चौथे दिन राम-लक्ष्मण-सीता के वनगमन का प्रसंग देख दर्शकों की आंखें हुईं नम

नई दिल्ली / टीम डिजिटल। लालकिला ग्राउंड स्थित 15 अगस्त पार्क में विश्व प्रसिद्ध लवकुश रामलीला कमिटी द्वारा आयोजित किए जा रहे रामलीला के चौथे दिन बुधवार को लीला मंचन की शुरुआत राजा दशरथ द्वारा श्रीराम को राज्याभिषेक का प्रस्ताव देने, राम-लक्ष्मण वार्तालाप, दशरथ-कुलगुरु सुमंत और श्रीराम के बीच मंत्रणा, मंथरा-कैकेया वार्तालाप, कैकेयी के कोपभवन में जाने से पूर्व महर्षि नारद का अयोध्या आगमन, कैकेयी से राजा दशरथ से तकरार, राम के राज्याभिषेक के दिन की तैयारी, श्रीराम का माता कौशल्या से मिलना, वनवास जाने से पूर्व श्रीराम-सीता का संवाद, लक्ष्मण-सुमित्रा वार्तालाप, उर्मिला की महानता, वनगमन से पूर्व श्रीराम का पिता दशरथ से मुलाकात के साथ राम-लक्ष्मण-सीता के वनगमन वाले प्रसंग से हुई।

उसके बाद श्रीराम द्वारा अयोध्यावासियों से आग्रह, श्रीराम का सुमंत से वार्तालाप, श्रीराम का निषादराज से भेंट, सुमंत और निषादराज से श्रीराम के विदा लेने, श्रीराम के साथ केवट का हठ, अयोध्या में सुमंत का आगमन और राम वनगमन संबंधी सूचना राजा दशरथ को देने, दशरथ की मृत्यु पर शिव-पार्वती का अयोध्या आगमन, कैकेयी-भरत वार्तालाप, निषाद सभा जैसे प्रसंगों का भव्य व मनोहारी मंचन किया गया। इसके साथ ही निषादराज का भरत से भेंट, भरत का चित्रपुर आकर श्रीराम से मिला और वापस अयोध्या लौटने का आग्रह करने, कैकेयी प्रलाप जैसे प्रसंगों का भी मंचन देखने को मिला। खासकर राम-लक्ष्मण-सीता के वनगमन वाले प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया, तो पुत्र-वियोग के कारण राजा दशरथ की मृत्यु देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

लीला के अलग-अलग किरदारों में अमित घनश्याम (नारद), गगन मलिक (रामचंद्र), मोहित (लक्ष्मण), मनीष चतुर्वेदी (शिव), अलका तिवारी (पार्वती), मनोज नरेंद्र दत्त (दशरथ), अंजना सिंह (सीता), सन्नी शर्मा (भरत) आदि ने अपने-अपने किरदारों में अभिनय के इंद्रधनुषी रंग भरकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

टीम डिजिटल

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