होमियोपैथी में कोरोना का इलाज – डॉ एम डी सिंह

नई दिल्ली। कोरोना वायरस कोविद-19 ने अब पूरी दुनिया में अपना पैर फैला लिया है। इस लेख के लिखे जाने तक पूरी दुनिया में 50 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके एवं सवा तीन लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। यह रोग नस्ल, जाति-धर्म , धनी- गरीब सबको बिना भेदभाव किए समान रूप से अपना शिकार बना रहा है। विकसित अविकसित सभी राष्ट्रों के पास लाक डाउन के अतिरिक्त इससे बचने का कोई उपाय अब तक मिलता प्रतीत नहीं हो रहा। मास्क लगाएं, हाथ सैनेटाइज करें, बार -बार साबुन से हाथ धोएं आसपास अच्छी तरह सफाई रखें और घर में रहें ,यह हिदायत सारे देश अपने नागरिकों को दे रहे हैं ।

होम्योपैथी के पास लक्षणों के अनुसार कोरोना कोविड-19 से लड़ने के लिए कई औषधियां उपलब्ध हैं। एपिडेमिक के समय जीनस एपिडेमिकस वह दवा बनती है जिसे किसी एपिडेमिक अथवा पैंडेमिक डिजीज पर अकेले अथवा 1-2 सहयोगी औषधियों के साथ प्रयोग किया जा सके । ऐसी दवा ढूंढना बहुत कठिन नहीं है । यह एटमॉस्फियर और रोग के कुछ मुख्य लक्षणों के आधार पर एवं दवा के स्रोत और उसके प्रकृति को कोरिलेट कर प्राप्त किया जा सकता है । होम्योपैथी की भिन्न-भिन्न मटेरिया मेडिकाज में ऐसी दवाओं का वर्णन है।

होम्योपैथी का मूल मंत्र ही है समान समान को ठीक करता है similia similibus Currenter अर्थात यदि रोग का कारक चमगादड़ है तो उसकी दवा भी उसी के पास है । जैसे गाय के आंत से काऊपाक्स टीका बन सकता है तो चमगादड़ से भी कोरोना कि टीका बनना संभव है । इस दिशा में वैज्ञानिक और एलोपैथिक कंपनियां प्रयास कर सकती हैं। कोरोना वायरस के नोजोड्स से भी 200 C potency में दवा बनाकर टेस्ट किया जा सकता है। (जैसा कि डॉ लक्स ने अमेरिका में फैली जानवरों की महामारी एंथ्रेक्स के नोजोड्स से ऐंथ्रेसाइनम नामक होमियोपैथिक दवा बनाकर जानवरों को बचा लिया था साथ ही साथ अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भी।) आब्सलूट एवं डिस्पेंसिंग अल्कोहल में दो सौ बार पोटेंटाइज होने के बाद उसमें नोजोड अथवा वायरस का कोई भी अंश नहीं रह सकता।
जैसा कि कोरोना के लिए वैज्ञानिकों में एक राय बनती प्रतीत हो रही कि यह रोग चमगादड़ों से आया है। ऐसा माना जाता है कि कोरोना आज से 55-60 साल पहले सुवरों में पाया गया । वैसे ही जीका वायरस के संक्रमण के समय भी प्रथम वाहक चमगादड़ ही माने गए थे जिसके द्वारा दूषित फलों को खा कर मनुष्यों के कुछ पालतू जानवर जैसे सूअर बकरी इत्यादि उसे मनुष्य तक ले गए। वैसे ही इबोला वायरस का प्रकोप गायों द्वारा मनुष्य तक पहुंचा किंतु यहां भी प्रथम वाहक चमगादड़ो की एक प्रजाति जो जानवरों का खून चूसते हैं पाए गए । बीते जमाने में स्मॉल पॉक्स अथवा काऊ पाक्स ने सारी दुनिया को बहुत आहत किया उसकी वाहक गाय पाई गई और दूसरे वाहक गायों के स्थाई सेवक। यह स्मालपॉक्स का टीका गायों की आंतो से सर्वप्रथम रूस द्वारा विकसित किया गया था।
वैसे ही कोरोना वायरस के टीका को संभवत चमगादड़ों के किसी अंश से पाया जा सके। इस संदर्भ में एक रोचक एवं उत्साहवर्धक प्रमाण होम्योपैथी की एक पुस्तक प्रैक्टिशनर्स गाइड जो हेनीमैन पब्लिशिंग कंपनी कोलकाता द्वारा सर्वप्रथम 1941 में पब्लिश की गई । जिसके लेखक डॉक्टर एन सी घोष एमडी- यूएसए थे ।

दमा के संदर्भ में होम्योपैथिक औषधियों का वर्णन करने के क्रम में उन्होंने एक दवा चमगादड़ (घरेलू सिद्ध दवा ) का भी जिक्र किया है। उसमें उन्होंने लिखा है कि चमगादड़ के मांस को 12 सामान्य मसालों के साथ पका कर कोई मरीज दिन भर में कई बार सिर्फ उसे ही खाए एवं स्नान न करे और अगले दिन से वह सामान्य खानपान स्नान पर आ जाए । उनका कहना है यह घरेलू औषधि बहुपरीक्षित है । इससे दमा बहुत दिन के लिए समाप्त हो जाता है और कई बार तो हमेशा के लिए भी ठीक हो जाता है । वे आगे लिखते हैं उसी पके हुए मांस को धूप में सुखाकर पीसकर बुकनी बना लिया जाए और 8 आना के बराबर सुबह शहद के साथ मिलाकर रोज खाया जाए तब भी फायदा करना चाहिए। उनका कहना है कि बंगाल के ग्रामीण अंचलों में प्रैक्टिस करने वाले बहुत से चिकित्सकों ने इससे लाभ की सूचना उन्हें दी।

जीनस एपिडेमिकस खोजने के लिए उन मुख्य लक्षणों को जानना जरूरी है जो आमतौर पर कोरोना वायरस से संक्रमित सभी मरीजों में पाए जा रहे हों। यह दवाई न्यूमोकोकिनम, आसिलोकोकिनम ,ब्रायोनिया एल्बा, Arsenic alb, Coca, Eucalyptus G, Camphora ,Ignatia, Aspidosperma, Arsenic iod इत्यादि में से कोई भी हो सकता है। मैं खुद अपने मरीजों को Pneumococcinum 200
दे रहा हूं जिसे 25000 लोगों पर प्रयोग के बाद सप्रमाण प्रस्तुत करुंगा। अब तक 10000 लोगों को दे दिया गया है।

लेखक – डॉ एम डी सिंह, महराजगंज ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश में होमियोपैथी  के डॉक्टर हैं   

टीम डिजिटल

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