डिनर ही नहीं दिल भी परोसिए!

रिश्ता पेट से होकर गुजरता है। लोगों से मेल-मुलाकात बढानी हो, संबंधों में मजबूती लानी हो, तो एक पार्टी जरूरी है। यदि डिनर पार्टी हो जाए, तो क्या कहने। यह पर्सनल लेवल से लेकर एक सोशल स्टेटस और पाॅलिटिकल सर्किल में डिनल डिप्लोमेसी तक आ गई है। लेकिन, जरूरी है कि आप डिनर पार्टी देने से पहले पूरी तैयारी कर लीजिए।

दीप्ति अंगरीश

मसरूफियत की भी हद है। समय की सुइयां तो भागती रहेंगी। यदि आप इसमें ही उलझ गए, तो सोशल लाइफ से कट जाएंगे। लोग आपसे कतराने लगेंगे। और तो और इससे बैंक बैलेंस, लाइफस्टाइल शाइनी-शाइनी हो जाएगा, लेकिन मेंटल हेल्थ व सोशल हेल्थ आपको बाय-बाय कर देगी। शायद अभी यह बातें आपको लफ्फाजी लग रही होंगी, लेकिन यह सौ फीसदी सच है। भई, बिना मिर्च-मसाले के जब खाना बोरिंग लगता है, तो रौनक के बिना जीवन कितना डल लगेगा। जरा सोचिए। लाइफ में बैलेंस लाइए। और थोड़ा-सा स्पाइस भी। उसे खुलकर इंजाय करिए। सोशल लाइफ को भी अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं। यदि जीवन रोटी, कपड़ा, मकान और दैनिक जरूरतों में ही उलझा रहेगा, तो इनर ग्रोथ कैसे होगी? जीवन बेरंग हो जाएगा। इसे स्पाइसी बनाते हैं। रंगों से सराबोर करते हैं। शुरुआत करते हैं डिनर पार्टी से।

क्यों दें डिनर पार्टी ?

पार्टी काम-काम की सुबह-शाम की रट से कितने हमारे अपने हमसे दूर होते जा रहे हैं। भले ही उन्हें वाॅटस ऐप से रोजाना गुड माॅर्निंग व गुड नाइट का मेसैज दो। इससे हम अपने-उनके जेहन में तो रहते हैं, लेकिन भावनाएं व संवेदनाओं का क्या। सब, शून्य हो गई हैं। यही नहीं कई बार हम खूनी रिश्तों से इतर लोगों को पसंद करते हैं, लेकिन बहुत कुछ उन्हें हाल-ए-दिल ब्यां नहीं कर पाते। या यूं कहें कि ऐसा मौका ही नहीं मिलता। कई दफा प्रोफेशनल लाइफ के लोगों को हम पर्सनल लाइफ में शेयर करना चाहते हैं, पुराने यार-दोस्तों से मिलना चाहते हैं, रूठों को मनाना चाहते हैं, मैच मेकिंग की देख-दिखाई की गुप्त बातें करनी होती हैं, दूर-पार के नाते-रिश्तेदारों से मिलना होता है, आस-पड़ोस के लोगों से संपर्क बढ़ाने होते हैं, लोगों में अपनी गुडी-गुडी इमेज देनी होती है, ऐनीवर्सरी से लेकर फेस्टिवल सेलिब्रेट करने होते हैं….ऐसे में डिनर पार्टी से बेहतर कोई विकल्प नहीं। एक बात और। यदि आपकी पाॅकेट इजाजत देती है, तो डिनर पार्टी में कामवाली या कुक की मदद ले सकते हैं। घर में आयोजित पार्टी को थीम भी दे सकते हैं, जिसमें ड्रेस कोड हो, मौज मस्ती के लिए गेम्स की व्यवस्था हो। इसके लिए आप इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की सहायता ले सकते हैं।

डिनर पर मिलते हैं आम ओ खास

जिसे मन करें, कोई अवसर मिलता है, वह डिनर पार्टी आयोजित कर लेता है। आपको दोेस्तों को बुलाना हो, रिश्तेदारों से मिलना हो, डिनर पार्टी पर बुला लें। डिनर पर लोग फुर्सत में आते हैं। यदि यह वीकऐंड में हो, तो पार्टी में मौशिकी और भी बढ जाती है। आम लोगों के साथ ही अब पाॅलिटिकल एरिना में भी डिनर डिप्लोमेसी का प्रचलन बढता जा रहा है। जब भी हमारे देश में दूसरे देश के राष्ट्ाध्यक्ष आते हैं, हमारे प्रधानमंत्री हैदराबाद हाउस में या राष्ट्पति अपने प्रेसिडेंट हाउस मंे डिनर पार्टी करवाते हैं। जहां बडे लोगों का मिलना जुलना होता है। अंतर्राष्ट्ीय स्तर पर संबंधों में मजबूती आती है। याद कीजिए, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पहली बार अमेरिका गए, तो वहां के राष्ट्पति बराक ओबामा ने डिनर पार्टी दी और रेड कारपेट पर मोदी जी का स्वागत किया था। पूरे विश्व की मीडिया में वह डिनर पार्टी कौतुहल का विषय रही थी।

नेताओं में बढा है डिनर पार्टी का चलन

साल 2015 के अंत में जब जापान के प्रधानमंत्री को को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिनर पार्टी दी, तो उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र काशी के 35 खास लोगों को भी विशेषतौर पर बुलाया। इन खास 35 के अलावा 33 और वीवीआईपी भी डिनर पार्टी में शामिल हुए। काशी के नदेसर स्थित होटल ताज में पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ आयोजित डिनर पार्टी में 68 लोग वाराणसी से शामिल हुए थे।
बीते साल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की डिनर पार्टी भी काफी चर्चित रही, जो उन्होंने देश के कई बडे शहरों सहित अमेरिका और यूरोपिय देशों में दी। कहा गया कि डिनर पार्टी के बहाने अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के लिए फंड जुटाए हैं। इस वर्ष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिए गए रात्रिभोज में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती समेत कई प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन मायावती और अखिलेश नहीं पहुंचे थे। दरअसल, इस भोज के जरिए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति चुनाव के समीकरण की संभावनाएं तलाशी जानी थी, लेकिन नेताओं के न पहुंचने से विपक्ष की दूरियां साफ उजागर हो गईं।

कन्फर्म करें गेस्ट लिस्ट

हर समय पैसे का रोना नहीं रोएं। अपने सीमित संसाधनों के अनुसार घर पर डिनर पार्टी आॅर्गेनाइज करने के फैसले के बाद गेस्ट लिस्ट जरूर कन्फर्म करें। उसी के अनुसार पार्टी की तैयारी करें। पार्टी में अहम आपकी अच्छी मेजबानी नहीं खाने की क्वालिटी, प्रीपे्रशन और गार्निशिंग का अहम रोल होता है। साथ गेस्ट लिस्ट की फूड हैबिट भी जान लें। कोशिश करें आप वेजिटेरियन हैं या नाॅन वेजिटेरियन उसी के अनुसार ही मेन कोर्स से स्र्टाटर रखें जाएं। आपका बजट वेज व नाॅन वेज के लिए राजी है, तो दोनों रखें। खाना खुद पका रहें हैं, तो गेस्ट लिस्ट कन्फर्म होने के बाद थोड़ा-सा एक्सट्रा पकाएं। ताकि खाना कम न पड़े।
पार्टी आप दे रहे हैं, तो गेस्ट भी आपके बुलाए ही होंगे। आपका डिनर पार्टी देने का औचित्य क्या है, उसी के अनुसार गेस्ट बुलाएं। यदि पार्टी आॅफिशियल व प्रोफेशनल लोगों की है, तब आपको हर तरह के लोगों को झेलना होगा। यानी कई गेस्ट आपको अनकम्फेर्टेबल महसूस कराते हैं। वहीं कुछ खीझाते हैं, खाने व घर में ना-नकुर व हास-परिहास करते हैं। यादि डिनर पार्टी पूरी तरह से पर्सनल है तो गेस्ट अपने कम्फर्ट के अनुरूप बुलाएं। या यूं कहें कि जिनके साथ आप खुलकर घुल मिल पाएं। बेझिझक दोनों ओर से बोल पाएं। कुछ पल के लिए सही जीवन को जी पाएं। होस्ट व गेस्ट के कुछ काॅमन इंटरेस्ट हों।

धीमा-धीमा लश्कारा

डिनर पार्टी में खाने के साथ एम्बियंस का अहम रोल है। एम्बियंस का लश्कारा लाइटिंग के बिना अधूरा है। सच है कि मिडिल क्लास लोगों के घर में सिर्फ कुछ दिनों के लिए लाइटिंग का सर्किट बदलना नामुमकिन है। ऐसे में मन क्यों मसोसे हम? यदि हमारे हाॅल या ड्राइंग रूम में लाइट डिमर्स सुविधा है तो ठीक। अन्यथा हम इसे इंस्टेंट क्रिएट कर सकते हैं। भीनी-भीनी खुशबू और मंद-मंद रोशनी वाली मोमबत्तियों से। मंद-मंद रोशनी माहौल को खुशनुमा, पाॅजिटिव एनर्जी वाला, रूमानी और अपनापन बिखेरने वाला बनाती हैं। इस माहौल में एरोमा वाली अगरबत्ती भी प्रयोग करें।

प्री – प्रीप्रेशन करें

इतना तय है कि डिनर घर पर ही बनाएंगे, तो आखिरी समय की हड़बड़ाहट से बचें। कुकिंग एक्सपर्ट सुनीता दिनानी कहती हैं कि डिनर डेट के तय तारीख से पहले जरूरी कुकिंग आइटम की खरीदारी कर लें। मसाले, हब्र्स, सब्जियां, तेल, प्री कुकड मसाले, बैटर….आदि। एक दिन पहले ही सब्जियां काट लें। ग्रेवी की तैयारी कर लें। चावल व दालें छान लें। रात के समय ही आटा गूंथ दें। खमीर उठाने के लिए चीजें रख दें। सलाद के लिए पतली-पतली सब्जियां काटकर डीप फ्रिज कर दें। ऐसा करने से समय की बचत होगी। साथ ही आखिरी समय में डिनर बनाने में हड़बड़ाहट नहीं होगी।

प्लान करें डिनर

डिनर पार्टी खाने के बिना अधूरी है। खाने का मेन्यू डिसाइड करने के बाद कुकिंग की स्पेशल शाॅपिंग कर ली आपने, तो उसी कुकिंग में हाथ अजमाएं, जिसमें आप एक्सपर्ट हों। जयपुर की कुकिंग और डायनिंग एक्सपर्ट कहती हैं पार्टी के लिए एक्सपेरिमेंट नहीं करें। इंटरनेट से रेसिपी सीखकर फस्र्ट ट्राई डिनर पर नहीं करें। हो सकता है नेट वाला ट्राई डिनर की एैसी-तैसी कर दें। नई रेसिपी पहले बना कर देखें। फिर ही डिनर पर बनाएं। खाना पंजाबी होगा, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, चाइनीज, इैटालियन…सब पहले से तय करें।

जल्दी हो कुकिंग

मसलन आपने डिनर का समय रात 8 बजे रखा है, तो कुकिंग दोपहर से ही शुरू कर दें। ऐन मौके से चंद घंटे पहले कुकिंग काम चलाऊ ही होती है। और गार्निशिंग काफूर हो जाती है। बस, कोशिश होती है कि जैसे-तैसे कुकिंग हो जाए। आखिर स्पेशल कुकिंग में स्वाद और ढेर सारा प्यार जो उड़ेलना है। इसके लिए प्र्याप्त समय तो चाहिए जी।

थोड़ी-बहुत खूबसूरती

हमारा घर फाइव स्टार होटल की तरह नहीं, पर उसे प्रीजेंटबल तो बना ही सकते हैं। डिनर टेबल पर करना है या जमीन पर। दोनों ही जगह साफ-सुथरी हो। सेंटर में भीनी-भीनी खशबू वाले ताजे फूल रखें। डिनर सेट, कटलरी, मसाल दान, आचार, केचअप की बाॅटल साफ सुथरी हो।
जैसे खाने के बिना डिनर पार्टी अधूूरी है, वैसे ही म्यूजिक भी अहम है। इस मौके पर सुकून देने वाला लाइट म्यूजिक या इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक प्ले करें। जिसे आप सभी इंजवाय भी करें और आराम से गपशप भी हो जाए। चीफ शेफ और हाॅस्पिटैल्टिी एजुकेटर परवंदिर बाली कहते हैं एक राज है कि म्यूजिक के साथ खाना और टेस्टी लगता है। तो म्यूजिक और टेस्ट में समझौता नहीं करें।

स्टार्टर से मेनकोर्स

डिनर टाइम 8 बजे का है, तो आप 7 बजे स्टार्टर परोसिए। इससे आपके गेस्ट डिनर की तरफ कूदेंगे नहीं और डिनर का स्वाद ले पाएंगे। खाने की थीम देसी है, तो स्टार्टर में टोमैटो सूप, फिर कबाब, समोसा, पकौड़ा, आलू फ्राई चिप्स रख सकते हैं। इनका फ्लेवर बढ़ाएं धनिया या इमली चटनी से। मेन कोर्स में दाल मखनी, पनीर पसंदा, बैंगन भरता, फ्राई गोभू, जीरा राइज, पाइनऐप्पल रायता, पापड़ , तंदूरी रोटी और स्वीट डिश में गाजर का हलवा, रसगुल्ला, फ्रट क्रीम या गुलाब जामुन रख सकते हैं। इस बाबत न्यूट्रशनिस्ट गीतू अमरनानी का कहना है कि डिनर इंडियन हो, लेकिन उसमें हेल्थ भी हो। जहां फ्राई की जगह बेक और स्टीम की आॅप्शन हो उसे अजमाएं। मैदा की जगह गेंहूं व ओटस के आटे का प्रयोग करें। पूरी की जगह तंदूरी रोटी हेल्थी आॅप्शन है। जितना हो सके क्रीम की ग्रेवी से बचें। इसे कैलोरी व कोलेस्ट्राॅल बढ़ेगा। कुकिंग के हेल्दी आॅप्शन अजमाएं। खाने को एरोमैटिक व हेल्दी बनाएं हब्र्स से, जैसे रतनजोत, राधुनी, कबाबी चीनी, पंचफोरन, कंठारी वाइट चिल्लीज, पोस्ता पेस्ट, मराठी मोग्गू आदि।

सब हो रेडी-रेडी

डिनर टेबल पर हो या जमीन पर। सब तैयार होना चाहिए। खाना बुफे में सर्व करें। कटलरी से लेकर खाना तैयार होना चाहिए। आखिरी समय में कुकिंग नहीं सिर्फ खाना गर्म करना बेहतर होगा। तभी आप खुलकर डिनर गेस्ट से गपशप कर पाएंगे। हां, पानी का जग रखना नहीं भूलें।
मनी सेवर भी हैं. बाहर खाना से सस्ता विकल्प है घर पर डिनर पार्टी होस्ट करना। बजट गड़बड़ाए नहीं इसके लिए फैंसी फूड आइटम नहीं पकाएं। इसके लिए खास तरह के मसाले चाहिए होंगे। पाॅकेट को देखकर ही डिनर मेन्यू तैयार करें। इन डिनर पार्टी से आप रिलैक्स ही नहीं होंगे आपका सोशल सर्कल भी मजबूत होगा। साथ ही लोग आपके करीब आएंगे।

गरीब भी देते हैं डिनर पार्टी

ऐसा नहीं है कि गरीबों में डिनर पार्टी का आयोजन नहीं होता। वे भी डिनर पार्टियाँ देते हैं। उनकी डिनर पार्टियाँ दिल्ली की डिनर पार्टियों की तरह सुर्खियों में तब आती हैं, जब जहरीली शराब से कई मर जाते हैं। गरीब मरते ही इसलिए हैं ताकि उनकी डिनर पार्टी का जिक्र अखबारों में हो जाए। कालाहांडी और बोलांगीर जिलो के बाशिंदे दरअसल भूख से नहीं, डिनर पार्टियों से मरते हैं। यह बात दीगर है कि उनकी डिनर पार्टियों में हवा खाई जाती है और हवा ही खिलाई जाती है। उनकी डिनर पार्टियाँ नंग-धड़ंग स्थिति में होती हैं।

 

दीप्ति अंगरीश

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