सावधान! क्या आपके घर में भी है काॅकरोच

इंडियन हाउसहोल्ड हिडन डस्ट स्टडी 2018 में हुआ खुलासा, सर्वे में शामिल भारतीय घरों में आमतौर पर पाया गया कॉकरोच एलर्जेंस

नई दिल्ली। डायसन और फिक्की रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर (एफआरएसी) द्वारा किए गए नए अध्ययन में कहा गया है कि लोगों द्वारा नियमित तौर पर पारंपरिक सफाई विधियों का उपयोग करने के बाद भी भारतीय घरों में बैक्टीरिया, धूल कण और कॉकरोच एलर्जेंस पाए गए। अस्थमा चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर के डायरेक्टर डा. विक्रम जग्गी ने कहा कि धूल कण और कॉकरोच एलर्जेंस पूरे साल एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों का सामान्य कारण बने रहते हैं। अधिकांश समय, यह समस्या इतनी छोटी है कि इस पर ध्यान हीं नहीं दिया जाता, जबकि घर साफ दिखाई देता है, यह धूल और मिट्टी है जो एलर्जी का कारण बन सकती है।”

फिक्की रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर (एफआरएसी) के सीईओ, शांतनु खंडेलवाल ने कहा, “आमतौर पर भारतीय घरों में साफ फर्श, फर्नीचर और साफ-सुथरे बिस्तर दिखते हैं। वे आम तौर पर दैनिक सफाई करते हैं। कई लोग यह जानकार आश्चर्यचकित होंगे कि इन घरों में छुपी हुई धूल की जांच के दौरान हमनें पाया कि कॉकरोच एलर्जेंस, धूल के कण, फफूंद और बैक्टीरियां यहां आमतौर पर मौजूद थे।”
एफआरएसी ने भारत के तीन प्रमुख शहरों नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के 100 शहरी घरों पर यह अध्ययन किया। झाड़ू, पोछा और डस्टिंग की दैनिक सफाई प्रक्रिया के बाद विश्लेषण के लिए छुपी हुई धूल के नमूनों को कारपेट, बिस्तर, सोफा और कार से एकत्रित किया गया। अध्ययन में यह खुलासा हुआ कि सर्वेक्षण में शामिल घरों में कॉकरोच, धूल कण, डॉग एलर्जेंस और बैक्टीरिया मौजूद थे। बाहर से लोगों के जरिये या हवा के माध्यम से यह एलर्जी अंदर आती है और धूल से चिपककर बिस्तर, सोफा, कारपेट की परतों, फर्नीचर पर, फर्श और घर की अन्य सतहों पर छुप सकती है। चूंकि ये पारंपरिक सफाई विधियां सतह पर अधिक मात्रा में धूल को छोड़ सकती हैं, जिसकी उपस्थिति से एलर्जी हो सकती है।

कॉकरोच एलर्जेंस

कुछ कॉकरोच कीट हैं जो गर्मी और नमी वाली जगह में रहना पसंद करते हैं। ये विभिन्न प्रकार के घरों में पाए जा सकते हैं, केवल अस्वच्छ वातावरण में ही नहीं बल्कि नियमित रूप से साफ किए जाने वाले घरों में भी ये होते हैं। डायसन द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, सर्वेक्षण में शामिल घरों में गद्दे, सोफा और कारपेट पर आमतौर पर छुपी हुई धूल पाई गई। कॉकरोच एलर्जेंस सूक्ष्म होते हैं और उनके लार, मल और शरीर में पाए जा सकते हैं। यह एलर्जेंस एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

धूल कण एलर्जेंस

मनुष्य एक महीने में 20 ग्राम से 66 ग्राम तक डेड स्किन को अपने शरीर से झाड़ता है, जिसका वजन लगभगर आलू चिप्स के एक पैकेट के बराबर है। धूल कण डेड स्किन से भोजन ग्रहण करते हैं और उनके मल व शरीर के हिस्सों पर मौजूद एलर्जेंस एलर्जी को बढ़ावा दे सकते हैं। भारतीय घरों में किया गया अध्ययन दिखाता है कि धूल कण एलर्जेंस सोफा, गद्दों, कारपेट और कार के आंतरिक हिस्सों में पाए गए।

फफूंद बीजाणु

फफूंद घर के भीतर और बाहरी वातावरण में सर्वव्यापी (हमेशा मौजूद) होते हैं। मोल्ड एक प्रकार का फंगस है जो आमतौर पर घरों और कार में गर्मी और नमी की स्थिति में बढ़ता है। इसके बीजाणुओं को अतिसंवेदनशील लोगों में एलर्जी के लक्षण को बढ़ाने में सक्षम बताया गया है। नए अध्ययन से पता चलता है कि फंगस आमतौर पर कार के अंदरूनी हिस्सों से एकत्र की गई धूल में मौजूद थे।

डॉग एलर्जेंस

कुत्ते पूरे भारत में मौजूद हैं। कुत्ते एलर्जेंस पैदा कर सकते हैं जो कपड़े, फर्श और छोटे कणों से चिपक सकते हैं इसलिए कुत्तों के बिना वाले स्थानों पर धूल में इन एलर्जेंस की उपस्थिति आम बात है। डायसन द्वारा किए गए नए अध्ययन से पता चला कि सर्वेक्षण में शामिल भारतीय धरों में डॉग एलर्जेंस सामान्य तौर पर गद्दों, सोफा और कारपेट पर पाए गए।

धारणा बनाम सच्चाई

कई शहरी घरों में सफाई, झाड़ू और पोछा लगाने की दैनिक सफाई प्रक्रिया को अपनाया जाता है। घर मालिकों को अक्सर यह लगता है कि पारंपरिक सफाई विधि उनके घरों को साफ और धूल मुक्त रखने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, नया अध्ययन बताता है कि भारतीय घरों की धूल में कण और एलर्जेंस मौजूद थे। नियमित रूप से सफाई के पारंपरिक तरीकों को लागू करने के बाद अपने घरों ओर कारों से छिपी हुई धूल की मात्रा देखकर कई लोग आश्चर्यचकित थे।

डायसन के प्रमुख, फ्लोरकेयर, केविन ग्रांट ने कहा, “डायसन में हम उन समस्याओं को हल करने की कोशिश करते हैं, जिसे दूसरे नजरअंदाज करते हैं। वास्तविक भारतीय घरों में उचित ढंग से अनुसंधान करने के बाद हम यह जानते हैं कि घरों को एक गहरी सफाई की जरूरत है जो छिपी हुई धूल को साफ करने में सक्षम हो। डायसन की कोर्ड-फ्री टेक्नोलॉजी 0.3 माइक्रोन से भी छोटे 99.97 प्रतिशत धूल को पकड़ने में सक्षम है, यह प्रभावी तरीके से अलर्जेंस को हटाता है और उन्हें बिन में बंद करता है। भारत में, एलर्जी स्टैंडर्ड लिमिटेड (एएसएल) द्वारा डायसन के कुछ कोर्ड-फ्री वैक्यूम क्लीनर्स को अस्थमा और एलर्जी के अनुकूल प्रमाणित किया गया है।”

डायसन कोर्ड-फ्री वैक्यूम क्लीनर्स में डायसन डिजिटल मोटर लगी है, जो कॉम्पैक्ट है और ये 125,000 आरपीएम पर घूम सकती है, जो डायसन कोर्ड-फ्री वैक्यूम को बहुमुखी प्रतिभा के साथ बिना समझौता किए पावरफुल सक्शन प्रदान करती है। यह पावरफुल सक्शन कॉकरोच और धूल कण एलर्जेंस सहित गद्दों से एलर्जेंस को हटाने की अनुमति देता है।

संपूर्ण मशीन फिल्ट्रेशन

उच्च प्रदर्शन वाले वैक्यूम क्लीनर को एलर्जेंस को दूर करने में सक्षम होना चाहिए लेकिन उन्नत संपूर्ण मशीन फिल्ट्रेशन के बिना यह हवा में कुछ धूल के कणों का रिसाव कर सकता है।

डायसन कोर्ड-फ्री मशीन 0.3 माइक्रोनम्ततवत! ठववाउंता दवज कमपिदमकण् से भी छोटे आकार के 97.97 प्रतिशत धूल कणों को पकड़ने में सक्षम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मशीन से छोड़ी जाने वाली हवा साफ है। इसे डायसन साइक्लोन टेक्नोलॉजी, जो हवा के प्रवाह से धूल और मिट्टी को खींचकर बिन में जमा करने के लिए सेंट्रीफ्यूगल बल का निर्माण करता है, अत्यधिक कुशल और ध्यान से कैलिब्रेटेड प्री और पोस्ट मोटर फल्टिर्स, जो बहुत महीन धूल को पकड़ने में साइक्लोन सिस्टम को सपोर्ट करता है, और हवा के रिसाव या हानिकारक धूल के लिए संभावित रिसाव को खत्म करने के लिए टोटल मशीन सीलिंग के संयोजन द्वारा इसे संभव बनाया गया है।

हाइजीनिक धूल इजेक्टर

डायसन वैक्यूम में कोई बैग नहीं है, इसका मतलब है कि यहां धूल को हाथ से छूने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बजाये, भारत में डायसन के सभी नवीनतम कोर्ड-फ्री वैक्यूम में हाइजीनिक बिन खाली करने का फीचर्स दिया गया है। जब बिन को खाली किया जाता है, एक रबड़ कॉलर बिन को नीचे झुकाता है, गंदगी को हटाता है और यूजर्स को बिना छुए फंसे हुए धूल और मलबे को हाइजीन तरीके से हटाने में सक्षम बनाता है।

एडमिन

leave a comment

Create Account



Log In Your Account