2030 तक भारत $531 मिलियन डॉलर से ज्यादा राजस्व प्राप्त करेगा

नई दिल्ली। ईएसजी, सस्टेनिबिलिटी और इम्पैक्ट मेजरमेंट और मैनेजमेंट बाजार पिछले 2 दशकों में काफी विकसित हुआ है क्योंकि इस दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने एक ऐसे युग की शुरुआत की है जिसे अक्सर कैपिटलिज्म (पूंजीवाद) 2.0, इम्पैक्ट इकोनॉमी, इम्पैक्ट कैपिटलिज्म, स्टेकहोल्डर कैपिटलिज्म या जागरूक कैपिटलिज्म भी कहा जाता है। यह नया और विकसित सिस्टेमेटिक पैराडिग्म वित्तीय लक्ष्यों के साथ-साथ ईएसजी सस्टेनिबिलिटी और इम्पैक्ट गोल्स (प्रभाव लक्ष्यों), मूल्यांकन और रिपोर्टिंग ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) को आवश्यक बनाता है। भारत में 2007 में एस्पायर सर्कल और 2020 में एस्पायर इम्पैक्ट की स्थापना हुई। दोनों संगठन ने अपने इम्पैक्ट फ्यूचर प्रोजेक्ट के तहत यह माना है कि आईएमएम विश्व स्तर पर 2010 में $2 बिलियन से बढ़कर 2020 में $7.7 बिलियन हो गया है, इसमें 10 सालों में 4 गुना वृद्धि हुई है। अमित भाटिया और हरप्रीत कौर घई द्वारा लिखित और एस्पायर सर्कल तथा एस्पायर इम्पैक्ट द्वारा जारी किये गए द साइज ऑफ ESG, सस्टेनेबिलिटी एंड इम्पैक्ट मेजरमेंट एंड मैनेजमेंट मार्केट शीर्षक से एक व्यापक और अच्छी तरह से रिसर्च किए गए मार्केट साइजिंग स्टडी (बाजार-आकार के अध्ययन) में उपरोक्त IIM बाजार की वृद्धि का पता चला। गौरतलब है कि एस्पायर सर्कल और एस्पायर इम्पैक्ट भारत में इम्पैक्ट लीडरशिप & इकोसिस्टम डेवलपमेंट में अग्रणी संस्था हैं।
इससे पहले 2020 में अमित भाटिया द्वारा स्थापित एस्पायर सर्कल और एस्पायर इम्पैक्ट ने स्वतंत्र, स्टैण्डर्ड बेस्ड 4P (प्रोडक्ट, पीपल, प्लेनेट और पालिसी) 150 से ज्यादा KPI वाले फ्रेमवर्क का उपयोग करके कार्पोरेशन और नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं के लिए भारत और ग्लोबल साउथ के इम्पैक्ट स्टैण्डर्ड का पहला सेट लॉन्च किया था। भारत सरकार ने 2021-22 में बिजनेस रिस्पोस्न्सिबिलिटी रिपोर्टिंग (BRR) को बिजनेस रिस्पोस्न्सिबिलिटी & सस्टेंबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) में मोडीफाई किया, जोकि शुरुआत में वोलंटरी था, लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 से टॉप 1000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। एस्पायर इम्पैक्ट अपनी ESG इम्पैक्ट रेटिंग्स और ESG रिस्क रेटिंग्स को वित्त वर्ष 2024 के दौरान लॉन्च करेगा।
एस्पायर इम्पैक्ट के सीईओ और फाउंडर श्री अमित भाटिया* ने इस बारे में कहा, “ग्लोबल IMM बाजार पर इस मार्केट साइजिंग के दुनिया के पहले अध्ययन को जारी करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है। यह रिपोर्ट $7.7 बिलियन के IMM को कवर करती है, जिसमे ESG, सस्टेनिबिलिटी और इम्पैक्ट इंटरमेडिएरिज को एकजुट किया है; इसमें IMM इंडस्ट्री को पांच अलग-अलग सब-सेक्टर में विभाजित किया गया है; और $100 बिलियन से ज्यादा वैल्यू के 80 से ज्यादा M&A डील्स का विश्लेषण करके इम्मीनेन्ट कंसोलिडेशन (आसन्न समेकन) की भविष्यवाणी की है। IMM भारत और अन्य उभरते बाजारों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, समावेशी विकास को बढ़ावा दे सकता है, SDGs को प्राप्त कर सकता है, और उसका 2070 का शुद्ध-शून्य लक्ष्य हो सकता है।”
सर रोनाल्ड कोहेन (प्रेजिडेंट और को-फाउंडर- GSG) ने इस रिसर्च की भूमिका लिखी और क्लिफ प्रायर (CEO-GSG), फ्रैन सीगल (CEO-US इंपैक्ट इन्वेस्टिंग एलायंस), प्रोफेसर रोज़मेरी एडिस, मेलबर्न यूनिवर्सिटी, नवनीत मुनोट (MD और CEO एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट), विशालाक्षी चंद्रमौली, मैनेजिंग पार्टनर- टाटा कैपिटल हेल्थकेयर फंड, और अनुराग प्रताप, वीपी और सीएसआर लीडर- कैपजेमिनी- आईएफपी के प्रायोजक सभी ने रिसर्च प्रकाशन में संदेश प्रकाशित किए। नवनीत मुनोट ने इस बारे में कहा, “पृथ्वी की देखभाल करने और इस पर दूरगामी सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए अब पहल करने की आवश्यकता एक तत्काल आवश्यकता बन गयी है। यह इम्पैक्ट फ्यूचर प्रोजेक्ट रिपोर्ट सस्टेनेबिलिटी मूवमेंट के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर कोई व्यक्ति ESG, सस्टेनेबिलिटी और इम्पैक्ट का व्यापक अवलोकन करना चाहता है तो यह रिपोर्ट उसके लिए मूल्यवान संसाधन है।”

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