नई दिल्ली। Success, असफलताओं के दूध का मथा हुआ मक्खन होती है। जिसके लिए दूध जमाकर सुबह की प्रतीक्षा का धैर्य आवश्यक होता है। धैर्यपूर्वक अपने मार्ग का निर्धारण कर उसकी बाधाओं को नष्ट करते रहें। जिस कार्य में बाधाएं न आएं, समझो कि वह महत्वपूर्ण ही नहीं है।
Success के लिए भी नियमों की कुछ सीढियां
जैसे मंदिर जाने के लिए कुछ सीढियां चढ़ना होता है। वैसे ही Success के लिए भी नियमों की कुछ सीढियां होती हैं। बस उन पर सावधानी से चढ़ते रहो। ध्यान रखना, वहां फिसलन बहुत है। जल का झरना भी ऊपर से नीचे को बहता है। गिरने के बहुत अवसर हैं। लेकिन सजग और सहज होकर अपने लक्ष्य का ध्यान रखने वाले सीढियां पार कर देव दर्शन कर आत्मिक सुख का आनंद लेते हैं।तु म्हें भी वही करना है। ध्यान रखना! यह सब शनै: शनैः ही होगा। इसलिए धैर्य रखकर बस चलते रहना।
Success Mantra, नीचे उतरना और ऊपर चढ़ना
इस समस्त ब्रह्मांड में सनातन के सिद्ध ऋषियों ने 14 भुवन कहे हैं। जिनमें 7 अधोगति देते हैं और 7 उच्च स्थान पर स्थापित करते हैं। अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, पाताल तथा रसातल…ये 7 पाताल कहे गए, जिनमें पतन होना स्वाभाविक हो सकता है। लेकिन उच्च स्थान को सुख का कारक माना गया, इसीलिए उसे स्वर्ग कहा गया। भू:, भूव:, स्व: मह:, जन:,तप: और सत्य का प्रभाव स्वर्गिक कहा गया है। सीढियां, जैसे ऊपर ले जाती हैं, वैसे ही नीचे भी लाती हैं, इसलिए नीचे उतरना और ऊपर चढ़ना। जीवन की सामान्य क्रिया है। जो ऊपर चढ़ता है, उसे नीचे आना होता है और जो नीचे है, उसे ऊपर चढ़ने के मार्ग उपलब्ध होता है।यह प्राकृतिक चक्र क्रम है। जो निरन्तर चलता है। इसी कारण जन्म होता है, शिशु, बालक, किशोर, युवा, प्रौढ़, वृद्ध और फिर मृत्यु का क्रम है।
सबके क्रम प्रकृति निर्धारित करती है
सबके क्रम प्रकृति निर्धारित करती है। वही प्रकृति शरीर में विवेक जाग्रत करके आपको सफल भी करती है। इसलिए सफलता की सीढियां भी संख्या क्रम में हैं। सहजता, सजगता, लक्ष्ययुक्त मनोदशा, कर्मठ चित्तवृत्ति, तरंगित बुद्धिमत्ता, विवेकशीलता और श्रमशीलता वे 7 सीढियां हैं जो आपको स्वर्ग का आनंद दिला सकती हैं और सफलता का स्वर्गिक सुख प्राप्त करा सकती हैं।
लेकिन समय का सम्मान न करना, अनुशासित न होना, लक्ष्यहीनता, पराजय का भाव होना, आज का काम कल पर छोड़ना और आलस्य से भर जाना। ये 7 सीढियां केवल नीचे की ओर लाती हैं।ये सब असफलता की संतान हैं, इनका मित्र सदा पाताल गति को प्राप्त कर अपना जीवन व्यर्थ कर लेता है।
Success Mantra, सफलता प्राप्ति के लिए लक्ष्य निर्धारण
सफलता चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सफलता के इन सूत्रों का ध्यान रखना चाहिए। सफलता प्राप्ति के लिए लक्ष्य निर्धारण प्रथम आवश्यकता है। यदि लक्ष्य ही न होगा तो सफलता की कोई अवस्था ही न बन पाएगी। इसलिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करें। लक्ष्य निर्धारित होने के बाद अपने व्यवस्थित प्रारम्भ होने का क्रम होना चाहिए…ठीक शुरुआत आधा मार्ग निष्कंटक कर देती है। इसलिए उचित दशा और दिशा का निर्धारण करके अपने लक्ष्य को केंद्रित होकर ही व्यावहारिक शुरुआत करें।अपने कार्य में हड़बड़ाहट नहीं रखें। धीरे धीरे अभ्यासक्रम बढ़ाएं। एक दम से सब करने का अधैर्य न करें। क्योंकि कोई भी कार्य बहुत छोटे स्तर से प्रारम्भ होता है और धीरे धीरे आकार लेता है।
पेड़ आसमान से नहीं गिरते…
प्रकृति बीज के रोपण से महान वृक्षों को जन्म देती है। पेड़ आसमान से नहीं गिरते…वे धरती के सीने में गहराई तक अपनी जड़ें जमा लेते हैं, इसलिए बड़ी से बड़ी ताकतें उनसे टकराकर नष्ट हो जाती हैं और वे उन्नति पाते हुए खड़े रहते हैं। इसलिए आवश्यक है कि जिस कार्य को करें, उसकी गहराई तक जाकर स्वयं को स्थापित करने के क्रम से शुरुआत करें। फिर उस बीज को अंकुरित होने दें। बीजांकुरण ही आपकी सफलताओं का प्रारम्भ है।बीज आपके लक्ष्य जैसा है। आपके मन में बीज बोया गया कि मुझे तो वह प्राप्त करना है। वह जो भी है, बीज है। उसकी सिध्दि के लिए उसे आवश्यक जमीन उपलब्ध कराना, समय समय पर उसकी देखभाल करने से जैसे बीज पौधे का और फिर पौधा वृक्ष का आकार लेता है, यह उसी तरह का क्रम है।
बहुत सी धाराएं मिल जाती हैं
कोई नदी जहां से शुरू होती है, वह महीन सी धारा होती है, लेकिन पहाड़ से नीचे उतरते उतरते, उसने बहुत सी धाराएं मिल जाती हैं और वह एक बड़ी नदी का रूप धरकर मैदानों तक पहुंचती है। ठीक उसी प्रकार शुरुआत छोटे छोटे दैनंदिन उपालम्भों से करें…धीरे धीरे विचारक्रम पुष्ट होता चला जाएगा और स्मृतिखण्ड को प्राप्त हो जाएगा…छोटे छोटे लक्ष्य एकत्रित होकर एक बड़ा समूह हो जाता है और मनुष्य सूर्य सा दमक उठता है।
जीवनदायी सिद्धांतों का स्मरण
मौन रहकर, एकांत सेवन करते हुए, जीवनदायी सिद्धांतों का स्मरण रखते हुए, बाधाओं पर विजय पाते हुए, मानसिक दुर्बलताओं को नष्ट करते हुए, सहज होकर, दूसरों के दोषों से स्वयं को बचाते हुए सफलता की 7 सीढ़ियों पर चढे। सफलता आपकी चारणानुरागी होगी और आपका व्यक्तित्व चमक उठेगा।
लेखक – आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री, श्री पीताम्बरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ के अधिष्ठाता हैं