नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है सरवाइकल स्पोंडिलाइटिस में 

सुचि बंसल

हम अपने आसपास अक्सर लोगों को कहते सुनते हैं कि “मुझे सरवाइकल की समस्या हो गयी।“ दरअसल सरवाइकल स्पोंडिलाइटिस गर्दन की हड्डियों (रीढ़ की हड्डी का सरवाइकल रीज़न) के बीच घिसाव से उत्पन्न होने वाली समस्या है। जो कि अक्सर उम्र बढ्ने के साथ साथ बढ़ती जाती है लेकिन आजकल यह समस्या युवाओं में भी व्यापक रूप से देखने में आ रही है। आंकड़े यह बताते हैं भारत में करीब 10 मिलियन लोग हर साल इस समस्या से जूझते हैं। लगभग हर 7 में से एक व्यक्ति इस समस्या से पीड़ित है।  उम्र बढ़ने के अलावा इस समस्या के होने के और भी बहुत से कारण है। जिनमें सबसे बड़ा कारण है अनियमित जीवन शैली। बहुत ज्यादा काम के कारण गर्दन पर तनाव आना, घंटों तक लगातार पढ़ना और लैपटाप या कम्प्यूटर पर काम करना, गलत पॉस्चर में बैठना, बहुत ज्यादा या ऊँचे तकिये लगाकर सोना, बहुत ज्यादा मुलायम गद्दे का उपयोग करना आदि भी इसके कारणों में से एक हो सकते हैं।

लक्षण:

अक्सर लोग यह समझते हैं कि गर्दन का दर्द या जकड़न ही सरवाइकल की पहचान है परंतु सरवाइकल के और भी कई लक्षण हो सकते हैं। यदि आप इनमें से किसी भी परेशानी का सामना कर रहे है तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।
गर्दन में दर्द और जकड़न, गर्दन घूमने में समस्या आना चक्कर आनाकंधों में दर्द व जकड़न कंधों के साथ साथ पूरे हाथ में दर्दउँगलियों या हथेलियों में सुन्नपन

ये योगाभ्यास पहुचाएंगे आराम:

सरवाइकल कोई बहुत गंभीर समस्या नहीं है यदि आप सही समय पर ध्यान देते हैं तो इसको काफी हद तक ठीक भी किया जा सकता है। अगर आप सरवाइकल की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो इन योगासनों को नियमित रूप से करें :

नैक बैंडिंग एंड रोटेशन :

कमर सीधी तथा कंधे अपनी जगह पर केवल अपनी गर्दन को धीरे- धीरे श्वास लेते हुए ऊपर ले जाना है और श्वास छोड़ते हुए बीच में लाना है। फिर गर्दन को श्वास लेते हुए बायीं ओर मोड़ना है और श्वास छोड़ते हुए बीच में लाना है इसी प्रकार दायीं तरफ से भी करना है। उसके बाद गर्दन को बायीं तरफ ले जाते हुए अपने कान को गर्दन से टच करने की कोशिश करनी है। इसी तरह से दायीं तरफ करना है। नैक रोटेशन में गर्दन को पीछे की तरफ बायीं से दायीं ओर और दायीं से बायीं ओर लाना है। इस अभ्यास में अपनी आँखें खुली रखें तो अच्छा रहेगा। प्रत्येक अभ्यास को 5-10 बार करना है। यह ध्यान रखना है कि गर्दन पर किसी तरह का तनाव न पड़े सरलता पूर्वक जितना हो सके उतना करें। ये सभी अभ्यास गर्दन की जकड़न को दूर करते हैं साथ ही वहाँ की मांसपेशियों को लचीला भी बनाते हैं।

मकरासन

पेट के बल लेट जाएँ। अपने दोनों पैरों के बीच में गैप रखते हुए अपनी ऐड़ियों को दूर दूर बाहर की ओर तथा पंजों को अंदर की ओर आरामदायक स्थिति में रखें। अपने हाथों को कोहनियों से मोड़कर  जमीन पर रखते हुए हथेलियों को अपने गालों के नीचे रखें अर्थात अपने चेहरे को अपनी हथेलियों पर टिकाएँ। अपनी कोहनियों को दूर दूर रखें इसका सीधा असर गर्दन पर पड़ता है। लंबी गहरी श्वास लेते रहें। इस आसन को करने से गर्दन का तनाव तथा जकड़न दूर होती है।

भुजंगासन:

पेट के बल लेट जाएँ दोनों पैरों को मिलाकर रखें। अपनी हथेलियों तथा कोहनियों को अपने कंधों के बगल में जमीन पर रखें। श्वास लेते हुए धीरे धीरे अपने सीने को ऊपर को ओर उठाएँ। अपने चेहरे को जितना पीछे की तरफ ले जा सकते हैं, ले जाएँ। फिर श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे वापस आ जाएँ। इस अभ्यास को 5 बार करने का प्रयास करें। इस अभ्यास से गर्दन तथा कंधों के दर्द में आराम मिलता है तथा वहाँ का तनाव दूर होता है।

गर्दन को स्थिर रखने का प्रयास करना :

गर्दन को स्थिर रखते हुए अपने बाएँ हाथ से बायें चेहरे को दायीं ओर हल्का सा पुश करना है जबकि उसी समय गर्दन से विपरीत प्रैशर डालते हुए अपनी गर्दन को स्थिर रखने का प्रयास करना है। इसी तरह दायीं तरफ से भी करना है। अगले अभ्यास में अपनी ठुड्डी के नीचे हाथ रखते हुए उसे ऊपर की तरफ पुश करना है जबकि उसी समय गर्दन से विपरीत प्रैशर डालते हुए अपनी गर्दन को स्थिर रखने का प्रयास करना है। इसी तरह अपने दोनों हाथों की उँगलियों को इंटरलॉक करके अपने सिर के ऊपर रखते हुए नीचे की ओर पुश करना है उसी समय गर्दन से विपरीत प्रैशर डालते हुए अपनी गर्दन को स्थिर रखने का प्रयास करना है। फिर अपने दोनों हाथों की उँगलियों को इंटरलॉक करके अपने सिर के पीछे रखें और आगे की ओर धकेलने की कोशिश करें और गर्दन से उसके विपरीत प्रैशर डालकर उसे स्थिर रखने का प्रयास करना है। इसी प्रकार से आगे से पीछे की ओर पुश करते हुए गर्दन को स्थिर रखना है। प्रत्येक अभ्यास शुरुआत में 5-5 बार करना है फिर धीरे धीरे क्षमतानुसार बढ़ा सकते हैं।

इसका भी रखें खास ध्यान :

ऑफिस वर्क या पढ़ाई के बीच बीच में हल्का ब्रेक लें जिसमें अपनी गर्दन को ऊपर- नीचे, दायीं- बायीं ओर घूमना न भूलें। इससे गर्दन में पड़ने वाला तनाव दूर हो जाता है। सोकर उठते वक्त सीधा कभी न उठें बल्कि पहले बायीं करवट पर आयें फिर धीरे से उठकर बैठें। इससे गर्दन पर कभी भी झटका नहीं आएगा। लैपटाप या कम्प्यूटर पर ज्यादा झुककर काम करने के बजाय कमर, गर्दन सीधी रखते हुए काम करें।  बहुत सारे तकिये के वजाय पतले तकिये का प्रयोग करें और तकिये को सिर और कंधे के बीच वाली जगह तक लगाएँ जिससे गर्दन पर अनावश्यक प्रैशर नहीं आने पाएगा। दिन के समय सरवाइकल कोलर का उपयोग कर सकते हैं।

(लेखिका सुचि बंसल प्रसिद्ध योगा थेरेपिस्ट हैं।)

टीम डिजिटल

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