खग्रास चंद्रग्रहण पर नियमों का पालन है जरूरी

पंडित शास्त्री सौरभ

नई दिल्ली। आज सुबह 8 बजकर 18 मिनट से लग चुका है सूतक । आज माघ पूर्णिमा भी है। शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन दान पुण्य और पूजन के लिए बहुत ही खास माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए दान पुण्य से मोक्ष का द्वार खुलता है। लेकिन इस साल माघ पूर्णिमा जो 31 जनवरी को है उस दिन ग्रहण भी लगा है। संयोग ऐसा बना है कि सूर्योदय के कुछ घंटों के बाद ही ग्रहण का सूतक लग चुका है और मंदिरों के दरवाजे बंद हो चुके हैं।
माघ पूर्णिमा के दिन चन्द्रग्रहण का लगना एक दिव्य संयोग माना जा रहा है। इस अवसर पर स्नान और दान-पुण्य का लाभ सामान्य दिनों से कई गुणा अधिक प्राप्त होगा। लेकिन दान पुण्य करने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जो भी करना हो वह सुबह 8 बजे से पहले करलें।

वैसे शास्त्रों के दिशानिर्देश के अनुसार ग्रहण के मौके पर दान करने के लिए सबसे उत्तम समय वह माना गया है जब ग्रहण का मोक्ष काल समाप्त हो जाता है। यानी ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करना चाहिए। इस नियम के अनुसार 31 जनवरी की रात 8 बजकर 41 मिनट 11 सेकंड के बाद स्नान करके दान करना उत्तम फलदायी रहेगा।
सुबह 9.17 तक भोजन कर लें । बूढ़े, बच्चे, रोगी और गर्भवती महिला आवश्यकतानुसार दोपहर 11.30 बजे तक भोजन कर सकते हैं । रात्रि 8.42 पर ग्रहण समाप्त होने के बाद पहने हुए वस्त्रोंसहित स्नान और चन्द्रदर्शन करके भोजन आदि कर सकते हैं ।

ग्रहण के समय पालनीय

(1) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए ।
(2) सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना । यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है ।
(3) ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है ।
(4) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है ।

एक नजर में चन्द्रग्रहण का समय

ग्रहण का स्पर्श कालः- शाम 5 बजकर 18 मिनट 27 सेकंड
खग्रास आरंभः- शाम 6 बजकर 21 मिनट 47 सेकंड
ग्रहण मध्यः शाम 6 बजकर 59 मिनट 50 सेकंड
खग्रास समाप्तः शाम 7 बजकर 37 मिनट 51 सेकंड
ग्रहण मोक्षः रात 8 बजकर 41 मिनट 11 सेकंड

 

(शास्त्री सौरभ, गीता भवन, बंगाली मार्केट, नई दिल्ली)

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