स्ट्रेस को खत्म करने के सोलुशन ढूंढिए

नई दिल्ली / टीम डिजिटल। CCD नाम सुना होगा ? अमूमन हम सब यहाँ बैठकर अपना तनाव दूर करते हैं और शायद आगे भी करते रहेंगें, बहुत सी जोड़ियां बनती है यहाँ और बिगड़ती भी है और आगे भी ऐसा होता रहेगा। पर आज इसके फाउंडर मेम्बर ने स्वयं की जान ले ली ?? पर क्यों ??
(पुष्टि अभी नहीं हुई है) जब आपके साथ कुछ ऐसा घटता है, जो आपकी सहन शक्ति से बाहर होता है। आप टूट चुके होते हैं, पर फिर भी आपको दुनिया को दिखाना होता है कि आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। बाहर से आप हँसते है, दिन चर्या के सारे काम करते हैं, ऑफिस के काम पर ज्यादा फोकस करते हैं, हर वक्त खुद को बीजी रखते हैं, क्योंकि आपको डर लगता है अगर पांच मिनट खुद के साथ बैठ गए तो सम्भाल नहीं पाएंगे।

इन सबको अंदर कही अपने शरीर के कोने में धँसाकर आप दिन गुजार देते हैं, रातें बिता देते हैं। दुनिया आपकी तारीफ़ करती है कितना जिंदादिल इंसान है, इतनी तकलीफ में है और फिर भी मुस्कुरा रहा है। और आप इस सो कॉल्ड “जिंदादिल” इमेज को बनाकर खुद को योद्धा समझते है और फिर अकेले में भी अपने इस इमेज से बाहर निकल नही पाते। *जब अकेले होते हैं तब भी लगता है मैं रो नहीं सकता, मैं टूट नहीं सकता, मैं हार नहीं सकता। पर असल में आप भाग रहे होते हैं खुद से !! CCD वाले सीईओ के जैसे !!
अफसोस आज इसके मालिक को कुछ ऐसे लोग नहीं मिल पाए जो इनके व्यवहार में आये परिवर्तनों को देख पाते। किसी ने ये नहीं समझा कि मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के क्या परिणाम हो सकते हैं क्योंकि सामान्य धारणा के अनुसार सूटेड बूटेड दिखने वाले इंसान को डिप्रेशन नहीं हो सकता।
हमारे समाज मे पुरुषों को रोना ,अपने दुखों को व्यक्त करना सिखाया क्यों नही जाता ?? ताकि वो अपनी मन की व्यथा को व्यक्त कर सकें ?? ऐसी पैरेंटिंग और सहयोग मिले कि वे अपनी मर्दानगी का चोला ओढ़े रहने के दबाव से ऊपर उठकर रो सकें। बातें कर सकें।*
बहुत से लोगों से सुना है स्ट्रेस का सामना करना सीखिए ! भई क्यों ? स्ट्रेस से सामना नही स्ट्रेस को खत्म करने के सोलुशन ढूंढिए।* कोई कहता है कि क्रोध को पालना सीखो, पर सच ये है क्रोध पालने की चीज है ही नहीं आप सतयुग में नहीं है, कलयुग में हैं !! *आवश्यकता से अधिक चिंतन अवसाद का कारण बनता है* अगर चिंतित हो तो तो रियेक्ट करिये आप इंसान है, मशीन नहीं कि दूसरों के हिसाब से खुद को इंस्ट्रक्शन दें और उन्हें दिखाने के लिये खुद के सच से भागें, क्योंकि कहीँ ना कहीँ ये चिंता, दुःख, गुस्सा, तकलीफ जमा होती जायेगी और किसी रोज *हार्ट स्ट्रोक, ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस या सुसाइडल अटेम्प्ट जैसे अटैक से बाहर निकलेगी। जी भी नहीं पाएंगे ढंग से और अचानक मर जायेंगे किसी रोज !!*
बेवजह योद्धा मत बनिये, हमेशा लड़ने की या सहकर भी मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं होती।
क्या हम खुद कभी कृष्ण बनकर हमारे आसपास अवसादग्रस्त अर्जुन को ये समझा सकेंगे ?? कि
*“ तूफ़ान के गुज़र जाने का इंतज़ार मत करो बारिश में नृत्य करना सिखलो


पवन सोनी, स्वतंत्र  लेखक

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