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सीता के त्याग को समझना होगा: राम माधव

नई दिल्ली। जानकी नवमी के अवसर पर सेन्टर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम,दिल्ली के तत्वावधान में मधुबनी लिट्रेचर फेस्टिवल ने मसि इंक के सहयोग से जानकी को समर्पित कई वर्चुअल सत्रों का आयोजन अपने फेसबुक पेज के माध्यम से किया। कार्यक्रम के पहले दिन माँ जानकी मंदिर, जनकपुर से लाइव प्रसारण किया गया गया ताकि इस विषम परिस्थिति में आस्थावान लोगों को माँ के दर्शन से संबल मिले।इसके बाद उसके बाद उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास जी का स्नेह संदेश प्रसारित किया गया।इसका प्रसारण मधुबनी लिट्रेचर फेस्टिवल और मैथिली मचान से किया गया था।
दिन के कार्यक्रम ‘मैं जनक नंदिनी’ में प्रख्यात लेखिका आशा प्रभात का विमर्श सत्र हुआ जिसमें लेखिका ने सीता के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीता एक उद्घोष है,स्त्री प्रताड़ना के प्रतिरोध का स्वर है।
दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरूआत, जय-जय भैरवि पर नृत्यांगना कृतिका झा के नृत्य प्रस्तुति के साथ हुई, जिसने लोगों का मन मोह लिया। विमर्श सत्र को प्रारंभ करते हुए ‘अंडरस्टैंडिंग जानकी’ थीम के अंतर्गत वरिष्ठ भाजपा नेता राम माधव ने अपने वक्तव्य में बदलते युगों के साथ ह्रास होते मूल्यों और स्त्री प्रताड़ना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीता का त्याग, द्रोपदी का त्याग महिलाओं के सम्मान के लिए था,जिसे हमें समझना चाहिए। समाज को चाहिए की वो स्त्री को उसका सनातन सम्मान उसे दे।स्त्री पूजा नहीं सम्मान चाहती है। राम माधव के सत्र का संचालन करने के क्रम में पंकज मिश्र ने जानकी के मिथिला और वैश्विक संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि जानकी ने जगत को प्रकाशित किया।

सीता एक उद्घोष है, स्त्री प्रताड़ना के प्रतिरोध का स्वर

 


‘अपनी-अपनी सीता’ कार्यक्रम में सीता के मॉडर्न होने की बात पर सलमा खातून ने जहाँ उनके युद्ध कौशल, आयुर्वेद ज्ञान, अपने लिए राय लेने की कुशलता को देखते हुए अपने समय की आधुनिक महिला माना। वहीं, साहित्य अकादमी से पुरस्कृत लब्धप्रतिष्ठित कवयित्री अनामिका ने कहा कि कि मेरे लिए मॉडर्न वही है जो दूसरों को पराया ना समझे, ऊंच-नीच का भेद ना करे।

‘सितोपनिषद् अंडरस्टैंडिंग जानकी’ सत्र में स्वामी श्याम चैतन्य ने सीता के विभिन्न शास्त्रीय रूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीता मूलप्रकृति रूपा हैं। सत्र जानकी इन द ऐज ऑफ कलियुग में अपने ओजस्वी व्याख्यान में मैकगिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद शर्मा ने कहा कि धर्म परिवर्तनीय है जो युग के आधार पर बदलता है।अगर सीता ने त्रेतायुग में कुछ किया और हम कहते हैं कि आज ऐसा नहीं किया जा सकता तो इससे हम सीता का अपमान नहीं करते,बल्कि धर्म का सम्मान करते हैं। जानकीः एन एटर्नल जर्नी सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर संजय पासवान ने कहा कि मिथिला वासियों के लिए सीता माई नहीं दाई है।
वहीं लेखक बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि रामायण राम के बिना हो सकता था लेकिन सीता के बिना नहीं। अनुराधा प्रधान के संचालन में हुए इस सत्र में बोलते हुए डॉ. सच्चिदानंद ने कहा कि साहस और दृढ़निश्चय की अगर कोई प्रतिमूर्ति है तो तो वह निःसंदेह रूप से माँ सीता है। सत्र सिंगिंग सीता में, गाछ-विरि सभ सुखल, सुखल चर चाँचर रे, बड़ रे जतन हम सीया धिया पोसलहुँ आदि कर्णप्रिय गीत गा सुष्मिता झा ने लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और वीणा सी शेषाद्री के नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ।सत्रों का कुशल संचालक व संस्थापक सविता झा खान ने कहा कि मधुबनी लिट्रेचर फेस्टिवल जानकी को समर्पित कार्यक्रम करने को ले प्रतिबद्ध है।

टीम डिजिटल

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