एक दीप मेरा भी अर्पण

कोटि-कोटि जगमग दीपों में,
एक दीप मेरा भी अर्पण ।।

पश्चिम जनित दुष्ट कोरोना,
भरतभूमि पर नहीं टिकेगा।
महाप्रलय भी ठहर न पाये,
इसको भी इतिहास लिखेगा।
कर्मवीर कर रहे लोकहित,
शोणित की हर बूंद समर्पण।।
एक दीप मेरा भी अर्पण..!!

आये चाहे रिपुदल बल से,
चाहे राष्ट्रद्रोह के छल से ।
धैर्य-शील अनुशासन के बल
ऐक्य, राष्ट्र के अखण्ड बल से
दीप-दीप के अमिट अनल से,
दुष्टों को दिखला दें दर्पण ।।
एक दीप मेरा भी अर्पण..!!

शंकर के डमरू-त्रिशूल से,
भारत मां की चरण धूल से।
बजरंगी की गदा भयंकर,
रघुवर की टंकार-शूल से ।
जग का संकट मिट जाये बस,
यह ही पूजा, यह ही तर्पण ।।
एक दीप मेरा भी अर्पण..!!

दमक उठेगी वसुधा सारी,
चमक पड़ेगा नभ-मण्डल भी।
कान्हा की वंशी की धुन में,
झूम उठेगा बृजमण्डल भी।
मानवता के दीप-पुंज से,
दानव दल से जीतेंगे रण।।
एक दीप मेरा भी अर्पण..!!

– नवीन जोशी ‘नवल’
रविवार ५ मार्च २०२०

टीम डिजिटल

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