मानसून में भारत के EV नेटवर्क को सुरक्षित रखने के 5 आसान उपाय: छोटे शहरों के चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन ऑपरेटरों के लिए जरूरी सुझाव

नई दिल्ली। जैसे-जैसे भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वैसे ही बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर देश के परिवहन तंत्र की रीढ़ बनते जा रहे हैं—खासकर दोपहिया और तिपहिया ईवी वाहनों के लिए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहन खासकर ई-रिक्शा, शहरी परिवहन में क्रांति लाने के साथ-साथ लाखों लोगों के लिए रोज़गार का साधन बन रहे हैं।

लेकिन मानसून का मौसम इन चार्जिंग नेटवर्क्स के लिए कई तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियां भी लेकर आता है—जैसे पानी भरना, बिजली का रिसाव, उपकरणों में खराबी और सेवा में व्यवधान। देश के कई हिस्सों में 300 से 650 मिमी तक बारिश होती है, ऐसे में छोटे शहरों में काम कर रहे EV स्टेशन ऑपरेटरों को पहले से तैयारी करनी होगी।

भारत का सबसे बड़ा बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क Battery Smart ने मानसून के दौरान स्टेशन सुरक्षा के लिए जरूरी SOPs (मानक संचालन प्रक्रिया) साझा की हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए टियर 2 और 3 शहरों के EV स्टेशन ऑपरेटर नीचे दिए गए 5 आसान तरीकों को अपनाकर अपने चार्जिंग और स्वैपिंग नेटवर्क को सुरक्षित बना सकते हैं:

1. बारिश शुरू होने से पहले स्टेशन की जांच करें
ढीले वायरिंग कनेक्शन, खुले तार, और DB बॉक्स की वाटरप्रूफिंग की जांच करें।

छत की नालियों और ड्रेनेज को साफ रखें ताकि पानी का जमाव न हो।

किसी भी लीकेज या बिजली रिसाव को समय रहते सुधारें।

2. तेज़ बारिश के दौरान बैटरी और उपकरणों को सुरक्षित रखें
स्टेशन में एक सूखा और सुरक्षित स्थान तय करें जहां ज़रूरत पड़ने पर बैटरी रखी जा सके।

चार्जर और अन्य उपकरणों को ज़मीन से ऊंचा रखें।

बारिश के समय स्टेशन के शटर बंद रखें और बाढ़ संभावित इलाकों में प्लेटफॉर्म को कम से कम 6 इंच ऊंचा बनाएं।

जलभराव की स्थिति में तुरंत मुख्य पावर सप्लाई बंद करें।

3. बिजली से जुड़ी जोखिमों की समय पर पहचान करें
ई-रिक्शा की बैटरियों को लोहे की प्लेट पर फिट करें और बारिश में ढककर ले जाएं।

सभी वायरिंग, कनेक्टर और स्विचगियर की नियमित जांच करें।

सीलन या रिसाव की स्थिति में बिजली सप्लाई तुरंत बंद करें और मरम्मत कराएं।

सही अर्थिंग सुनिश्चित करें।

4. स्टाफ को प्रशिक्षित और तैयार रखें
सभी साइट्स पर रबर ग्लव्स, वाटरप्रूफ जूते और इंसुलेटेड मैट मौजूद हों।

सुरक्षा गाइड स्थानीय भाषा में स्पष्ट रूप से लगाई जाए।

छोटे शहरों में कार्यरत सेमी-स्किल्ड स्टाफ के लिए मानसून से जुड़ी रेगुलर ट्रेनिंग ज़रूरी है।

5. स्टेशन के अंदर और बाहर पानी के बहाव का प्रबंधन करें
दरवाजों पर रेन गार्ड या ढलान वाली पट्टियां लगाएं।

तारों और पंखों के आसपास की जगहें बंद करें ताकि पानी न घुसे।

स्टेशन के बाहर जलभराव या गड्ढों को भरवाएं।

ज़रूरत पड़ने पर रेत की बोरियों या ईंटों से पानी की दिशा मोड़ें।

ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में संचालन अस्थायी रूप से रोकने की भी योजना रखें।

सही रणनीति और सुरक्षा उपायों के साथ, EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन मानसून जैसी कठिन परिस्थितियों में भी सुचारू रूप से चल सकते हैं। वाटरप्रूफिंग, स्टाफ ट्रेनिंग और नियमित उपकरण जांच जैसे कदम इस दिशा में कारगर साबित हो सकते हैं।

 

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