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चीन में हुए कोविड-19 के विस्फोट के बाद एक बार फिर से भारतीयों की अपील- “बैन टिक टॉक”

नई दिल्ली। चीन से हुए कोरोना वायरस के विस्फोट ने दुनिया के 10 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर दिया है। दुनिया भर के व्यापार अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर की चपत लग रही है। दुनिया भर के शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गए हैं। ऑटोमोबाइल, ऐविएशन, रिटेल, ईकॉमर्स, पर्यटन आदि कितने ही उद्योगों पर कोविड-19 महामारी के कारण भारी चोट पड़ी है। भारत भी इस आर्थिक संकट से अछूता नहीं है। सभी बड़े औद्योगिक उत्पादन रुक गए हैं और देश में लगभग 2 करोड़ नौकरियों का नुकसान हुआ है।

भारत और पूरी दुनिया इस वायरस का दंश भुगतने को मजबूर है जिसे अब ‘चाइनीज़ वायरस’ कहा जा रहा है। भारत में चीन के खिलाफ भावनाएं उभर रही हैं और इसके साथ ही भारत सरकार से ‘टिक टॉक’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठने लगी है। भारत में 10 घंटों से भी कम वक्त में टिक टॉक को बैन करने के 10,000 ट्वीट्स किए जा चुके हैं, जो शुक्रवार सुबह से ट्रैंड कर रहे हैं।

“मैं टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के हक में हूं क्योंकि यह उस कीमती वक्त को नष्ट करता है जिसका उपयोग ज्यादा उत्पादक कार्यों में किया जा सकता है। हमारे युवा कार्यबल का 60 प्रतिशत हिस्सा अगर अपने सिर्फ 10 मिनट भी व्यर्थ करेगा तो भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह बहुत बड़ा नुकसान है,” उत्तर प्रदेश सरकार में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रचार रणनीतिकार श्री विशाल त्रिवेदी ने कहा।

लखनऊ निवासी वकील सुश्री वर्षा मधुकर ने कहा, “टिक टॉक सरकार के रडार पर है क्योंकि यह देश की सुरक्षा पर जोखिम है, हमारा महत्वपूर्ण डाटा चीन जा रहा है जिससे साइबर अपराध का खतरा बढ़ गया है। जब तक हम अपने डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सभी उपाय न कर लें तब इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।“

टिक टॉक के चलते भारत पर मंडराते खतरे के बारे में देहरादून निवासी श्री अनुराग शुक्ला ने कहा, “मैं देखता हूं कि हमारे युवा टिक टॉक पर अजीबोगरीब कॉन्टेंट बना व देख रहे हैं, बेवकूफी भरे चैलेंज ले रहे हैं, इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य खतरे में पड़ रहा है। यह ऐप हमारी प्रगति के लिए एक जोखिम है, अगर यह यूं ही हमारे देश में कायम रहा तो हमारी प्रणाली में एक वायरस की तरह बहुत गहरे घुस जाएगा।“

सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री रेणु माथुर का कहना है, “टिक टॉक की वजह से हमारे बच्चे पोर्नोग्राफी तक पहुंच रहे हैं और साम्प्रदायिक हिंसा व मज़हबी नफरत में शामिल हो रहे हैं। मैं इस ऐप का कड़ा विरोध करती हूं क्योंकि यह न केवल हमारे देश के सौहार्द को चोट पहुंचा रहा है बल्कि लोगों की सोच पर भी बुरा असर डाल रहा है और इससे व्यापक स्तर पर देश की प्रगति दुष्प्रभावित होगी।“

12 मार्च को अमेरिका में रिपब्लिकन सीनेटर जॉश हावले ने सीनेट में एक बिल पेश किया कि सभी फेडरल सरकारी उपकरणों पर चीनी सोशल मीडिया ऐप टिक टॉक को डाउनलोड व इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि यह अमेरिकी सरकार की डाटा सुरक्षा पर एक जोखिम हो सकता है। उनका वीडियो फेसबुक पर ट्रैंड कर रहा है, उसे 13 लाख लोगों द्वारा देखा और 1,40,000 से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है।

अतीत में भी टिक टॉक को भारतीयों के गुस्से का सामना करना पड़ा है क्योंकि टिक टॉक वीडियो बनाने के चक्कर में हजारों लोगों की दुर्घटना में मौत हो चुकी है। यह प्लैटफॉर्म कई विवादों के लिए भी बदनाम रहा है जैसे नफरत भरे भाषणों को समर्थन, झूठी खबरें फैलाना, साम्प्रदायिक हिंसा, डाटा सुरक्षा में सेंध आदि।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच ने भी चीनी सोशल मीडिया ऐप टिक टॉक और हेलो पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था ताकि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्टार्टअप ईकोसिस्टम की रक्षा की जा सके। प्रधानमंत्री को भेजे गए एक पत्र में स्वदेशी जागरण मंच ने लिखा था, “मीडिया में विदेशी निवेश को लेकर हमारे कड़े नियम हैं लेकिन ये ऐप सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म की आड़ में हमारे देश के उन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्थापित किए गए हैं।“ स्वदेशी जागरण मंच का दावा है कि चीन के बाइट डांस के मालिकाना हक वाले ऐप्लीकेशंस भारतीय युवाओं को कम उम्र में गुमराह कर रहे हैं।

नवंबर 2019 में हीना दरवेश ने मुंबई हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी जिसमें कहा गया था कि यह ऐप अपराधों और मौतों का कारण बन रहा है। गौरतलब है कि टिक टॉक पर पिछले साल मद्रास हाई कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया था जिसे बाद में हटा लिया गया।

टीम डिजिटल

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