कांता दूहन : क्रिकेट के लिए सब कुछ और हमारे लिए कुछ नहीं


नई दिल्ली / टीम डिजिटल। क्रिकेट खिलाडियों के लिए सब कुछ और हमारे लिए कुछ भी नहीं । क्रिकेट खिलाडियों पर धन बरसाया जाता है जबकि हम अपने घर से , परिवार से पूंजी लगाकर एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा कर आते हैं , उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता । यह बात बहुत दुख से कह रही हूं । यह कहना है जिला हिसार के कुलेरी गांव की मूल निवासी व आजकल फरीदाबाद में सब इंस्पेक्टर पुलिस कांता दूहन का । सरकार की ओर से भी कोई स्पोर्ट नहीं । यह बात भी जोडी कांता दूहन ने । कुलेरी गांव के गवर्नमेंट स्कूल से जमा दो तक शिक्षा प्राप्त की और फिर प्राइवेट तौर पर कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की । सन् 2008 में हरियाणा सरकार ने पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर बना नियुक्ति दी ।
– पर्वतारोहण का शौक एक हरियाणा की छोरी को कैसे और कब लगा ?
– मैं मनाली में घूमने गयी थी सन् 2012 में । वहां स्कीइंग की और पता ही नहीं चला कि कब पर्वतारोहण में रूचि जाग गयी ।

– कोई ट्रेनिंग भी ली पर्वतारोहण की ?
– जी । मनाली से ही ट्रेनिंग ली ।

– प्राइवेट या सरकार की ओर से ?
– प्राइवेट । अपने परिवार के खर्च पर । मनाली के अटल बिहारी वाजपेयी माउंटेनेयरिंग इंस्टिच्यूट एलाइड फोर्स से एक माह की ट्रेनिंग की ।

– एवरेस्ट कब विजय किया ?
– दूसरे ही वर्ष 21 मई , 2013 को एवरेस्ट पर तिर॔गा फहरा दिया था ।

– इसके बाद कोई और पर्वतारोहण किया ?
– जी नहीं । वैसे सेवन सम्मिट पर चढने और विजय का इरादा है लेकिन फंड की कमी है ।

– पहली बार फंड किसने दिया ?
– पापा बलवीर सिंह ने लगाया । लगभग बीस लाख रुपये का ऋण उठाया तब जाकर मैं एवरेस्ट विजय कर पाई ।

– कोई पुरस्कार ?
– जी नहीं। कोई पुरस्कार नहीं क्योंकि सरकार भी क्रिकेट खिलाडियों पर ही धन वर्षा करती है । हम जैसे जांबाज पर्वतारोहियों पर नहीं । कोई सुध नहीं लेता हमारी ।

– किसी संस्था ने सम्मानित किया ?
– नहीं । सरकार के बिना कोई संस्था भी आगे कहां आती है ?

-क्या नये लोग पर्वतारोहण में आगे आएं या नहीं ?
– जिनके पास मेरी तरह घर फूंक कर तमाशा देखने कि हिम्मत और देश के तिरंगे को फहराने का जज्बा हो वो जरूर आएं ।

– पर्वतारोहण के अलावा और क्या शौक है ?
– बैडमिंटन खेलती हूं ।

– हरियाणवी फिल्में देखती हो ? क्या कहोगी ?
– हरियाणवी फिल्म चंद्रावल और चंद्रावल टू दोनों देखीं । पर हरियाणवी फिल्में पंजाबी फिल्मों की तरह लोकप्रिय नहीं हो पातीं ।

– फिर कैसे चलेंगी हरियाणवी फिल्में ?
– कोई सपना को हीरोइन ले ले तो शायद चल भी जाए ।

-और अगर कोई कांता दूहन की बाॅयोपिक बनाए तो ?
– मैं कहां इतनी बडी हीरोइन जी ,,,वह खूब हंसती रही ,,,


कमलेश भारतीय,  वरिष्ठ  पत्रकार  

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