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जागिए!!! ई-वेस्ट घातक है

भारत में ई-वेस्ट से निपटने के लिए विभिन्न हितधारक एकसाथ मिलकर काम करना होगा। यह बताते हुए
करो संभव के संस्थापक प्रांशू सिंघल।

 

क्या आप भी बेकार पड़ चुके गैजेटस को अपने से दूर नहीं करना चाहते ? ई-वेस्ट से अनजान हैं, तो बता दें कि यह खोखले गैजेटस आपके लिए, आपके अपनों के लिए घातक हैं। कारण इनसे रिसने वाले घातक रसायन, जैसे लीड, आर्सेनिक, कैडमियम आदि। देर-सवेर यह सब कुछ लील लेंगे। जब तक यह पूरी तरह पर्यायवरण में घुल जाएंगे, तब तक बहुत कुछ छूट जाएगा। नतीजतन जिन इलाकों में ई-वेस्ट की बहुलता है वहां चर्चिनोगेनिए, सेंसरी इम्पैर्मेंट, मेमोरी लाॅस, मांसपेशियों का कमजोर पड़ना, धीमी गति से विकास होना, टीबी आद जकड़ लेगा।
ऐसी स्थिति नहीं आए, तो आपको जागना होगा। औरों को जगाना होगा। इसके लिए आपका हाथ थामा है कारो ने। करो संभव एक तकनीक-सक्षम, पर्यावरण-लाभकारी और सामाजिक रूप से जिम्मेदार ई-कचरा प्रोड्यूसर दायित्व (पीआरओ) संगठन है, जो प्रोड्यूसर्स, एनजीओ, सरकारी निकायों (केंद्र और राज्य), उद्योग संगठनों, थोक उपभोक्ताओं, कचरा बीनने वालों और एग्रीगेटर्स तथा जिम्मेदार रिसाइक्लर्स के साथ भागीदारी के जरिये ई-कचरा प्रबंधन के लिए पूरे भारत में परिवर्तनकारी समाधान की स्थापना कर रहा है। करो के प्रोड्यूसर सदस्यों में कई प्रमुख ब्रांड जैसे एप्पल, डेल, एचपी और लीनोवो शामिल हैं। दुनिया में भारत पांचवां सबसे बड़ा ई-कचरे का उत्पादक है। ।ैैव्ब्भ्।ड.बज्ञपदमजपबे एक अध्ययन के मुताबिक, भारत का ई-कचरा उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से 2020 तक बढ़कर 52 लाख टन प्रतिवर्ष होने का अनुमान है। भारत में पैदा होने वाले ई-कचरे का केवल 1.5 प्रतिशत ही रिसाइकिल होता है और 95 प्रतिशत से अधिक ई-कचरा अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा एकत्रित किया जाता है, जो रिसाइकलिंग और निराकरण में असुरक्षित तरीकों का इस्तेामाल करते हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों का अपव्यय, अपूर्णीय पर्यावरण क्षति और ऐसे पर्यावरण में सांस लेने या बिल्ड-अप के जरिये विषाक्तता के कारण खतरनाक स्वास्थ्य प्रभाव होता है।
प्रांशू सिंघल, संस्थापक, करो संभव ने कहा कि एप्पल, डेल, एचपी और लेनोवो जैसे प्रोड्यूसर्स भारत की ई-कचरा समस्या के समाधान हेतु निवेश करने के लिए तैयार है और एक जमीनी स्तर का ईकोसिस्टम विकसित करने में विश्वास रखते हैं। पहले की तुलना में आज समाधान संभव है – इसके लिए आवश्यक है कि विभिन्न हितधारक एकसाथ मिलकर काम करें और सहयोगी समाधान खोजें।”
उपासना चैधरी,, एचपी इंडिया, ने कहा कि 25 साल पहले इंडस्ट्री ने रिसाइकलिंग कार्यक्रम लॉन्च किया था। इच्छित परिणाम हासिल करने में उन्नत जिम्मेदार रिसाइकलिंग के लिए भागीदारों और सरकारों के साथ सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है।”
राहुल अग्रवाल, लेनोवो इंडिया ने कहा, ई-कचरा प्रबंधन एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसपर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है और इस मुद्दे को समर्थन देने के लिए स्थायी ईकोसिस्टम के निर्माण के लिए करो संभव के साथ गठजोड़ कर हम काफी खुश है। लेनोवो लगातार अपनी कारोबारी गतिविधियों में पर्यावरणीय मामलों में पर्यावरणीय मामलों का नेतृत्व करता है और अपने ग्राहकों की मदद करने के लिए दीर्घकालिक व इन्नोवेटिव समाधान उपलब्ध कराता है।”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दीप्ति अंगरीश

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