शिक्षक दिवस विशेष: चिंतन, नीतिगत परिवर्तन और कक्षा की मूल पुकार

  कुमकुम झा शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव, पुष्पगुच्छों के आदान-प्रदान अथवा मंचों से दी जाने वाली स्तुतियों का दिन नहीं है। यह भारतीय समाज और शासन-व्यवस्था के लिए …

कोहबर : मिथिला की दीवारों से विलुप्त होते संस्कारों तक

  कृष्णमोहन झा भारत की सांस्कृतिक परंपरा को समझना हो तो केवल उसके ग्रंथों को पढ़ना पर्याप्त नहीं है। भारत की संस्कृति उसके गांवों में, लोकगीतों में, विवाह संस्कारों में, …

फ़िल्ममेकर और लेखक प्रियांशु मोदी ने दिल्ली में एक इवेंट में अपनी पहली कविता-पुस्तक ‘पोयम्स फ़ॉर सिगरेट्स’ लॉन्च की

नई दिल्ली: अवॉर्ड जीतने वाली शॉर्ट फ़िल्म ‘द पिल’ के बाद, प्रियांशु मोदी ने दिल्ली में एक खास बुक रीडिंग शाम के ज़रिए एक शानदार और निजी उपलब्धि हासिल की। …

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया ‘कोहबर’ पुस्तक का विमोचन

भोपाल। भारतीय लोक-संस्कृति, दाम्पत्य परंपरा और पारिवारिक संस्कारों के विविध आयामों को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक ‘कोहबर’ का विमोचन मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र …

प्रभात झा के विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत: राज भूषण चौधरी

  पूर्व भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा की दूसरी पुण्यतिथि पर संगोष्ठी, व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुआ मंथन नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा …

सृष्टि का सृजन, संवर्धन और पोषण बिना मातृत्व के संभव नहीं : डॉ. मोहन भागवत

    राकेश थपलियाल नई दिल्ली। विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा …

आध्याश्री पब्लिकेशन्स द्वारा ‘बुक लॉन्च एवं ऑथर मीट’ का आयोजन; साहित्य, संवाद और संगीत से सजी एक सुंदर शाम

  नई दिल्ली। आध्याश्री पब्लिकेशन्स द्वारा श्री अरविंदो सेंटर फॉर आर्ट्स एंड क्रिएटिविटी (SACAC), नई दिल्ली में आयोजित ‘बुक लॉन्च एवं ऑथर मीट’ का सफल आयोजन संपन्न हुआ। इस साहित्यिक समारोह …

आपातकाल के खिलाफ साहित्यिक प्रतिरोध का ऐतिहासिक दस्तावेज है ‘त्रिकाल संध्या’ : शकुंतला मित्तल

नई दिल्ली। सुप्रसिद्ध साहित्यकार शकुंतला मित्तल ने कहा कि भवानी प्रसाद मिश्र की कृति ‘त्रिकाल संध्या’ केवल एक कविता संग्रह नहीं, बल्कि आपातकाल की क्रूरता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुए …

बाल कवियों और कथाकारों ने मोहा मन, मैथिली साहित्य के भविष्य की दिखाई मजबूत तस्वीर

नई दिल्ली :  मैथिली साहित्य महासभा द्वारा शनिवार को नई दिल्ली स्थित संस्कार भारती सभागार में मैथिली बाल कवि-कथाकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और जय-जय …

‘नेपथ्य का रंगमंच’ : हिंदी रंगमंच के एक उपेक्षित लेकिन महत्वपूर्ण पक्ष पर केंद्रित महत्वपूर्ण पुस्तक

नई दिल्ली। हिंदी रंगमंच की दुनिया में एक महत्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक ‘नेपथ्य का रंगमंच’ हाल ही में प्रकाशित हुई है। वरिष्ठ रंगकर्मी महेश आनंद और देवेंद्र राज अंकुर द्वारा …