90 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय घरों में बिजली का कनेक्शन है – सीईईडब्ल्यू अध्ययन

नई दिल्लीसीईईडब्ल्यू के स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार ग्रिड की बिजली का उपयोग करने वाले 93 प्रतिशत भारतीय घरों में मीटर वाला कनेक्शन है और 91 प्रतिशत को नियमित बिल दिए जा रहे हैं। कौंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने आज यह रिपोर्ट जारी की। अध्ययन से पता चला कि 77 प्रतिशत ग्रिड उपभोक्ता मिल रही बिजली की सेवा से संतुष्ट हैं। इसके अलावा, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता संतुष्टि 2015 के 23 प्रतिशत से तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 2020 में 73 प्रतिशत हो गई है।

इस अध्ययन के तहत भारतीय घरों में ऊर्जा कुशलता की भी जांच की गयी है। इसमें पाया गया कि 88 प्रतिशत भारतीय घरों में एलईडी बल्ब हैं। यह सरकार की उन्नत ज्योति बाई अफोर्डेबल एलईडी फॉर ऑल (उजाला) योजना तथा राज्य सरकारों की पहल के तहत है। ये अध्ययन इंडिया रेसीडेंशियल एनर्जी सर्वे (आईआरईएस) 2020 के निष्कर्षों पर आधारित हैं। यह सर्वेक्षण सीईईडब्ल्यू ने इनिशिएटिव फॉर ससटेनेबल एनर्जी पॉलिसी (आईएसईपी) के साथ मिलकर किया था। आईआरईएस भारत के 21 राज्यों में 152 जिलों के करीब 15,000 घरों को कवर करता है और यह अब तक का पहला अखिल भारतीय सर्वेक्षण है जो भारतीय घरों में ऊर्जा की पहुंच, खपत और ऊर्जा कुशलता का अध्ययन करता है ।

ऊर्जा मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेट्री संजय मल्होत्रा, ने कहा,“अध्ययन रिपोर्ट के लोकार्पण के लिए मैं सीईईडब्ल्यू की टीम को बधाई देता हूं। अब हमारा फोकस गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संतुष्टि पर होगा ताकि संतुष्टि की दर 77 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत और उससे भी ज्यादा की जा सके। सरकार द्वारा संचालित डिसकॉम बेची जाने वाली प्रति यूनिट बिजली पर तकरीबन एक रुपए का नुकसान उठाते हैं।  बिजली लोगों को सक्षम बनाती है। हमें डिसकॉम की सुविधाओं को बेहतर करना है साथ में गरीब परिवारों को बिजली भी मुहैया करानी है।” ”

सीईईडब्ल्यू की प्रोग्राम लीड और अध्ययन की लीड लेखक शालू अग्रवाल ने कहा, “ 20 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय घरों ने अपना पहला पंखा और टीवी 2010-20 के दशक के दौरान खरीदा है। हम उम्मीद करते हैं कि इसके कई सकारात्मक लाभ देखने को मिलेंगे। इनमें उपभोक्ता उपकरण की मांग बढ़ना, औद्योगिक विकास और आजीविका वृद्धि शामिल है।”

 

बिजली तक पहुंच की स्थिति

अध्ययन से पता चला कि कई राज्यों में बिजली के मीटर से बिल करने में सुधार हुआ है। इसमें उत्तर प्रदेश में छह गुना सुधार शामिल है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में बिल से संबंधित मामला बना रहा और इससे डिसकॉम की खराब आर्थिक स्थिति और गंभीर हुई है। अध्ययन से पता चला कि झारखंड में ग्रिड उपयोगकर्ताओं की सबसे कम हिस्सेदारी है जिन्हें नियमित आधार पर बिल (55 प्रतिशत) मिलते हैं। इसके बाद बिहार का नंबर है (64 प्रतिशत)। बिलिंग की अनियमितता असम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी ज्यादा थी। कई राज्यों में भुगतान की खराब दर के मद्देनजर पावर इकाइयों को प्रत्यक्ष और परोक्ष डिजिटल भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए और इसके लिए   माइक्रोआंत्रप्रेन्योर को आगे बढ़ाएं। इनमें ग्रॉसरी की दुकान और जनरल मर्चेन्ट शामिल हैं। सीईईडब्ल्यू के अध्ययन से पता चला कि जिन उपभोक्ताओं को बिल किया जाता है उनमें सिर्फ 17 प्रतिशत उपभोक्ता डिजिटल (ऑनलाइन) भुगतान करते हैं। शहरी भारत में यह 27 प्रतिशत है जबकि ग्रामीण भारत में ऐसे उपभोक्ता 12 प्रतिशत हैं। यह इस तथ्य के बावजूद है कि 70 प्रतिशत भारतीय घरों में स्मार्टफोन हैं।

 

 

ऊर्जा कुशलता

 

एलईडी बल्ब और एयर कंडीशनर के उपयोग के रूप में ऊर्जा कुशलता को अपनाने के मामले में भारत में अच्छी-खासी प्रगति हुई है। अध्ययन से पता चला कि भारतीय घरों में एक बिलियन बल्ब और ट्यूब का स्टॉक है और इनमें दो तिहाई एलईडी आधारित हैं। उड़ीशा में एलईडी बल्ब का उपयोग करने वाले घरों का हिस्सा सबसे ज्यादा है। इसके बाद दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का नंबर है। इसका मुख्य कारण सक्रिय सरकारी योजनाएं हैं। अध्ययन से पता चला कि 75 प्रतिशत से ज़्यादा एसी उपयोगकर्ता स्टार लेबल वाले एसी का उपयोग करते हैं जबकि 60 प्रतिशत घरों में स्टार लेबल वाले रेफ्रीजरेटर हैं। हालांकि, अन्य प्रमुख उपकरणों जैसे गीजर, टेलीविजन, छत का पंखा और वाशिंग मशीन के मामले में नतीजे कम उत्साहजनक रहे। 93 प्रतिशत भारतीय घरों में पंखों का उपयोग होता है लेकिन सिर्फ तीन प्रतिशत घरों में ऊर्जा कुशल पंखे हैं।

टीम डिजिटल

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