न्यूयाॅर्क। एक अनुमान के मुताबिक 2010 से 2017 के बीच 169 मिलियन बच्चों को मीज़ल्स यानि खसरे की पहली वैक्सीन नहीं दी गई, यानि हर साल तकरीबन 21.1 मिलियन बच्चों को खसरे की वैक्सीन नहीं मिली, युनिसेफ ने आज बताया। बच्चों को खसरे की वैक्सीन न मिलने के कारण आज दुनिया भर के कई देशों में खसरे के प्रकोप की संभावना कई गुना बढ़ गई है। ‘‘दुनिया भर में खसरा फैलने की इस संभावना की शुरूआत कई साल पहले हो गई थी।’’ हेनरिएटा फोर, यूनिसेफ की एक्ज़क्टिव डायरेक्टर ने कहा। ‘‘खसरे का वायरस उन बच्चों को बड़ी आसानी से प्रभावित करता है जिन्हें खसरे की वैक्सीन नहीं दी गई है। अगर हम वास्तव में इस खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकना चाहते हैं तो हमें गरीब और अमीर सभी देशों में हर बच्चे को खसरे की वैक्सीन देनी होगी।’’ 2019 को पहले तीन महीनों में दुनिया भर में खसरे के 110,000 मामले दर्ज किए गए- जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 300 फीसदी अधिक हैं। एक अनुमान के मुताबिक 2017 में 110,00 लोगों की मृत्यु खसरे के कारण हुई, जिनमें ज़्यादातर बच्चे थे, इस दृष्टि से भी पिछले साल की तुलना में 22 फीसदी की वृद्धि हुई है।
बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए खसरे की वैक्सीन की दो खुराक दी जाती है। हालांकि उपलब्धता की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता, कुछ मामलों में वैक्सीन को लेकर डर या संदेह के कारण 2017 में दुनिया भर में खसरे की पहली वैक्सीन का कवरेज 85 फीसदी रहा, यह आंकड़ा आबादी बढ़ने के बावजूद पिछले कई दशकों से स्थिर बना हुआ है। वहीं दूसरी खुराक की बात करें तो दुनिया भर में यह कवरेज और भी कम- 67 फीसदी रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बीमारी से प्रतिरक्षा हासिल करने के लिए कम से कम 95 फीसदी कवरेज ज़रूरी है। हाल ही जारी आंकड़ों के अनुसार उच्च आय वाले देशों में पहली खुराक का कवरेज 94 फीसदी है, जबकि दूसरी खुराक का कवरेज 91 फीसदी है। संयुक्त राज्य- उच्च आय वाले देशों की सूची में शीर्ष पायदान पर है, जहंा 2010 से 2017 के बीच 2.5 मिलियन से अधिक बच्चों को खसरे की पहली खुराक नहीं दी गई। इसके बाद इसी अवधि के दौरन फ्रांस और युके में क्रमशः 600,000 और 500,000 बच्चों को खसरे की पहली खुराक नहीं मिली।
निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों की बात करें तो स्थिति और भी गंभीर है। साल 2017 में नाईजीरिया में एक साल से कम उम्र के सबसे अधिक यानि 4 मिलियन बच्चों को खसरे की पहली खुराक नहीं मिली। भारत में 25 मिलियन बच्चे हर वर्ष जन्म लेते हैं और 88 प्रतिशत कवरेज होने के बावजूद 2.9 मिलियन बच्चों को खसरे की पहली खुराक नहीं मिल पाती है। इसके बाद पाकिस्तान और इंडोनेशिया (1.2 मिलियन प्रत्येक), और इथियोपिया (1.1 मिलियन)का स्थान हैं।
दुनिया भर में खसरे की दूसरी खुराक का कवरेज और भी चिंताजनक है। 2017 में शीर्ष पायदान के 20 में से 9 देशों में बच्चों को खसरे की वैक्सीन की दूसरी खुराक नहीं दी गई। सब-सहारा अफ्रीका के बीस देशों की टीकाकरण सूची में खसरे की दूसरी खुराक को आवश्यक रूप से शामिल नहीं किया गया है, जिसके चलते एक साल में 17 मिलियन से अधिक बच्चे अपने बचपन के दौरान खसरे के लिए जोखिम पर आ जाते हैं।
– वैक्सीन की कीमतों में कमीः खसरे की वैक्सीन की कीमत अब तक की सबसे कम लागत पर पहुंच गई है।
– देशों में उन क्षेत्रों और उन बच्चों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जहां आज भी खसरे की वैक्सीन का कवरेज नहीं है।
– वैक्सीन एवं टीकाकरण के लिए अन्य आपूर्ति की खरीद।
– नियमित टीकाकरण कवरेज में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए पूरक टीकाकरण अभियानों का समर्थन।
– देशों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में दूसरी खुराक को शामिल करने के लिए प्रयास। इसके लिए 2019 में कैमरून, लाईबेरिया और नाइजीरिया पर ध्यान दिया जा रहा है।
– वैक्सीन को सही तापमान पर रखने के लिए आघुनिक तकनीकों जैसे सोलर पावर और मोबाइल टेक्नोलाॅजी का इस्तेमाल
– खसरा एक संक्रामक बीमारी है। इसके लिए न केवल वैक्सीन का कवरेज बढ़ाना ज़रूरी है बल्कि यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि हर व्यक्ति को बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीन की सही खुराक मिले।

