प्रमुख सुर्खियाँ :

खाना आंखों से भी खाते हैं : नीता मेहता

नई दिल्ली ।   भारत की प्रसिद्ध कुक बुक लेखिका हैं नीता मेहता। उनके नाम से 400 से अधिक कुकबुक प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने देश में नीता मेहता कुकिंग क्लासेस नाम से कुकिंग इस्टीटयूटस की श्रृंखला भी शुरू की है और अपनी कुकबुक और व्यंजनों के कई इंटरनैशनल पुरस्कार भी जीते हैं। ऐसे में नीता मेहता को कुकिंग क्वीन कहना गलत नहीं होेगा।

सवाल – आप प्रोफेशनली कुकिंग की दुनिया में कब आए?
जवाब – मुझे कुकिंग का शौक टीनएज से ही था। बचपन से ही मुझे कुकिंग का शौक था। मेरे इस शौक में पैरेंटस काफी स्र्पोटिव थे। उन्हें अच्छा लगता था कि बेटी शुरू से घरेलू कामकाज में दिलचस्पी ले रही है। वैसे हमारे जमाने में लड़कियां करियर आॅरेंटिड बहुत ही कम होती थीं। वैसे भी माता-पिता को अच्छा लगता है जब उनकी बेटी होम जाॅबस में दिलचस्पी ले। जब मैं छोटी थी तो आस-पड़ोस की आंटीयों के साथ केक व कुकीज बेक करती थी। कुकिंग के प्रति दीवानगी ने ही मुझे इस करियर बनाने की राह दी।

सवाल – आपने कुक बुक्स लिखने का कब, कैसे सोचा?
जवाब – मेरे परिवार और दोस्तों को मेरी कुकिंग बहुत पसंद थी। कुक बुक्स लिखने प्रेरणा उन्हीं से मिली। तभी मैंने रेसिपीज को लिखना शुरू किया। इसमें मेरे पति में बहुत ज्यादा सहायता की। मेरे पति कम्प्यूटर सैवी हैं। उन्होंने मेरी लिखी रेसिपीज को कम्पोज करके टाइप किया और कम्प्यूटर मे ंसेव किया। बुक का बेस मेरे पति ने ही बनाया है।

सवाल – आपकी हर डिश में इनोवेशन कैसे आती है?
जवाब – इनोवेशन यानी नयापन। इसका कारण है ट्रेवलिंग। मैं ट्रेवलिंग बहुत करती हूं। हर नई जगह पर रेस्टोरेंट में जाती हूं और नई डिश खाती हूं। मैं कभी भी डिश के बारे में पूछने से शर्माती नहीं। डिश में क्या-क्या मसालें पड़े हैं या कैसे बनाई है या डिश की पूरी ए,बी,सी मैं शेफ से पूछती हूं। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आप किसी से भी सीख सकते हैं। बता दूं कि कुकिंग रचानात्मक कला तो है, पर टेकनिकल भी। मेरा मानना है कि आप फूड को अच्छे जानते हैं, तो असंख्य रेसिपीज बना सकते हैं।

सवाल – क्या आपका कुकिंग का फील्ड मुश्किल भरा रहा?
जवाब – कुछ भी मुश्किल नहीं होता, यदि आप कुछ ठान लें तो। मैं कुकिंग बचपन से करती थी, लेकिन शादी के 10-11 साल बाद मैंने कुकिंग को प्रोफेशनली अपनाया। तब मैं घर में कुकिंग क्लासेस देती थी। उस समय नई-नई डिश की जानकारी गूगल पर नहीं होती थी। हर डिश को जानने के लिए उसे चखना पड़ता था। खा-खाकर मैंने कुकिंग को जाना कि फ्लां डिश में कौन से मसाले पड़े हैं या कैसे बनती है आदि। सीखने के लिए मैं नए-नए रेस्टरां में खाती थी। उस समय मैं खा-खाकर मोटी हो गई थी।

सवाल – आपने कई साल प्रोफेशनल शेफ की तरह काम किया है। आपने कुकिंग को प्रोफेशनली अपनाने का निर्णय क्यों और कैसे लिया?
जवाब – मैंन मौज-मस्ती और टाइमपास के लिए घर में कुकिंग क्लासेस शुरू की थीं। साथ ही मैं कुछ करना भी चाहती थी, पर बच्चों को आंखों के सामने रखते हुए। तब मुझे लगा कुकिंग क्लासेस काफी अच्छा आॅप्शन हैै। कुकिंग क्लासेस में होममेकर्स, डाक्टर्स, लाॅयर्स आदि आते थे। मुझे अच्छा लगता था नए लोगों से मिलना। जब मेरी कुकिंग क्लासेस चल पड़ीं, तब लगा मुझे कुकिंग को प्रोफेशनली आगे बढ़ाना चाहिए। उस समय मैंने पहली कुलिनरी (पाक, कुकिंग) अकादमी खोली। उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

सवाल – आपको प्रोफेशनल शेफ और शौकिया कुकिंग में क्या अंतर लगता है? जो लोग इस फील्ड में आना चाहते हैं, उनके लिए क्या कहना है ?
जवाब – यदि आपको कुकिंग पसंद है, पर किसी कारणवश क्यूलिनरी ड्रिगी नहीं ले पा रहे। ऐसे में दिल की सुनें। काम और पढ़ाई दोनों आसान हो जाएंगी, जब दोनों को मन से करेंगे। भोजन से जुड़ी कोई भी चीज कभी नहीं घटेगी, इसलिए इसे हमेशा आजमांए।

सवाल – आपका फेवरिट डेस्टिनेशन कहां है, जहां जाकर आपको सुकून का एहसास होता हो ?
जवाब – इटली।


दीप्ति अंगरीश,
पत्रकार   

दीप्ति अंगरीश

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account