंचल मल्होत्रा, अदिति महेश्वरी गोयल, एजे थॉमस, एलन जी. थॉमस, एना फिलोमेना अमराल, अनिसुर रहमान, अंजुम कात्याल, अनुश्री राठौर, आर्सेन कश्कशियां, अरुनाव सिन्हा, ऐस्पन वॉकर, अतिया ज़ैदी, चंद्र प्रकाश देवल, चंद्रहास
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नई दिल्ली। जब भी ज्ञान परंपरा की बात आती है, मिथिला का नाम सबको सहज ही स्मरण हो आता है। षड्दर्शन और मिथिला मानो एक दूसरे के पर्याय हों। वेद व्यास जिन्होंने वेद का आलेखन किया, पुराणों और महाभारत की रचना की अपने पुत्र शुकदेव को ज्ञान प्राप्ति के लिए मिथिला की पावन भूमि पर
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