प्रमुख सुर्खियाँ :

कोरोना काल में सरसंघचालक के संदेश का क्या है निहितार्थ ?

कृष्णमोहन झा

देश में कोरोना संक्रमण को नियन्त्रित करने के लिए लागू किए गए लाक डाउन के दौरान दो ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंग सामने आए जिनने संपूर्ण देश के मानस को झकझोर दिया | एक ओर समूह विशेष के कुछ लोग जब देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस के कैरियर बन गए तो पूरे समूह के विरुद्ध ही समाज में द्वेष फैलाने की कोशिशें प्रारंभ हो गईं और दूसरी ओर महाराष्ट्र के पालघर क्षेत्र में दो संतों एवं उनके ड्रायवर की तीन सौ लोगों की हिसक भीड के द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई जिसमें पुलिस की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लग गए | ये दोनों प्रसंग कुछ इस तरह के थेे कि सारे देश को उनके बारे में संघ प्रमुख डां मोहन भागवत के विचार जानने की उत्सुकता स्वाभाविक थी | संघ प्रमुख ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दिये गए एक संदेश में अपने जो उदगार व्यक्त किए उसका सारांश यही है कि कोरोना वायरस के विरुद्ध हम जो लडाई लड रहे हैं उसमें इन प्रसंगों से बाधाएँ उपस्थित हो जाती हैं |संघ प्रमुख ने समाज में द्वेष और वैमनस्य
फैलाने की कोशिशों में लगे चंद लोगों को सचेत रहने की अपील करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में हमें अपनी एकजुटता को हर हाल में अक्षुण्ण बनाए रखना है | संघ प्रमुख ने कहा कि जो संत समाज को सन्मार्ग पर चलने के प्रेरित करते हैं उनकी नृशंस हत्या कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं हमें इन सवालों के जवाब खोजने होंगे | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने विगत दिनों वीडियो कांफ़्रेंसिंग के माध्यम से दिए गए एक संदेश
में जो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं उसमें सबसे अधिक जोर एकजुटता पर दिया है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के विरुद्ध जारी हमारी लड़ाई में सफलता का मूलमंत्र बताया है | सारे देशवासियों ने अपनी इस एकजुटता को कभी ताली, थाली, शंख और घंटी बजाकर तो कभी अपने अपने घरों में दीपक जलाकर प्रमाणित भी कर दिया है |लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि समाज के मुट्ठीभर लोग इस अद्भुत एकजुटता को ग्रहण लगाने के लिए नित नए बहाने खोज रहे हैं | डा भागवत ने इस संदेश के माध्यम से समाज को इन मुट्ठी भर लोगों से केवल सचेत ही नही किया है अपितु वे कोरोना संकट के इस काल में समाज को सकारात्मक विचारों को पोषित करने के लिए प्रेरित करते भी हैं | डा भागवत का यह संदेश समाज को गंभीरता से सोचने के लिए विवश करता है |आर एस एस प्रमुख डा प्रमुख डा मोहन भागवत के इस संदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सप्तपदी की भांति आत्मसात करके जीवन में उतारने की आव़श्यकता है | कोरोनावायरस के विरुद्ध हम जो लडाई लड रहे हैं उसमें सफलता के लिए डा भागवत के इस संदेश की विशिष्ट उपादेयता है | संघ प्रमुख ने एकजुटता की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा है कि हमें यह लड़ाई पूरे आत्म विश्वास के साथ लडना है|हमें इस संकट से डरना नहीं है क्योंकि अगर हम इस संकट से डर गए तो संकट का बल बढ़ जाएगा |संघप्रमुख ने कहा कि लाक डाउन के कारण हमें घर के अंदर ही रहना है | हम घर के अंदर रहकर भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान दे सकते हैं |घर में अपने परिवार जनों के साथ मिलकर प्रार्थना करते रहें | प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है | प्रार्थना हमारा आत्मबल बढाती है जिससे हमारा आत्म विश्वास और मजबूत होता है |संघ प्रमुख ने इस संदेश के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगो के साथ  जो आत्मीय संवाद किया उसमें उसमें वह बहुआयामी था | उसमें उन्होंने स्वदेशी पर जोर दिया तो यह भी बताया कि कोरोना के संकट ने हमारी जीवन शैली में ही परिवर्तन ला दिया है संघ प्रमुख ने कहा कि इस संकट के कारण जीवन मूल्य भी बदल गए हैं | इस संकट ने हमें दूसरोंके प्रति पहले से अधिक संवेदनशील बना दिया है | डा भागवत ने कहा कि केवल हमारा अच्छा होना पर्याप्त नहीं है | हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी अच्छाई से दूसरों के जीवन को कितना अच्छा बना सकते हैं |

(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं डिज़ियाना मीडिया समूह के सलाहकार है)

 

टीम डिजिटल

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account