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आखिर बेटी कैसे बचाओगे ? 

डबवाली की एसडीएम का मुद्दा मीडिया में छाया हुआ है । रानी नागर वहां एसडीएम हैं और उनके आवास का शीशा टूटा हुआ पाया गया । कुछ सामान भी बिखरा हुआ था । पुलिस को बुलाया । आई भी । एसडीएम ने बताया कि वे अपनी शिकायत डीएसपी को ईमेल कर चुकी हैं । इसके बावजूद उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई ।
एक प्रशासनिक अधिकारी का यदि यह हाल हैंं तो आम आदमी के बारे में सोचिए , क्या स्थिति होगी ? रानी नागर आई ए एस हैं । ट्रेनिंग के तौर पर एसडीएम के रूप में तैनात हैं । पुलिस क्या कर रही हैंं ? शिकायत दर्ज करना क्यों नहीं चाहती ?  ऐसा क्या बंधन हैंडपंप ? किसने हाथ रोक रखे हैं ? क्या ऐसे ही बहन बेटी की रक्षा का वचन निभाया जाएगा ?
पुलिस के बारे में पहले ही आम आदमी की राय अच्छी नहीं । ट्रेफिक पुलिस अपने ही पुलिस जवानों को बाइक पर तीन तीन जाते देख आंख मूंद लेती है लेकिन दूसरा कोई ऐसी हरकत करे तो चालान काटने बडी मुस्तैदी से आगे आ जाती है । नियम कानून भोली भाली जनता पर ही क्यों ?
पुलिस थाने में जाने से आम आदमी कतराता है । एक समय मधुवन पार्क के निकट अस्पताल की दीवार अनियंत्रित ट्रक ने तोड़ दी । पुलिस रपट हुई । रोज चैकिंग से तंग आकर अस्पताल वालों ने शिकायत ही वापस लेने में भलाई समझी । रोज रोज पुलिस की सेवा कहां सेल करें ? खुद के पैसों सेल दीवार बनबा ली । गंगा नहा लिए ।
पुलिस में जितने केस दर्ज होते हैं उनमें बहुत सारे बिना दर्ज किए रफा दफा करवा दिए जाते हैं । वरणिका कुंडू केस मामले में भी पहले जमानत मिली , बाद में दबाब बढने पर धाराएं फिर लगीं । एसडीएम के पास तो रूतबा हैंं । फिर भी केस दर्ज नही होता तो बडे दुख की बात है ।
पुलिस को अपने व्यवहार को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करनी चाहिए ।
– कमलेश भारतीय 

टीम डिजिटल

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comments
  • बहुत आभार ।कम से कम जहां तक आपकी पहुंच है , वहां तक तो बात पहुंचेगी ।

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