पत्रकार स्वतंत्र होता है , मजबूर नहीं : डाॅ पाटिल

पत्रकार स्वतंत्र होता है , मजबूर नहीं । परंतु मुनाफे की मजबूरी से मीडिया यानी लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कमजोर हो रहा है । आजकल जो हालात हैं उनमें सरकार का , बैंक का और मीडिया का भरोसा उठता जा रहा हैं ।
यह कहना हैं डाॅ मधुसूदन पाटिल का । वे डेमोक्रेटिक फोरम , जनवादी लेखक संघ व हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा आयोजित वर्तमान दौर में मीडिया की भूमिका पर आयोजक संगोष्ठी के अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रहे थे । डाॅ पाटिल ने यह भी कहा  कि भाषा के मामले में मीडिया दरिद्र हो चुका हैं । क्रांति ने भी कहा कि यह बडे दुख की बात है कि आज केंद्र में मुनाफा है , मीडिया के सिद्धांतों की रक्षा नहीं । निष्पक्षता नहीं बल्कि एकपक्षता है ।
इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राकेश क्रांति ने कहा कि मीडिया को सबसे बडी चुनौती आज सोशल मीडिया और फेक न्यूज से हैं । इसलिए चुनाव कीजिए और वही पढिए जो आप पढना चाहते हैं ।
अजीत सिंह ने कहा कि चैनल्स और अखबार जो बिकता है , उसे ही परोसते हैं । टीआरपी के गिरने और पाठक संख्या कम होने का डर सताता रहता हैं ।
कमलेश भारतीय ने कहा कि इससे बडी निर्लज्जता क्या होगी कि जेल में बंद बाबाओं के विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं । चुनाव में पेड न्यूज प्रकाशित कर जनता को गुमराह किया जाता हैंं । मीडिया लगातार अपनी विश्वसनीयता खो रहा हैंं ।
संचालन विक्रम मित्तल एडवोकेट ने किया ।  लेखक संघ के राज्य सचिव मास्टर रोहताश ने मुंशी प्रेमचंद की साहित्यिक व सामाजिक भूमिका पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला ।
संगोष्ठी में डाॅ सतीश कालडा,  डाॅ सरोज , आर सी जग्गा, मास्टर रामकुमार, मास्टर रमेश, सुरेंद्र सेनी , बलजीत भ्याण,  दिनेश सिवाच,  सुशीला बहबलपुर,  श्रद्धांनंद राजली,हरफूल भट्टी, डॉ रमेश सिधड, होशियार खान, एडवोकेट सुमित फोगाट, अमन मोर, प्रोफेसर अतर सिंह,योगेश शर्मा, करतार सिवाच, शमशेर आर्य, तान्या खुराना, आदि मौजूद रहे ।
 कमलेश भारतीय 

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  • समाचार को सानिया देने के लिए शुक्रिया ।

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