Priorities Is Success Mantra, जीवन में प्राथमिकताओं का निर्धारण जरूरी है

नई दिल्ली। Priorities है खुशी मंत्रा। सच है जब Priorities नहीं होंगी तब पता चलेगा कि सब कैसे गड़ब-गड़ब होता है। जनाब इसके बिना काम की ऐसी की तैसी तो होगी और अपने भी बहुत दूर हो सकते हैं।

Priorities से जीवन को मिलती है दिशा

 

जीवन आपकी प्राथमिकताओं से निर्देशित होता है। आपके जीवन की गुणवत्ता इस बात से निश्चित होगी कि आप जीवन में किस चीज को प्राथमिकता देते हैं। अक्सर लोग इस शिकायत के साथ मेरे पास आते हैं कि दूसरों का जीवन उनके जीवन से ज्यादा खुशहाली क्यों है? दूसरों के पास उनसे ज्यादा खुशियां क्यों है? ध्यान दे तो व्यक्ति इस बात से दुखी कम होता है कि उसके पास खुशहाली का अभाव है, बल्कि वो दुखी इसलिए अधिक है क्योंकि उसकी तुलना में दूसरे अधिक प्रसन्न है।

 

तुलना को नकारें

 

तुलना करना गलत है पर यहाँ यह प्रश्न अवश्य पैदा होता है कि जीवन की गुणवत्ता में इतना अंतर क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर बेहद सरल और सहज है। हर व्यक्ति जाने या अनजाने अपनी प्राथमिकताओं को निश्चित करता है। कुछ लोगों की प्राथमिकताएं उनको खुशहाली की तरफ ले जाती है तो कुछ को उनकी चुनी प्राथमिकताएं दुख से भरें जीवन की तरफ ले जाती है।

Setting priorities for personal happiness and professional success is a must.

Priorities में होश हो, जोश हो

जीवन में प्राथमिकताओं का चुनाव होशपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। अक्सर लोग पूछते हैं कि प्राथमिकताओं का निर्धारण करते समय दिल की सुने या दिमाग की। मेरा उत्तर है कि प्राथमिकताओं का निर्धारण श्विवेकश् के आधार पर होना चाहिए। अब आप पूछ सकते हैं कि आखिर किसी को कैसे पता चलेगा कि उसने प्राथमिकताओं का निर्धारण विवेक के आधार पर किया है ? उत्तर सीधा और स्पष्ट है। जब आप लिए गए निर्णय के परिणामों के बारे में सोच कर कुछ तय करते हैं तब यह माना जाता है कि आपके द्वारा चुना गया विचार या निर्धारित की गई प्राथमिकता विवेकपूर्ण है।

 

जीवन में हो बैलेंस

उदाहरण के लिए आपने धन को अपने जीवन की प्राथमिकता बना दिया और इस इच्छा को निर्बाध छोड़ दिया तो यकीन मानिए यह आपको एकदिन दुख जरूर देगी क्योंकि आपने प्राथमिकता को तय करते समय विवेक का उपयोग नहीं किया। आपको अपनी इच्छा के चारो तरफ एक सीमारेखा खींचनी पड़ेगी क्योंकि आपको उतना ही मांगना चाहिए जितना आप सम्भाल सकें। मैंने अक्सर देखा है कि लोग जीवन में किसी एक पक्ष को आवश्यकता से अधिक महत्व देकर जीवन में बवाल पैदा कर देते हैं। प्राथमिकताओं को निर्धारित करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए कि आपकी कोई भी प्राथमिकता इतनी प्रबल न हो कि जीवन के संतुलन को बिगाड़ दे क्योंकि जीवन का वास्तविक सौंदर्य संतुलन में है। अपनी प्राथमिकताओं को समय समय पर रिव्यु करने की आदत विकसित करनी चाहिए ताकि जीवन को असंतुलित होने से बचाया जा सकें।


डॉ. दीपमाला, काउंसलर, हीलर, पब्लिक स्पीकर

Leave a Reply

Your email address will not be published.