खुद ही अपने घर में फंस गए सियासत के माहिर खिलाड़ी शरद पवार

 

मुंबई/नई दिल्ली। शरद पवार, वह नाम जो बीते कुछ दशकों सियासत का संकटमोचन माना जाता रहा है। लेकिन, अपने ही घर को सहेजने में फिलहाल वो नाकाम दिख रहे हैं। उनके भतीजे अजीत पवार और कई विश्वस्त ने अलग रास्ता अख्तियार किया है, तो शरद पवार अपनी सांसद बेटी सुप्रिया सुले और कुछ नेताओं के साथ अभी भी सियासी अखाड़े में ताल ठोंक रहे हैं। राकांपा के दोनों गुट यानी शरद पवार और अजीत पवार के लोगों की अलग अलग बैठक हुई और उसमें अपने दावों को लेकर बातें कहीं गई।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार गुट की ओर विधायकों और पदाधिकारियों के लिए शपथ पत्र तैयार किया जा रहा है।वहीं, अजीत पवार की शरद पवार के लिए सेवानिवृत्ति वाली टिप्पणी पर अनिल देशमुख ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि 82 साल का शेर अभी भी जिंदा है। वे आज भी एक शेर की तरह लड़ रहे हैं।

सभी को चौंकाते हुए अजित पवार ने दावा किया है कि 30 जून को कार्यकारिणी की बैठक हुई थी, एनसीपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शरद पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से शरद पवार को हटाने के संबंध में प्रस्ताव पारित हुआ था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अध्यक्ष चुन लिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रफुल्ल पटेल ने यह बैठक बुलाई थी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों ने आज शक्ति प्रदर्शन किया। एनसीपी प्रमुख अजित पवार और शरद पवार की ओर से विधायकों को बैठक में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया गया। हालांकि, बैठक की बात करें तो इसमें राकांपा का संख्याबल अजित पवार के साथ दिखा है। पार्टी के 53 में से 35 विधायक उनके साथ बैठक के लिए पहुंचे हैं। ऐसे में शरद पवार के लिए आने वाले समय में राकांपा के अस्तित्व को अपने नेतृत्व में रखने की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है.

अजीत पवार की शरद पवार के लिए “सेवानिवृत्ति” वाली टिप्पणी पर अनिल देशमुख ने कहा कि 82 साल का शेर अभी भी जिंदा है। वे आज भी एक शेर की तरह लड़ रहे हैं।

शरद पवार ने कहा कि राजनीति में आज संवाद खत्म हो गया है। राजनीति में अगर कुछ गलत हो रहा है तो नेताओं को वह बात सुननी चाहिए। संवाद रखना होता है। संवाद न हो तो देश में अस्वस्थता आती है। कुछ अनुचित हो रहा है तो उसे दुरुस्त करना होता है। संकट बड़ा है, हमें बहुत आगे जाना है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि राकांपा ने 70 हजार करोड़ का घोटाला किया। यह आरोप बेबुनियाद है। एक तरफ आप हमारी पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाते हैं, फिर दो दिन पहले आपने हमारी ही पार्टी के नेताओं को महाराष्ट्र की सरकार में मंत्री क्यों बनाया?

NCP (शरद पवार गुट) के नेता मेहबूब शेख का कहना है कि विधायकों को एक जगह रुकवाने की जरूरत क्यों पड़ी? शरद पवार साहब को मानने वाला हर कार्यकर्ता आज यहां खुद से आए हैं। उन्होंने (अजीत पवार) कहा था कि उनके पास 40 से अधिक विधायक है। मेरी अपील हैं (अजीत पवार से) की वे अपने विधायकों की फोटो हमें दिखाएं। अगर उनके पास विधायक हैं तो वे कहां हैं? हमारे कुल 53 विधायक हैं। जिन्होंने पवार साहब को धोखा दिया है उनको सबक सिखाया जाएगा।

रोहित पवार, एनसीपी – शरद पवार गुट ने कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ता भी नाराज हैं क्योंकि जिसके खिलाफ वो अभी तक लड़ते आए आज उन्हें ही सत्ता को और मजबूत करने के लिए अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है। हमारे साइ़ड के NCP के कार्यकर्ता भी बीजेपी से नाराज हैं। तो सभी लोग और कार्यकर्ता एकजूट होकर एक अच्छे विचार को ताकत देंगे और आने वाले चुनाव में सत्ता में जो हैं उन्हें आप जाता हुआ देखेंगे। जब हमने 2019 में राजनीति में प्रवेश किया और विधानसभा चुनाव लड़ा, तो पवार साहब 82 वर्ष के थे। हममें से अधिकांश लोग उनके कारण चुनकर आए थे। मुझे नहीं लगता कि उम्र ज्यादा मायने रखती है। जब शरद पवार लोगों के बीच जाएंगे तो पता चल जाएगा कि लोग किसके साथ हैं.

 

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