फोर्टिस के डॉक्टरों द्वारा शुरू किया गया ‘पिंक पर्पल रन’ शाहपुरा पहुंचा

रजनीश हॉस्पिटल के सहयोग से फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (गुरुग्राम) ने ‘द पिंक पर्पल रन’ के दौरान ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक खुले सत्र का आयोजन किया। फोर्टिस गुरुग्राम में रेडिएशन आॅन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशु अभिषेक और कुल दस धावकों से बने ‘मस्तों का झुंड’ समूह ने गुरुग्राम से जयपुर तक पिंक पर्पल रन शुरू किया। इसका मकसद 210 किलोमीटर तक की इस दौड़ के रास्ते में आने वाले गांवों और शहरों में महिलाओं के कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाा है। डॉ. अभिषेक और धवकों ने 150 किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद शाहपुरा के आयोजित सत्र में हिस्सा लिया।
इस सत्र में शाहपुरा और आसपास के शहरों की 400 से अधिक महिलाएं शामिल हुईं जहां उन्हें शुरुआती चरण में ही और सही समय पर जांच कराने के लिए शिक्षित किया गया। दुर्भाग्यवश, कैंसर से कई अनावश्यक मौतें सिर्फ इसलिए हो जाती हैं क्योंकि लोगों को लक्षणों के बारे में जानकारी नहीं होती। इसलिए मरीजों की जांच सबसे जरूरी होती है।
कार्यक्रम के दौरान एफएमआरआई में गायनाकोलॉजी की निदेशक और प्रमुख डॉ. रमा जोशी ने कहा, ‘यह वॉकेथन ‘बी अवेयर, प्रिवेंट और क्योर’ विषय को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास करने के लिए है। यदि नियमित और एक निश्चित अंतराल पर जांच कराई जाए तो कैंसर से उबरा जा सकता है। कैंसर से बचाव और इसकी शुरुआती पहचान में जागरूकता और सही समय पर जांच की अहम भूमिका होती है। जयपुर तक इस दौड़ के जरिये हमारे डॉक्टरों की टीम विभिन्न शहरों और गांवों की महिलाओं में शुरुआती जांच तथा डायग्नोसिस कराने का संदेश ही फैला रही है। हमारा मकसद भारत को सर्वाइकल कैंसर से मुक्त बनाना है।’
भारत में हर साल लगभग 1,60,000 महिलाओं में गायनाकोलॉजिकल कैंसर और बड़े पैमाने पर फैल चुके सर्वाइकल कैंसर की पहचान होती है। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। आईसीएमआर का एक अध्ययन बताता है कि एक निश्चित उम्र के मानक वाले ब्रेस्ट कैंसर एक लाख में से लगभग 25.8 महिलाओं में पाया जाता है और वर्ष 2026 तक इसके प्रति लाख 35 महिलाओं तक पहुंच जाने की संभावना है।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में सर्जिकल आॅन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. निरंजन नायक ने कहा, ‘भारत में यह बीमारी अब युवा आबादी को उतना ही प्रभावित करने लगी है, जितना एक दशक पहले तक पश्चिमी देशों की युवा आबादी इससे प्रभावित होती थी। इससे बचाव के लिए सही समय पर शादी, सही समय पर गर्भधारण और शिशु को पर्याप्त स्तनपान जैसे उपाय अपनाने चाहिए। शाहपुरा के इस सत्र में हमारा मकसद इस शहर और फोर्टिस पिंक पर्पल वॉकेथन 2019 के रास्ते में आने वाले क्षेत्रों की महिलाओं को शिक्षित करना है ताकि वे महिलाओं में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए शिक्षित हो सकें।

टीम डिजिटल

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