नई दिल्ली। हर वर्ष कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस वर्ष यह एकादशी तिथि 25 Nov को शुरू होकर 26 तारीख को समाप्त होगी। यह पर्व 25 Nov 2020 में मनाया जाएगा। तुलसी विवाह में माता तुलसी देवी का विवाह भगवान शालिग्राम जी के साथ किया जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य फल मिलता है।
श्राप से पत्थर बना दिया था
शालिग्राम भगवान विष्णु जी का ही अवतार माने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी मैया ने गुस्से में भगवान विष्णु जी को श्राप से पत्थर बना दिया था। तुसली देवी के इस श्राप से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु ने शालिग्राम जी का अवतार लिया और तुलसी जी से विवाह किया। मैया को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। कुछ स्थानों पर तुलसी विवाह द्वादशी के दिन भी किया जाता है।
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि 25 नवम्बर में प्रातः 2 बजकर 42 मिनिट से प्रारंभ होगी। जो दूसरे दिन यानी 26 नवम्बर में सुबह 5 बजकर 10 मिनिट तक रहेगी। फिर 26 नवम्बर में द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी जो 27 नवंबर में सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी ने विष्णु जी गुस्से में आकर शाप दे दिया था जिसके चलते वो पत्थर बन गए थे। इस शाप से मुक्त होने के लिए विष्णु जी ने शालिग्राम का अवतार लिया। इसके बाद उन्होंने माता तुलसी से विवाह किया। ऐसा कहा जाता है कि मां लक्ष्मी का अवतार माता तुलसी हैं। कई जगहों पर द्वादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है।
पूजन विधि
तुलसी विवाह के लिए तुलसी के पौधे के चारों ओर मंडप बनाना होगा। फिर तुलसी के पौधे को एक लाल चुनरी अर्पित करें। साथ ही सभी श्रृंगार की चीजें भी अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी और शालिग्राम भगवान की पूजा करें। शालिग्राम भगवान की मूर्ति का सिंहासन हाथ लें। फिर इनकी सात परिक्रमा तुलसी जी के साथ कराएं। आरती करें और विवाह के मंगलगीत अवश्य गाएं।


