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उत्तर प्रदेश भाजपा में इतना सन्नाटा क्यों है ?

नई दिल्ली। क्या उत्तर प्रदेश में योगी सरकार और भाजपा संगठन में जल्द ही कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं?उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले हुए लोकसभा उप-चुनावों में मिली हार और चार दलित सांसदों की राज्य सरकार से नाराजगी ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को चिंतित कर दिया है. खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात में इसे लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. शनिवार को अपने दिल्ली दौरे के दौरान योगी आदित्यनाथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिले थे. उन्होंने भी कुछ मामलों को ठीक से नहीं संभाल पाने के चलते पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को लेकर संदेह जताए हैं. बताया जा रहा है कि अमित शाह राज्य के जमीनी हालात का आकलन करने के लिए 11 अप्रैल को लखनऊ जाएंगे.
हाल में आरएसएस के दो शीर्ष पदाधिकारियों कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबोले ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया था. इस तीन दिवसीय दौरे में उन्होंने प्रदेश के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों, भाजपा कार्यालय के अधिकारियों, संघ के नेताओं और जमीन पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं से बातचीत कर वर्तमान स्थिति की जानकारी ली थी. इसके बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश के मुखिया आदित्यनाथ से सफाई मांगी है. आधिकारिक तौर पर योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष से हुई मुलाकात को नियमित कार्यक्रम बताया जा रहा है. लेकिन पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि जल्द ही इसका असर देखने को मिल सकता है. उन्होंने संभावना जताई है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सरकार और पार्टी संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. उधर, आरएसएस ने सपा और बसपा के साथ आने को लेकर भाजपा नेतृत्व को सावधान किया हुआ है. खबरों के मुताबिक यह भी बड़ी वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया था. रिपोर्ट है कि मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने योगी को कहा कि वे जल्द से जल्द विवादों को सुलझाएं.

 

सुभाष चन्द्र

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