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रॉश ने मास मार्केट ग्लूकोमीटर लॉन्च किया

भारत में मधुमेह से ग्रस्त करीब सात करोड़ से अधिक लोगों के लिए मधुमेह की निगरानी करने वाले मीटर तक किफायती पहुंच को सक्षम बनाता है एक्यू-चेक इंस्टेंट-एस

नई दिल्ली। रॉश डायबिटीज केयर इंडिया कंपनी ने आज अपने नए ग्लूकोमीटर एक्यू-चेक इंस्टेंट-एस को लॉन्च करने की घोषणा की। इस प्रोडक्ट के साथ कंपनी बड़े और आम बाजार में प्रवेश करने की तैयारी में है। एक ऐसा बाजार जो अपने मधुमेह की जांच स्वयं करना चाहता है। लॉन्चिंग पर बोलते हुए सिद्धार्थ रॉय, रॉश डायबिटीज केयर इंडिया के प्रबंध निदेशक ने कहा कि मधुमेह से ग्रस्त लोगों (पीडब्ल्यूडीएस) की संख्या के लिहाज से भारत, दुनिया में दूसरे नंबर पर है। हमने महसूस किया है कि इस आबादी को अपने मधुमेह की नियमित रूप से स्वयं जांच करने की जरूरत है और उन्हें एक ऐसा उत्पाद चाहिए जो उनकी जेब पर भी भारी न हो और जिसका इस्तेमाल भी आसान हो। रक्त ग्लूकोज की स्व-निगरानी (एसएमबीजी) मधुमेह प्रबंधन का अभिन्न अंग है। हमारे अनुभव बताते हैं कि मधुमेह से ग्रस्त जो लोग नियमित रूप से रक्त-ग्लूकोज की स्वयं-जांच करते हैं और अपने डॉक्टर के साथ नियमित संपर्क में रहते हैं, उन्हें न तो अपनी जीवनशैली से समझौता करना पड़ता है और न ही मधुमेह से संबंधित जटिलताओं का उन पर कोई बड़ा जोखिम आता है। स्वयं निगरानी के सभी लाभों के बावजूद, केवल लगभग ्10‘ फीसदी पीडब्ल्यूडीएस के पास कोई रक्त ग्लूकोज मीटर है।
उन्होंने बताया कि हमारे संज्ञान में आया है कि भारत में मधुमेह से ग्रस्त लोगों की अपने परिवार और सामाजिक प्रतिबद्धताओं के चलते अपने मधुमेह प्रबंधन की दिनचर्या में व्यवधान आते रहते हैं और उन्हें ग्लाइसेमिक परिवर्तनशीलता का सामना करना पड़ता है। हालांकि, वे अपनी रक्त शर्करा के उतार-चढ़ाव या अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं और व्यायाम को बढ़ा कर या अपने खानपान को संतुलित करते हुए अपनी रक्त शर्करा के स्तर को सीमा के भीतर वापस लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
1099 रुपए के किफायती मूल्य पर उपलब्ध नया एक्यू-चेक इंस्टेंट-एस अपनी श्रेणी में बिलकुल सटीक शुद्धता वाले परिणाम देता है और वैश्विक आईएसओ 15197ः2013 मानको पर खरा है। इंस्टेंट-एस के साथ रक्त ग्लूकोज परीक्षण बहुत सरल है, वहीं परिणामों को समझना भी बहुत आसान है। मीटर में 9 स्तरीय सीमा सूचक है, जिससे अपने मधुमेह की जांच कर रहे शख्स को आसानी से पता चल जाता है कि अभी उनकी स्थिति क्या है, सामान्य, ज्यादा या कम।
रॉश डायबिटीज केयर इंडिया की चिकित्सा व वैज्ञानिक मामलों की प्रमुख डॉ. वर्षा खत्री ने कहा कि मधुमेह से ग्रस्त अधिकांश लोगों के साथ बातचीत के दौरान हमें उनकी मान्यताओं का पता चला। आमतौर पर पीडब्ल्यूडी मानते हैं कि उनकी रक्त-शर्करा में उतार-चढ़ाव का पता उन्हें अपने शारीरिक लक्षणों से लग जाता है, जैसे कमजोरी, थका हुआ महसूस करना, पेशाब बढना, भूख आदि और ऐसे में उन्हें किसी ग्लूकोज मॉनिटर पर नियमित रूप से निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हालांकि, ऐसी मान्यताओं या लक्षणों के आधार पर मधुमेह के प्रबंधन को निर्भर करना रोग को बढ़ा सकता है और इससे जुड़ी कई तरह की जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।’
रॉश डायबिटीज केयर इंडिया मधुमेह की ओर से पेश रक्त ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम एक्यू-चेक इंस्टेंट-एस को भारत में मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए आसान समाधान प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। मीटर को किसी सेट-अप की आवश्यकता नहीं है। स्ट्रीप अंदर डालें, रक्त की एक बूंद से छूते ही लगभग 4 सेकंड में तत्काल परिणाम सामने आ जाता है। तय सीमा से ऊपर होने पर नीला इंडीकेटर आता है, तय सीमा पर हरा और तय सीमा से कम होने पर लाल। यूएसबी के जरिए जोड़े जाने पर एक्यू चेक कनेक्ट ऑनलाइन पोर्टल से सभी रक्त ग्लूकोज परिणामों को स्वचालित रूप से सिंक्रनाइज कर सकता है। रक्त ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम एक्यू-चेक इंस्टेंट-एस सटीक परिणाम प्रदान करता है और वैश्विक आईएसओ मानकों के अनुरूप है।

टीम डिजिटल

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