परिवर्तन नहीं, तो कुछ नहीं

परिवर्तन नहीं, तो कुछ नहीं

चलो फिरो लोगांे से मिलो ।
घर में पड़े रहने से क्या फायदा ।।
जाने अनजाने कुछ तो मिलेगा ।
गुमशुदा रहने से क्या फायदा ।।
जब कोई मिलेगा तो काम बनेगा ।
नाकामी से भला क्या फायदा ।।
जिन्दगी है जब तक चलते रहो ।
उन्नति न हुई तो क्या फायदा ।।
चाहे जितना भी हो उसका मूल्य चुकाओ ।
जो पसंद आये उसे घर जरूर लाओ ।।
जो कर सकते हो उसे जरूर करो ।
बुरे ब्यक्ति को अपने से दूर करो ।।
सहयोगियों का खूब साथ दो ।
उन्हें आगे बढ़ने को मजबूर करो ।।
क्योकि जिन्दगी इसी का नाम है ।
इस दुनिया में परिवर्तन का ही काम है ।।
अगर बदलाव नहीं तो इसे अपनी हार समझिये।
घर में पड़े पड़े जिन्दगी बेकार समझिये ।।

कवि: जीतेन्द्र कानपुरी

एडमिन

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