वर्ल्ड नो तंबाकू दिवस पर विशेष


नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। धूमपान पुरुषों और महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में धूम्रपान के कारण हर साल लगभग 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है। हाल के शोध से पता चलता है कि 18 साल से अधिक उम्र की चार में से लगभग एक महिला धूम्रपान करती है।
धूम्रपान का एक्टोपिक गर्भावस्था से संबंध हो सकता है और इसके कारण फैलोपियन ट्यूबों में समस्या आ सकती है। एक्टोपिक गर्भावस्था में, अंडे गर्भाशय तक नहीं पहुंचते हैं और इसकी बजाय फलोपियन ट्यूब के अंदर प्रत्यारोपण हो जाते है। इसके कारण गर्भाशय में परिवर्तन आ सकता है, जिसके कारण गर्भाशय कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं। यह असंतुलन निशेचन को प्रभावित कर सकता है और स्पष्ट है कि इसके बाद इंप्लांटेशन में कमी आ जाएगी। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भस्थ बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है। यहां तक कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं में समय पूर्व प्रसव पीड़ा हो सकती है और स्वास्थ्य समस्याओं से पीडि़त बच्चों को जन्म दे सकती हैं। धूम्रपान करने वाली आईवीएफ रोगियों में धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में गर्भावस्था दर 30 प्रतिशत कम होती है। पुरुष प्रजनन क्षमता पर भी भारी दुष्प्रभाव पड़ता है। यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है।


मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ शोभा गुप्ता का कहना है कि धूम्रपान पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को कम कर सकता है, जिससे शुक्राणु अधिक सुस्त हो सकते हैं और यह असामान्य शुक्राणुओं की संख्या में भी वृद्धि कर सकता है। जो पुरुष बहुत अधिक धूम्रपान करते हैं या बहुत अधिक तंबाकू का सेवन करते हैं, उनमें शुक्राणु की मृत्यु दर और असामान्य शुक्राणु का अनुपात अधिक होता है। दूसरी ओर जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं, उनमें प्रजनन क्षमता में कमी और फैलोपियन ट्यूब फंक्शन में भी समस्या होती है।