भावी कार्यों के लिए महिलाओं का सशक्तीकरण है ज़रूरी

नई दिल्ली। भारत में कार्यस्थल पर लिंग समानता से जुड़े मुद्दों पर रोशनी डालने के लिए यूएन ग्लोबल काॅम्पैक्ट, न्यूयाॅर्क की स्थानीय शाखा ग्लोबल काॅम्पैक्ट नेटवर्क इण्डिया ने आज आईटीसी शेरटाॅन, साकेत, नई दिल्ली में अपने जेंडर इक्वेलिटी समिट (लिंग समानता सम्मेलन) के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के बारे में बढ़ती बातचीत तथा इस दृष्टि से सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता के मद्देनज़र इस सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत में कार्यस्थलों पर लिंग समानता की दिशा में एक ठोस आधार का निर्माण करना आज के इस सम्मेलन का उद्देश्य था। सम्मेलन के दौरान कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए रोज़गार एवं विकास के एक समान अवसरों तथा इस दृष्टि से समावेशी एवं सकारात्मक बदलावों पर ध्यान केन्द्रित किया गया। कोरपोरेट पेशेवरों, नीति निर्माताओं, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं सहित 250 से अधिक लोगों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया और लिंग समानता के बारे में उभरते रूझानों पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रख्यात दिग्गजों में शामिल थे- श्री अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग, मिस वैशाली सिन्हा, चेयरपर्सन, जीईएस 2019 चीफ़ सस्टेनेबिलिटी, सीएसआर एवं कम्युनिककेशन आॅफिसर, रीन्यू पावर।
कमल सिंह, एक्ज़क्टिव डायरेक्टर, ग्लोबल काॅम्पैक्ट नेटवर्क इण्डिया ने कहा, ‘‘देश और इसके समुदायों का समग्र विकास तभी संभव है जब हम दोनों लिंगों को एक समान महत्व दें। देश के विकास एवं कामयाबी के लिए लिंग समानता अनिवार्य है और हमें इस दिशा में प्रयास करने होंगे। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि लिंग समानता का तात्पर्य सिर्फ कार्यस्थल पर ही नहीं बल्कि घर एवं समाज में भी महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी माहौल बनाने से है।’’

मिस वैशाली सिन्हा, चेयरपर्सन, जीईएस 2019 चीफ़ सस्टेनेबिलिटी, सीएसआर एवं कम्युनिककेशन आॅफिसर, रीन्यू पावर ने कहा, ‘‘दूसरा न्छळब्छप् लिंग समानता सम्मेलन एक उत्कृष्ट मंच है जो हमें लिंग समानता के लिए सामुहिक प्रयासों हेतु प्रेरित करता है। इस साल का विषय बेहद प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें महिलाओं के लिए ज़रूरी कौशल के महत्व पर ज़ोर दिया गया है। यह मंच शीर्ष पायदान की अग्रणी महिलाओं को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी देता है, जो कार्यस्थल पर मौजूदा एवं भावी महिलाओं के लिए एकमात्र प्रेरणास्रोत हो सकती हैं।’’
अतुल धवन, साझेदार, डेलाॅयट इण्डिया ने कहा, ‘‘भारतीय कारोबार अपने कार्यबलों को प्रशिक्षित करने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण अपना रहे हैं और उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए निर्णय निर्माण प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। चैथी ओद्यौगिक क्रान्ति के अनुसार आज की महिलाओं, विशेष रूप से युवतियों को आधारभूत कौशल, तकनीक की समझ, स्टैम एवं डिजिटल कौशल प्रदान करना ज़रूरी है। इससे वे अपने करियर में बेहतर विकल्प चुन सकेंगी। डेलाॅयट के अनुसंधान और कन्सलटेशन बताते हैं कि चैथी ओद्यौगिक क्रान्ति लिंग समावेशी कार्य संस्कृति के लिए अवसर पैदा करेगी।
सम्मेलन में उठाए गए लिंग समानता के परिप्रेक्ष्य, विश्वस्तरीय पहल के माध्यम से दुनिया भर में 50 मिलियन लोगों के भविष्य निर्माण के डेलाॅयट के लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जिसके तहत युवाओं को कौशल विकास प्रदान कर आजीविका एवं उद्यमिता निर्माण के अवसर प्रदान किए जाएंगे। शिक्षा एवं रोज़गार के माध्यम से भारत में 10 मिलियन महिलाओं और लड़कियों के जीवन में समारात्मक बदलाव लाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।’’

इस दिशा में सुधारात्मक प्रयास करना और इन्हें प्रभावी रूप से अंजाम देना सरकार, निजी क्षेत्र, गैर-लाभ संगठनों एवं समुदायों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है। इस मौके पर उद्योग एवं सरकार के प्रतिनिधियों ने चैथी ओद्यौगिक क्रान्ति के संदर्भ में कार्यस्थल पर महिलाओं की स्थिति तथा महिला उद्यमियों के आगे बढ़ने की आवश्यकता पर चर्चा की।
विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षित एवं अधिक समावेशी कार्यस्थलों को सुनिश्चित करने के लिए लिंग समानता सम्मेलन के दौरान ‘बेस्ट इनोवेटिव प्रेक्टिसेज़ अवाॅर्ड्स 2019, ’वीमेन एट वर्कप्लेस’ भी दिए गए। थिंक थ्रू कन्सल्टिंग (टीटीसी) इसके लिए अवाॅर्ड प्रोसेस पार्टनर था। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण की दिशा में सक्रिय प्रयासों को बढ़ावा देना इस विचार प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा था। इस मौके पर डेलाॅयट के सहयोग से महिलाओं को चैथी ओद्यौगिक क्रान्ति के लिए सशक्त बनाने पर एक शोध पत्र का लाॅन्च भी किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में कार्यबल मंे महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 25 फीसदी है और महिला श्रम बल भागीदारी दर 26 फीसदी है। देश में कुल 195 मिलियन महिलाएं है जो असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं या बिना वेतन के काम करती हैं। पाया गया है कि पहली तीन क्रान्तियों ने लिंग असमानता के अंतराल को और बढ़ा दिया है। चैथी ओद्यौगिक क्रान्ति हितधारकों को एक अवसर प्रदान कर सकती है। यह संगठनात्मक वास्तविकताओं की प्रकृति तथा कौशल केे प्रकार के संदर्भ में कार्यों को प्रभावित करेगी। डेलाॅयट के अनुसार चार श्रेणियों (कार्यस्थल के लिए तैयारी, साॅफ्ट स्किल, तकनीकी विशेषज्ञता तथा उद्यमिता के अवसर) में महिलाओं के कौशल विकास के हस्तक्षेपों को प्रोत्साहित करना चाहिए। लिंग समानता सम्मेलन इसी दिशा में एक प्रयास है।
सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले दिग्गजों में शामिल थे डाॅ शालिनी सरीन, चेयरपर्सन- सिग्नीफाय फाउन्डेशन, नीदरलैण्ड्स, चेयरपर्सन आईएसए, ग्लोबल टास्कफोर्स फाॅर फाउन्डेशन्स, इंडीपेंडेन्ट डायरेक्टर लिंडे, भारत; हेमा रविचंदर, स्टैªटेजिक एचआर अडवाइज़र एवं इंडीपेंडेन्ट डायरेक्टर- बोर्ड्स आॅफ मैरिको लिमिटेड, टाइटन कंपनी लिमिटेड एवं बाॅश लिमिटेड; डाॅ उद्देश कोहली, सीनियर अडवाइज़र, यूएनजीसी; मिस निष्ठा सत्यम, डिप्टी कन्ट्री रीप्रेज़ेन्टेटिव, भारत, भूटान, मालदीव्स और श्रीलंका; श्री पारुल सोनी मैनेजिंग पार्टनर, थिंक थ्रू कन्सल्टिंग, नैना लाल किदवई, स्वतन्त्र चेयरपर्सन, एल्टिको कैपिटल; अपर्णा पीरामल राजे, स्तंभकाल एवं लेखक, एचटी मिंट आॅन बिज़नेस, डिज़ाइन, अरबनाइज़ेशन एण्ड वर्कप्लेसेज़; मिस अंजली सिंह, एसवीपी एवं सीओओ, जेनपैक्ट; डाॅ शिखा नेहरू शर्मा, संस्थापक, न्यूट्री हेल्थ सिस्टम्स प्रा लिमिटेड आदि।

 

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