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प्रदूषण को रोकने के लिए यूरोपीय संघ का प्रयास


नई
दिल्ली/ टीम डिजिटल। बढ़ते हुए प्रदूषण और पर्यावरण पर पड़ते दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल अपने सदस्य देशों के साथ एकलउपयोग प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग को समाप्त करने, बिजली की बचत, पानी की बचत, कचरे को कम करने और  कचरा प्रबंधन के  माध्यम से अपने एम्बस्सिएस में पर्यावरण सुरक्षा के उपायों के लिए प्रतिबद्ध दिखाने का संकल्प लिया था और इसी के तहत पिछले एक वर्ष के दौरान,  यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल और  यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देशों ने अपने दूतावासों और आवासों में प्लास्टिक के स्ट्रॉ, स्टिरर, कप, पानी की बोतल सहित हानिकारक प्लास्टिक के उपयोग को खत्म कर दिया है और इसके बदले पर्यावरण हितैषी सामग्रियों का उपयोग करना शुरू कर दिया है.
ग्रीनप्लेज  के तहत भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल और उसके सदस्य देशों ने कचरे और इ-वेस्ट सहित कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ पानी और बिजली की खपत को कम करके अपने कार्बन और प्लास्टिक फूटप्रिंट्स को कम कर दिया है. अपने इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर #LeadTheGreenChange (#लीड द ग्रीन चेंज) अभियान की शुरुआत की तथा सामान्य लोगों, संस्थाओं, संगठनों, कार्पोरेट्स और विश्वविद्यालयों को पृथ्वी को हरा भरा बनाने के लिए कार्बन फूटप्रिंट को कम करने के लिए इससे जुड़ने के लिए आमंत्रित किया. 15 से अधिक साझेदारों ने इसके तहत यूरोपीय संघ के साथ “हरित प्रतिज्ञा (ग्रीन प्लेज)” पर हस्ताक्षर किया, जिसमें अपने संगठन में एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक के उपयोग को खत्म करने, कचरा प्रबंधन एवं बिजली और पानी की खपत को कम करने जैसे कई कदम उठाना स्वीकार किया. खेल संगठनों, विश्वविद्यालयों, नागरिक समाज संगठनों, उद्योग साझीदारों एवं सेवा प्रदाताओं ने हरित प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किए|
एम्बस्सिएस अपने कर्मचारियों और परिवारों को यह भी समझा रहा है कि वे अपने यहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सामग्रियों का उपयोग कैसे कम कर सकते हैं.पिछले एक साल की प्रगति के देखने के बाद भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख श्री रैमंड मैगिस ने इस सफलता के लिए दूतावासों को बधाई देते  हुए कहा “पिछले साल लिए गए हरित प्रतिज्ञा की प्रगति में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल और सदस्य देशों की भूमिका से मैं काफी प्रसन्न हूं. मैं #लीड द ग्रीन चेंज पहल में शामिल होने वाले साझीदारों का स्वागत करता हूं. यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही निरंतरता एवं सर्कुलर अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं. अपने प्रयासों के साथ जुड़कर हम सतत विकास में हम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.” कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ईयू दूतावासों ने प्लास्टिक और पुनर्चक्रण वाले कचरे को अलग करने और उसके बाद उसका निस्तारण करने एवं जैविक कचरे को खाद बनाने की व्यवस्था करना शुरू कर दिया है. अधिकतर ईयू दूतावासों ने इलेक्ट्रोनिक कचरों के निस्तारण की व्यवस्था कर ली है इसी के तहत यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने अपने दूतावासों में “करो संभव” नामक सामाजिक संस्था के साथ मिलकर इलेक्ट्रोनिक एवं इलेक्ट्रिक कचरा एकत्र करने का एक अभियान शुरू किया. इस अभियान के तहत 1212 किलोग्राम इलेक्ट्रोनिक कचरा एकत्र किया गया.

 

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