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क्रांतिकारी, प्रेम और चिकन करी

 
नई दिल्ली। महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अत्यंत सक्रिय थे। संघर्ष के क्रम में उन्हें गिरफ्तारी से बचने प्रथम विश्वयुद्ध के समय 1915 मे जापान भागना पड़ा। उन्होंने वहां शिंजुकू में एक बेकरी संचालित करनेवाले दंपति आइज़ो और कोको सोमा के यहां तीन महीने के लिए शरण ली। यह बेकरी नाकामुराया के नाम से जानी जाती थी। वे वहीं रहकर अपनी क्रांतिकारी गतिविधियां संचालित करते रहे। सोमा दंपति की एक सुंदर सी लड़की थी तोशिको। रासबिहारी और तोशिको मे प्रेम हो गया और उन्होंने 1919 में विवाह कर लिया। अब रासबिहारी सोमा परिवार के सदस्य हो गए अतः वे बेकरी के काम मे हाथ बंटाने लगे। उन्होंने उसमे रेस्तरां विकसित किया। उन्होंने देखा, जापानी लोग भात (जो उगाते नही, वे इसे चावल कहते हैं ) के साथ खीरे का अचार खाते हैं, क्यों न उन्हें कुछ नया दिया जाए। रासबिहारी बोस ने पारंपरिक मसालेदार भारतीय चिकन करी बनाकर जापानियों को उनके पारंपरिक भात के साथ परोसना शुरू किया। यह चिकन करी टोकियो में बेहद प्रसिद्ध हुआ। नाकामुराया रेस्टोरेंट भी चर्चित हुआ, इतना कि वह जापानी शेयर सूचकांक में भी लिस्टेड हो गया!  रासबिहारी ने 1923 में जापानी नागरिकता ले ली। दुर्भाग्य से कम उम्र में ही उनकी प्रेमिका और पत्नी तोशिको की 1925 में मृत्यु हो गयी! रासबिहारी बोस ने परिवार को संभाला, रेस्तरां को उन्नत किया, जापानी भाषा सीखी, 16 किताबें लिखीं और वहीं से ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध निरंतर कार्य करते रहे। उनकी मृत्यु जापान में ही 1945 में हुई।

आज नाकायामुराया रेस्टोरेंट की चिकन करी जापान भर में प्रसिद्ध है। यह शिंजुकू स्टेशन से दो मिनट की पैदल दूरी पर स्थित है। आज यहां 100 सीटें हैं जो चिकन करी के शौकीनों से भरी रहती है। यह रेस्टोरेंट एक देशभक्त क्रांतिकारी, प्रेम और स्वाद का शानदार प्रतीक है। 

(पीयूष कुमार की वॉल से साभार)

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