विकास गढ़ते शिव-राज के 12 साल

मध्यप्रदेश की जनता के लिए निसंदेह यह गर्व का विषय है कि उसने पिछले दो विधानसभा चुनावों में फिर भाजपा फिर शिवराज के नारे पर भरोसा करते हुए मुख्यमंत्री पद की बागडोर एक ऐसे राजनेता के सक्षम हाथों में सौंपने का फैसला किया जो आज दूसरे कई प्रदेशों की सरकारों के लिए रोल मॉडल बन चुका है। शिवराज सरकार ने पिछले 12 वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण हेतु जो महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रारंभ की है उन्हें बहुतेरे प्रदेशों की सरकारों ने ज्यो का त्यो अपना लिया है।

कृष्णमोहन झा

भोपाल। महिला सुरक्षा, युवा शक्ति को मजबूत बनाने व दुनिया के पटल पर मध्यप्रदेश का नाम अग्रणी रखने की चाहत में प्रदेश की जनता को भगवान मानकर अपने कर्तव्य का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हुए आगे बढऩे वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश को विकास की रफ्तार देने में लगे हुए है। उनके कार्यकाल में प्रदेश को 5वीं बार मिले कृषि कर्मण अवार्ड पर उन्होंने इसे किसानों की मेहनत का परिणाम बताकर किसान हित में कई योजनाएं शुरू कर दी है। हाल ही में भावांतर भुगतान योजना लागू कर किसानों को अपनी फसल का पूरा दाम दिलाने के लिए उन्होंने अपनी जो मंशा जाहिर की है उससे उनके किसान हितैशी नीतियों पर कोई असमंस नहीं रह जाता है। महिला सुरक्षा को लेकर कई कड़े कदम उठाते हुए प्रदेश देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां कठोर नियम बनाए गए है।
उन्होंने 12 साल का कार्यकाल सफलता की कई ऊंचाईयों के साथ पूरा कर लिया है। जनता के साथ हमेशा खड़े रहकर उन्होंने कई ऐसी योजनाओं को अमल में लाया है जिससे आज गरीब वर्ग खुश है तो वहीं बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने से ग्रामीण इलाकों की बालिकाएं भी शिक्षा के क्षेत्र में अपना सपना पूरा कर रही है। उनके परिश्रम और लगन का ही नतीजा है कि आज प्रदेश चार बार कृषि कर्मण अवार्ड ले चुका है यहीं नहीं मध्यप्रदेश की कई योजनाओं को दूसरे प्रदेशों में रोल मॉडल के रूप में अपनाया जा रहा है, जिसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के ऐसे मुख्यमंत्री बन चुके है जिन्होंने लगातार 12 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने का गौरव अर्जित किया है। मध्यप्रदेश की जनता के लिए निसंदेह यह गर्व का विषय है कि उसने पिछले दो विधानसभा चुनावों में फिर भाजपा फिर शिवराज के नारे पर भरोसा करते हुए मुख्यमंत्री पद की बागडोर एक ऐसे राजनेता के सक्षम हाथों में सौंपने का फैसला किया जो आज दूसरे कई प्रदेशों की सरकारों के लिए रोल मॉडल बन चुका है। शिवराज सरकार ने पिछले 12 वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण हेतु जो महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रारंभ की है उन्हें बहुतेरे प्रदेशों की सरकारों ने ज्यो का त्यो अपना लिया है। प्रदेश के विकास रथ के पहिए इस अवधि में जिस धु्रत गति से घूमे है उसे देखकर कोई भी अचंभित हुए बिना नहीं रह सकता। कभी बीमारू राज्य होने का कलंक झेल रहे मध्यप्रदेश की गिनती अगर आज देश के विकसित राज्यों में जाने लगी है तो इसके लिए असली श्रेय के हकदार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही हैं जिनके अंदर संकल्प सेवा और समर्पण की त्रिवेणी समाई हुई है। प्रदेश की औद्योगिक विकास दर को दहाई के अंक के पार पहुंचाना और 25 प्रतिशत की कृषि विकास दर हासिल कर लेना उस राज्य के लिए आकाश की ऊंचाईयों को स्पर्श करने जैसा ही है जिसे कभी पिछड़ेपन का अभिशाप झेलने के लिए विवश होना पड़ा था। मध्यप्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को निसंदेह प्रचण्ड बहुमत से सत्ता में आने का मौका मिला था परंतु प्रारंभ के दो वर्षों में ही जब भाजपा को दो मुख्यमंत्री बदलने पड़े तब शिवराज सिंह चौहान की नेतृत्व क्षमता और सांगठनिक कौशल पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद की बागडोर सौंपने का फैसला अगर तत्कालीन भाजपा हाईकमान ने न किया होता तो शायद भाजपा को मिले प्रचण्ड जनादेश के औचित्य पर ही प्रश्नचिन्ह लग सकता था। परंतु शिवराज सिंह चौहान ने अपनी विलक्षण नेतृत्व क्षमता, अदभुत राजनीतिक सूझबूझ और अनूठी कार्यशैली के जरिए यह साबित कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने का फैसला कितना सही था और इन परिस्थितियों में शिवराज सिंह चौहान ही सर्वोत्तम विकल्प थे। राज्य विधानसभा के गत दो चुनावों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही पार्टी का मुख्य चुनावी चेहरा रहे है और उन चुनावों में उनकी लोकपियता का जादू सिर चढकऱ बोला है परन्तु मुख्यमंत्री की विनम्रता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि उन्होंने पार्टी की प्रचण्ड जीत का श्रेय समर्पित कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और जनता के उस अटूट विश्वास को दिया जो सत्ता सूत्र के कुशल संचालन में उनका संबल बना। मुख्यमंत्री हमेशा से ही यह कहते रहे है कि वे तो मध्यप्रदेश रूपी भव्य मंदिर के पुजारी मात्र है। प्रदेश की जनता को वे अपना भगवान मानते है। मुख्यमंत्री कहते है कि उनके पास जो कुछ भी है उस पर जनता रूपी भगवान का ही अधिकार है क्योंकि वे आज जो कुछ भी है वह जनता जनादेश के आर्शीवाद का प्रतिफल है। शिवराज सिंह चौहान निसंदेह यशस्वी मुख्यमंत्री कहलाने के अधिकारी है परन्तु उन्होंने अपने लिए यश अर्चन की कामना कभी नहीं की। व्यक्ति पूजा और स्तुतिगान से उन्हें सख्त परहेज है। उनका स्पष्ट मानना है कि जनता की भलाई के लिए उठाए गए सारे कदमों और सारी जनकल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन जनता के प्रति सरकार के पावन उत्तरदायित्व के निष्ठापूर्वक निर्वहन के रूप में किया जाना चाहिए। जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अगर कोई भी सरकार उपेक्षा का भाव रखती है तो यह एक ऐसा गंभीर अपराध है जिसके लिए जनता किसी सरकार को माफ नहीं कर सकती चाहे जनता ने कितना ही प्रचण्ड बहुमत प्रदान क्यों न किया हो। शिवराज सिंह चौहान को अपनी सरकार और उस सरकार के मुखिया के रूप में स्वयं अपनी आलोचना से कोई परहेज नहीं है। वे अलोचनाओं से नहीं घबराते और विपक्ष के प्रहारों से विचलित नहीं होते। उनका मानना है कि सरकार की स्वस्थ आलोचना तो उसकी त्रुटियों और न्यूनताओं के परिमार्जन को मार्ग प्रशस्त करती है अत: ऐसी आलोचना का तो स्वागत किया जाना चाहिए। अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं की उन कमियों को दूर करना तो हर सरकार का कर्तव्य है जो इन योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ जनता तक पहुंचनाने में बाधक बनती है। शिवराजसिंह चौहान के स्वभाव में आप कबीर की ‘निंदक नियरे राखिए’ वाली सीख की झलक देख सकते है परंतु सहज सरल मुख्यमंत्री को पीड़ा तो तब पहुंचती है जब उनके विरोधी विरोध के लिए विरोध की राजनीति का सहारा लेते है। मुख्यमंत्री तो विपक्ष से रचनात्मक विरोध की अपेक्षा रखते हैं। स्वर्णिम मध्यप्रदेश की रचना में वे विपक्ष की भी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते है परंतु मध्यप्रदेश के विकास रथ की गति को मंद कर देने वाले प्रयासों को जनता के साथ विश्वासघात मानते है। वे जितने सहज सरल और विनम्र हैं उतनी ही दृढ़ता के साथ विपक्ष के तथ्यहीन आरोपों का खंडन करने से भी नहीं चूकते। वे दो टूक कहते है कि एक दिन आरोपों की राख मेरे सत्य का श्रृंगार बन जाएगी। विपक्ष के हर प्रहार के सामने चट्टान की तरह रहकर उसे निष्प्रभावी सिद्ध करने में उन्हें सफलता मिली है और विपक्ष के प्रहारों ने अब तक खुद अपने ही घर को कमजोर किया है। राज्य में बिखराव का शिकार बन चुका विपक्ष मुख्यमंत्री के सामने बौना साबित हो चुका है। मुख्यमंत्री का विपक्ष को बस एक ही जवाब है कि जब तक जनता जनार्दन के विश्वास की शक्ति उनके अंदर मौजूद है तब तक उन्हें सरकार के मुखिया के रूप में जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के मार्ग से कोई डिगा नहीं सकता।
शिवराज सिंह चौहान सहज है, सरल है परंतु अभिमानी नहीं है। सत्ता अथवा अपनी करिश्माई लोकप्रियता के अहंकार उन्हें छू तक नहीं पाया है। उनके खाते में ढेर सारी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज है। वे पार्टी में अनेक शीर्षस्थ पदों पर मनोनीत हो चुके है। बहुत से प्रतिष्ठित सम्मानों और अवार्डों से उन्हें नवाजा जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तो उनके अंदर समाई अनूठी क्षमताओं के इतने कायल हो चुके है कि उनकी भूरि भूरि प्रशंसा करने से भी खुद को नहीं रोक पाते। प्रधानमंत्री मोदी को देश के जिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कर्मठता एवं कार्यशैली ने विशेष प्रभावित किया है उनमें मध्यप्रदेश का स्थान संभवत: सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री गत वर्ष अक्टूबर माह में इंदौर में आयोजित गलोबल इंवेस्टर्स समिट में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे तब उन्होंने देश विदेश के शीर्ष उद्योगपतियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री चौहान की तारीफ के पुल बांधते हुए कहा था कि नीयत साफ, नीति स्पष्ट, इरादे नेक, दिशा निर्धारित और इरादे मजबूत हो तो बीमारू राज्य भी प्रगतिशील बन सकता है। मध्यप्रदेश इसका उदाहरण है। यहां यह बात भी विशेष उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के कारण प्रधानमंत्री के लिए उस समय थोड़ा सा समय निकाल पाना भी मुश्किल था परंतु उन्होंने इस समिट का मुख्य आतिथ्य स्वीकारने का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्नेहिल आमंत्रण जब उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया तब उसका एकमात्र संदेश यही था कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से वे प्रभावित है। गौरतलब है कि समिट के आयोजन के पूर्व भी मुख्यमंत्री चौहान ने जब स्वच्छता मिशन का एक जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने का विचार प्रधानमंत्री के समक्ष रखा था तब प्रधानमंत्री को यह विचार इतना पसंद आ गया था कि उन्होंने इसे एक राष्ट्रव्यापी मिशन बनाने का फैसला कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह एकाधिकबार विभिन्न मंचों से विकास के शिवराज माडल को भाजपा शासित दूसरे राज्यों की सरकारों के लिए बता चुके है। राजनाथ सिंह ने अगर मध्यप्रदेश को माडल स्टेट का दर्जा दिया है तो भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रभारी एवं वर्तमान केन्द्रीय मंत्री अनन्त कुमार को तो यह टिप्पणी करने में भी संकोच नहीं है कि जननायक शिवराज सिंह चौहान मेरे लिए रोल माडल है। मध्यप्रदेश को दुर्दशा से निकालकर अग्रिम पंक्ति के राज्यों में खड़े करने का श्रेय मुख्यमंत्री चौहान को ही जाता है। मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व में समाहित गुणों की प्रशंसा करने वाले राजनेताओं की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उनके विचारों को यहां उदधृत कर पाना संभव नहीं है। बस एक वाक्य में उसका सार यहीं है कि मुख्यमंत्री सबके प्यारे है, दुलारे है।
मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य में अभी तक जितने भी निवेशक सम्मेलन आयोजित किए गए है उनमें शिरकत करने में देश विदेश के सारे प्रमुख उद्योगपतियों ने विशेष दिलचस्पी दिखाई है। हर सम्मेजन में पिछले सम्मेलन से अधिक सफलता अर्जित की है और निवेशक हर सम्मेलन में यह धारणा बनाकर ही लौटे है कि मध्यप्रदेश में निवेश करना उनके लिए निश्चित रूप से फायदे का सौदा ही साबित होगी। मुख्यमंत्री उन्हें यह भरोसा दिलाने में सफल रहे है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए पूरी तरह से अनुकूल वातावरण मौजूद है और यहां लालफिताशाही की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। औद्योगिक संयत्रों की स्थापना के लिए ऐसी भूमि उपलबध कराने का भी मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है जो पूरी तरह से विवादों से मुक्त होगी। परंतु मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर दिलाने का वचन भी उद्योगपतियों से ले लिया है जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रदेश की खुशहाली उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। राज्य के औद्योगिक विकास के लिए कृत संकल्प मुख्यमंत्री की सदाशयता से देश के नामी उद्योगपति भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी मानते है कि मुख्यमंत्री चौहान औद्योगिक व व्याववसयिक प्रगति के मानों को अच्छी तरह समझ रहे है। तभी इस प्रदेश की विकास दर 2 से बढकऱ 11 प्रतिशत हो गई है। रिलायंस एडीएजी ग्रुप की ओर से मध्यप्रदेश में निवेश के लिए विशेष रूचि प्रदर्शित करने वाले अनिल अंबानी तो पहले ही यह कह चुके है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का विजन उनके स्वर्गीय पिता धीरूभाई अंबानी जैसा है और मुख्यमंत्री चौहान अब चैंपियन की तरह काम कर रहे है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को उदधृत करते हुए कहा कि चैंपियन वही जिसके पास काम करने का मकसद, सपना और विजन होता है। मुख्यमंत्री के पास ये तीनों ही विशेषताएं मौजूद है। गौरतलब है कि इंदौर में संपन्न गलोबल इंवेस्टर्स समिट में शिरकत करने पहुंचे शीर्ष उद्योगपतियों सायरस मिस्त्री (टाटा संस ग्रुप), मुकेश अंबानी (रिलायंस इंडस्ट्रीज), वायसी देवेश्वर (आईटीसी), एएम नाईक (एलएंडटी), आदि गोदरेज (गोदरेज समूह), गौतम अडानी (अडानी समूह), अनिल अंबानी (रिलायंस एडीएजी ग्रुृप), शशि रूइया (एस्सार गु्रप) और किशोर बियाणी (फ्यूचर ग्रुप) के बीच इस बात पर आम सहमति थी कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद की बागडोर शिवराज सिंह चौहान के हाथों में रहते हुए इस प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण की उपलब्धता में संदेह की कही कोई गुंजाइश नही रह सकती। उल्लेखनीय है कि इंदौर में आयोजित गलोबल इंवेस्टर्स समिट में भाग लेने पहुंचे उद्योगपतियों ने 6.89 लाख करोड़ रुपए के निवेश विभिन्न क्षेत्रों में करने की घोषणा की थी। जिन उद्योगों की स्थापना के लिए इस राशि का निवेश किया जाएगा उसमें लगभग 17 लाख युवकों को रोजगार मिलने की संभावना है।
मध्यप्रदेश में संपन्न सारें निवेशक सम्मेलनों की सफलता के लिए मुख्यमंत्री चौहान ने कोई कसर बाकी नहीं रख छोड़ी थी। इन सम्मेलनों में शिरकत करने के लिए प्रमुख उद्योगपतियों को व्यक्तिगत तौर पर आमंत्रण देने हेतु उन्होंने स्वयं ही देश विदेश के प्रमुख शहरों का दौरा किया और उनकी बैठके बुलाकर उन्हें यह समझाने में सफल हुए कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति के मार्ग में हम सपुर बनकर उन्हें गौरव की अनुभूति ही होगी। निवेशक सम्मेलनों में शामिल हुए देश विदेश के नामचीन उद्योगपति मुख्यमंत्री से इसी तरह प्रभावित होकर लौटे कि मुख्यमंत्री के साथ दोस्ती की डोर में बंध चुके थे। शायद इसीलिए गवालियर के निवेशक सम्मेलन में भाजपा के शीर्ष नेता एवं देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी ने शिवराज सिंह चौहान की प्रशंसा इन शब्दों में की थी कि ‘मुझे इस सम्मेलन में आकर शिवराज सिंह चौहान के उन गुणों का पता चला जिनसे मैं अब तक अपरिचित था।’ गौरतलब है कि गवालियर में आयोजित निवेशक सम्मेलन में लालकृष्ण आडवानी ने मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास को गुजरात से बेहतर बताते हुए कहा था कि शिवराज सरकार इसलिए अधिक तारीफ की हकदार है क्योंकि मध्यप्रदेश पहले एक बीमारू राज्य था जबकि गुजरात की गिनती पहले ही आर्थिक रूप से विकसित राज्यों में होती रही है।
शिवराज सरकार के इन 12 वर्षों के कार्यकाल में जहां प्रदेश के औद्योगिक विकास ने रफ्तार पकड़ी है वहीं सरकार द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण हेतु प्रारंभ की गई योजनाओं के फलस्वरूप राज्य में सर्वत्र खुशहाली का दौर प्रारंभ हुआ है।
प्रदेश में सरकार द्वारा प्रारंभ अटल ज्योति अभियान ने केवल पूरे प्रदेश को ही रोशन नहीं किया है बल्कि लोगों के चेहरों पर भी चमक ला दी है। इस योजना के क्रियान्वयन में कही कोई खामी न रह जाए यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने कंधों पर ओढ़ी और एक एक जिले का दौरा कर इस योजना का शुभारंभ किया गया। शिवराज का संकल्प है कि वे प्रदेश को सरप्लस पावर स्टेट बनाकर ही चैन लेंगे। मुख्यमंत्री के विरोधी भी आश्चर्य चकित है कि कभी घंटों अंधेरे में डूबे रहने वाले प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही यह कैसा चमत्कार हो गया कि पूरा प्रदेश खुशहाली के प्रकाश से जगमगा उठा है। मुख्यमंत्री मानते है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:। इसीलिए उन्होंने प्रदेश में नारी के सम्मान की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च वरीयता प्रदाय की है। प्रदेश की बेटियों को उन्होंने ज्यो प्यार और दुलार दिया हे उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना तो उन मां-बाप के लिए वरदान बन चुकी हैं जो आर्थिक विपन्नता के कारण न तो बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवा पाते थे और न ही अर्थाभाव के कारण समय पर बेटियों के हाथ पीले कर पाते थे। मुख्यमंत्री चौहान ने स्वयं भी ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया जो पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने विदिशा के बाढ़वाले गणेश मंदिर में अपनी उस दत्तक बेटी के हाथ पीले किए जिसे उन्होंने 14 साल तक इस आश्रम में अपनी बेटी बनाकर रखा और मुख्यमंत्री की राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण उनकी सहधर्मिणी श्रीमती साधना सिंह चौहान ने इस अवधि के दौरान अपनी उस बेटी को मां-बाप का लाड़ प्यार दिया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जानकी जयंती के शुभअवसर पर आयोजित विवाह समारोह में मुख्यमंत्री की इस भाग्यशाली बेटी को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज एवं आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री सहित सहित समाज के विशिष्ट गणमान्यजन पहुंचे थे। प्रतिवर्ष नवरात्रि के पुनीत पर्व पर अपने निवास पर बेटियों को आमंत्रित कर उनकी सुश्रद्धा देवी स्वरूप में पूजन की परंपरा मुख्यमंत्री चौहान ने ही प्रारंभ की है। मध्यप्रदेश सरकार की बेटी बचाओ योजना को प्र्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने और विस्तारित रूप में देश के अन्य राज्यों में लागू किए जाने की आवश्यकता जताई है। उनका मानना है कि सारे देश में बेटियों और महिलाओं के सम्मान को सुनिश्चित करने हेतु उन सारी योजनाओं को अन्य राजयों में भी लागू किया जाना चाहिए जो मुख्यमंत्री चौहान की पहल पर मध्यप्रदेश में प्रारंभ की गई है। विगत दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने जब हरियाणा के शहर पानीपत में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का अगाज किया था वह भी इसी बात का परिचायक था कि मध्यप्रदेश सरकार की बेटी बचाओ योजना सारे देश के लिए रोल माडल बन चुकी है।
मध्यप्रदेश में पिछले 12 वर्षों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक मात्र सपना यह रहा है कि बीमारू राज्य के कलंक से मुक्ति दिला कर यह राज्य स्वर्णिम मध्यप्रदेश का गौरव अर्जित करे। देश के सारे विकसित माने जाने वाले राज्यों की कतार में हमारा प्रदेश अग्रणी स्थान पर खड़ा दिखाई दे। प्रदेश के हर नागरिक के चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान हो। सारे बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिले तो वृद्धजनों को तीर्थदर्शन की इच्छा भी अधूरी न रह जाए। कोई गरीब कभी भूखा न सोये। किसानों को सिंचाई की सुविधा से वंचित न रहना पड़े और कर्मचारियों के चेहरों पर कभी असंतोष का भाव न आए। प्रदेश के गिने चुने शहरों में नहीं बल्कि हर शहर में नागरिक सुविधाओं की इतनी उपलब्धता हो कि हर छोटे बड़े शहर के नागरिक स्मार्ट सिटी का निवासी होने के गर्व की अनुभूति कर सके। मुख्यमंत्री चौहान का आत्मविश्वास देखकर यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि स्वर्णिम मध्यप्रदेश का जो सुनहरा स्वप्र उन्होंने संजो रखा है वह एक दिन अवश्य साकार होगा। मुख्यमंत्री की अपनी अलग कार्यशैली है। वे त्वरित फैसले लेने में विश्वास रखते है और अपनी ही सरकार के उन प्रस्तावों से दो टूक असहमति जता देते है वे आम जनता के हितों को प्रभावित करने वाला मानते है। उदाहरण के लिए उन्होंने सरकार की नई आबकारी नीति से अपनी अप्रसन्नता जाहिर हुए स्पष्ट घोषणा कर दी कि वे शराब की नई दुकानें खोलने और देशी शराब की दुकानों से विदेशी शराब की बिक्री की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं। मुख्यमंत्री का संदेश समझना कठिन नहीं था कि समाज में नशे की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने की जरूरत है। अगर इसे सरकार को राजस्व की हानि होती है तो सरकार वैकल्पिक उपायों पर विचार करेगी। ऐसे अनेक प्रसंग पिछले 11 सालों में समाने आए है जब मुख्यमंत्री चौहान ने ऐसी दृढ़ता दिखाई है जो यह साबित कर देती है कि ऊपर से सहज सरल दिखाई देने वाले मुख्यमंत्री के अंदर एक सख्त प्रशासक भी छुपा हुआ है। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वन टू वन चर्चा कर जो सिलसिला प्रारंभ किया है उसने मंत्रियों और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति और सजग बना दिया है। मंत्री और अधिकारी जब मुख्यमंत्री के वन टू वन चर्चा अभियान का हिस्सा उनके कक्ष से बाहर निकलते है तो उनके चेहरे के भावों को पढकऱ सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के प्रश्र उन्हें कितना असहज कर देते होंगे। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि उनहें परिणाम चाहिए। अधिकारियों और मंत्रियों को जो भी समस्याएं है वे तुरंत दूर कर दी जाएगी परंतु जनता की भलाई के लिए योजनाओं में कही किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान की इसी कार्यशैली और प्रशासनिक कौशल के कारण वे प्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए है जिनके खाते में दर्ज उपलब्धियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए लगातार तीसरी बार कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजे जाने का गौरव मिला है। इसके पूर्व राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार का सम्मान भी मध्यप्रदेश अर्जित कर चुका है। सीएनबीसी टीवी-18 द्वारा स्टेट आफ द ईयर पुरस्कार और एनडीटीवी द्वारा इंडियन अवार्ड आफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित शिवराज सिंह चौहान को हाल में ही भारतीय छात्र फाउण्डेशन ने आदर्श मुख्यमंत्री के सम्मान से नवाजा था। जिस सरकार के मुखिया की बागडोर शिवराज सिंह चौहान जैसे सक्षम, लोकप्रिय, अदभुत नेतृत्व क्षमता और सांगठनिक कौशल के धनी राजनेता के हाथों में हो उसे समय समय पर अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है लेकिन इन पुरस्कारों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उन सबका जिक्र यहां संभव नहीं है। हां यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह सिलसिला आगे भी अबाध गति से चलता रहेगा।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)

एडमिन

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