नंदना सेन ने सुंदरवन में कोविड से अनाथ बने बच्चों से की मुलाक़ात

 

कोलकाता। अभिनेत्री, लेखिका और सेव द चिल्ड्रेन, इंडिया की बाल सुरक्षा प्रचारक, नंदन सेन कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के घर गईं। वे सुंदरवन के दक्षिण 24 परगना जिले में इस बाल अधिकार संगठन के साथ मिल कर इन बच्चों की सहायता कर रही हैं।
कोविड-19 और यास चक्रवात की दोहरी मार से अनेक बच्चों का जीवन तबाह हो गया। इनमें से सबसे ज्यादा अरक्षित बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए नंदना ने सुंदरवन क्षेत्र के 25 ग्राम पंचायतों में 300 से अधिक बच्चों के सहायतार्थ संसाधन एकत्र किये। वर्ष 2021 में सेव द चिल्ड्रेन द्वारा ‘फॉर अ सेफ टुमारो” (सुरक्षित भविष्य के लिए) अभियान आरम्भ किया गया था। इस अभियान के अंतर्गत इन बच्चों की चिकित्सीय, पोषण, शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक और सुरक्षा संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उनकी देखभाल करने वालों को मदद पहुँचाई जाती है। प्रत्येक बच्चे को इन तात्कालिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हर महीने 3000/- रुपये दिए जाते हैं ताकि वे शिक्षा और स्वास्थ्य की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।
नंदना ने पाथार प्रतिमा प्रखंड के मंदिर बाज़ार और वनश्याम नगर द्वीप में संचालित विविध गतिविधियों वाले मल्टी-ऐक्टिविटी सेंटर्स (एमएसी) का भी दौरा किया। ये केंद्र अनाथ/परित्यक्त और अरक्षित बच्चों को शिक्षा के दायरे में वापस लाने के साथ-साथ उनकी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक देखभाल में मदद कर रहे हैं।
सुंदरवन जलवायु परिवर्तन का सबसे सवेदनशील स्थान है और इस नाते इस क्षेत्र में धारासार वर्षा के कारण चक्रवात, तूफ़ान, बाढ़ आदि आती रहती है। ये बच्चे अनेक प्रकार की अरक्षितता के शिकार है और कुछ के पेरेंट्स या परिवार के प्रमुख कर्ता कोविड-19 के कारण गुजर चुके हैं। इनमें से अनेक बच्चों पर यास चक्रवात का भी असर हुआ है, जबकि कुछ अन्य के पेरेंट्स साँप के काटने, मगरमच्छों और घडियालों के काटने, नाव डूबने, बाघों के हमलों और शहद संग्रह के समय मधुमक्खियों का काटने से मर गए हैं। “फॉर अ सेफ टुमारो” कैंसर और थैलेसीमिया जैसी जानलेवा बीमारियों से पीड़ित बच्चों का भी ध्यान रख रहा है।
ये बच्चे अपने-अपने समुदायों में बाल सुरक्षा नियामकों की देख-रेख में हैं। वे सप्ताह में छः से साथ घंटों का समय एमएसी केन्द्रों में बिताते हैं जहाँ उन्हें लोगों से घुलने-मिलने और भय एवं चिंता से मुक्त होने में मदद मिलती है।
नंदना सेन ने कहा कि, “हम जिन इलाकों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, वे बेहद दूर-दराज के अल्प सेवा-प्राप्त क्षेत्र हैं। कुछ स्थान तो काफी जंगली है जो न केवल कोविड-19 से बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से भी तबाह हो चुके हैं। नतीजतन, उन इलाकों में अनेक बच्चे ऐसे हैं जिनके एक या दोनों पेरेंट्स की मृत्यु हो चुकी है और इस प्रकार उनके जीवन का आधार छिन गया है। उन्हें न केवल भारी सदमे से गुजरना पड़ा है जिसे ठीक करने के लिए काफी देख-भाल की ज़रुरत है, बल्कि वे बाल तस्करी, बाल श्रम और बाल विवाह का ख़तरा भी झेल रहे हैं। इन बच्चों पर ये सभी संकट महामारी के दौरान पश्चिम बंगाल में चिंताजनक स्तर तक बढ़ गए हैं। सेव द चिल्ड्रेन के साथ मिलकर हम सुनिश्चित करते हैं कि इन बच्चों को सुरक्षा, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य की देख-भाल, तथा मनोवैज्ञानिक सहारे के सन्दर्भ में उनकी ज़रुरत के अनुसार व्यापक भरण-पोषण प्राप्त हो। मैं यह पक्का करना चाहती हूँ कि मेरे प्रिय बंगाल के ये सबसे अधिक अरक्षित बच्चे सुरक्षित और स्वस्थ रहें तथा सुरक्षा के माहौल में सीखते और तरक्की करते रहें।”

सुदर्शन सुचि, सीईओ, सेव द चिल्ड्रेन ने कहा कि, “कोविड के दौरान इन बच्चों ने जो नुकसान झेला है, उसके कारण वे अत्यंत अरक्षित हो गए हैं। वित्तीय और शैक्षणिक सहायता के अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रेन बच्चों के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं और काडरों द्वारा परामर्श और मानसिक-सामाजिक सहायता सुनिश्चित कर रहा है ताकि वे माता-पिता या अभिभावकों की मृत्यु से जुड़े सदमे से उबर सकें। जिन बच्चों को गहरी मनोवैज्ञानिक सहायता की ज़रुरत है उन्हें पेशवर मानसिक स्वास्थ्य परामार्शियों द्वारा सावधानीपूर्वक मार्गदर्शन दिया जा रहा है।”
प्रत्येक बच्चे को मासिक आधार पर सहायता दी जा रही है। सहायता का आवंटन कठोर जाँच प्रक्रिया के बाद किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राशि का प्रयोग सबसे अधिक जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए हो रहा है। इस सहायतार्थ प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन, निगरानी और समीक्षा सेव द चिल्ड्रेन द्वारा की जा रही है और यह कार्य प्रत्येक बच्चे की अरक्षित्ता के सम्पूर्ण समाधान होने तक जारी रहेगा।
वर्ष 2020 के अम्फान चक्रवात के बाद 2021 में यास चक्रवात ने क्षेत्र को अत्यंत अरक्षित बना दिया था। इन सभी के बाद कोविड-19 ने स्थिति को बद से बदतर बना दिया। जलवायु परिवर्तन के जारी रहने की आशंका है और इससे इस क्षेत्र में प्राकृतिक व्यवस्थाएँ एवं मानवीय जनसंख्या, दोनों ही प्रभावित होंगी। नतीजतन, पारिस्थिकी तंत्र के क्षरण और जलवायु स्थानान्तरण में तेजी आयेगी।

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