नई दिल्ली / टीम डिजिटल। हिन्दी भाषा अभियानी तरूण शर्मा ने हिन्दी काउंसिल का गठन किया है। इसमें कई देशों के प्रबुद्धजन जुड़े हैं। हिन्दी काउंसिल के गठन पर तरुण शर्मा ने कहा कि हमने उन लोगों को लेकर एक मंच बनाया है, जो भारत और भारतीयता से लबरेज हैं। समान विचारधाराओं के लोग जब एक मंच पर एक साथ विचार-विमर्श करेंगे, तो उस मंथन से हमेशा अमृत ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी काउंसिल में देश-विदेश से कई लोग जुड़े हैं और कई लोगों के संपर्क में हम हैं।
बता दें कि हिन्दी कांउसिल के गठन होते ही दो दर्जन से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। हिन्दी पत्रकारिता में दशकों तक अपना योगदान देने वाले निशिकांत ठाकुर, ओम प्रकाश वर्मा, हिन्दी के पुरोधा महेश चंद्र शर्मा, शिक्षाविद् अमरजीव लोचन, दुबई से समाजसेवी व उद्यमी गिरीश पंत, कंप्यूटर वैज्ञानिक डाॅ पद्मनाभ मिश्रा, सीए गौरव शर्मा जुड़े हैं। समाजसेवा, पत्रकारिता और काॅरपोरेट सेक्टर आदि में काम करने वाले लोगों की रूचि हिन्दी काउंसिल के प्रति देखने को मिली है। पूर्व नौकरशाह रविन्द्रनाथ झा, आॅटोमोबाइल सेक्टर में काम करने वाले शीतल धीर, पत्रकार आलोक कुमार, विशाल सहाय, समृद्धि भटनागर, अनंत अमित, दीप्ति अंगरीश, काॅरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले मनीष शर्मा, कृष्णा सक्सेना, पारुल बुधकर, शशि ओबैद, सचिन शुक्ला, दीपक साहू, मान सिंह, चंदन गोस्वामी, मनीष छावडा आदि लोग अब तक हिन्दी काउंसिल से जुड़े हैं।
एक सवाल के जवाब में द हिन्दी के प्रबंध संपादक और हिन्दी भाषा अभियानी तरुण शर्मा ने कहा कि जिनके हृदय में भारत बसता है, जो भारतीयता के रंग से सराबोर होना चाहते हैं, जिन्हें अपनी कला-संस्कृति, वैदिक सभ्यता से लेकर आधुनिक भारत पर गर्व है, और जो हिन्दी के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं, उनके लिए द हिन्दी काउंसिल है। हमारी मातृभाषा को वैश्विक स्तर पर सशक्त पहचान मिले, इसके लिए हमने द हिन्दी काउंसिल का गठन किया है।
हम, हिन्दी के साथ ही भारतीय भाषाओं की साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध करने के उद्देश्य से एकत्र हुए हैं। हमने राष्ट्रीय अखंडता, बहुलतावादी संस्कृति और साहित्य की सृजनशीलता को प्रोत्साहित करना अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया है। द हिन्दी काउंसिल एक अभियान चला रही है, हिंदी और मातृभाषा के लिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी काउंसिल तमाम उन लोगों से अपने साथ जुड़ने का आग्रह करता है, जो भारतीयता के रंग में रंगना चाहते हैं। जो हिन्दी की समृद्ध पंरपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं। जो भारतीय मूल्यों को समाज में फिर से प्रचारित-प्रसारित करना चाहते हैं।
द हिन्दी काउंसिल के अंतर्गत हम उन प्रबुद्ध लोगों को शामिल करना चाहते हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में पहचान बनाया है और भारत का नाम पूरी दुनिया में बरकरार रखा है। समाज के लिए आदर्श बने हैं। सामाजिक सरोकारों में सदा संलग्न रहे हैं। जो हमारी हर गतिविधि में हमारा साथ देने को प्रतिबद्ध हैं।

