मलेशियन रबर काउंसिल ने पारदर्शी कारोबारी गतिविधियों को लेकर प्रतिबद्धता जताई

नई दिल्ली। मलेशिया के प्लांटेशन एंड कमोडिटीज (केपीके) मंत्रालय के अधीन सरकारी एजेंसी मलेशियन रबर काउंसिल (एमआरसी) मलेशियाई सरकार के कठोर कानूनी एवं नैतिक मानकों के अनुरूप परिचालन करता है। काउंसिल का कहना है कि हाल ही में इंडियन रबर ग्लव्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईआरजीएमए) का यह आरोप सही नहीं है कि भारतीय आयातकों को गलत तरीके से इंसेंटिव दिया गया है। एमआरसी अपने परिचालन में पारदर्शिता का पालन करता है और हम सभी कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। एमआरसी के सीईओ मुहम्मद एजाज मुहम्मद रेडजुआन ने कहा, ‘वैश्विक हितधारकों की अखंडता एवं भरोसे को एमआरसी ने हमेशा महत्वपूर्ण माना है। हम नैतिक दिशानिर्देशों को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हमारे कारोबारी परिचालन में पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी हो। हमारा लक्ष्य मलेशिया के रबर उद्योग के विकास को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं नियमनों का पालन सुनिश्चित करना है।’

क्लोरिनेटेड ग्लव्स को लेकर सभी तरह की चिंताओं को दूर करने के लिए एमआरसी लगातार भारतीय अधिकारियों एवं हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस दिशा में एमआरसी ने हाल ही में भारत में प्रमुख नियामकों के साथ वर्किंग विजिट और मीटिंग का आयोजन किया था। इसमें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) समेत अन्य नियामक शामिल थे। इन बैठकों में भारत के बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 और मेडिकल डिवाइस रूल्स 2017 के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। मलेशिया के ग्लव मैन्यूफैक्चरर्स यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि सभी निर्यात भारत सरकार के मानकों के अनुरूप हों।

 

 

आईआरजीएमए ने आरोप लगाया है कि एमआरसी या मलेशियाई मैन्यूफैक्चरर्स ने सितंबर, 2024 में कुआला लंपुर में आयोजित इंटरनेशनल रबर ग्लव्स कॉन्फ्रेंस एंड एक्जिबिशन (आईआरजीसीई) में हिस्सा लेने के लिए भारतीय आयातकों को फ्री एयर टिकट, होटल में रहने की व्यवस्था और दैनिक भत्ते जैसे कई तरह के इंसेंटिव के रूप में रिश्वत दी। इन आरोपों का खंडन करते हुए एमआरसी ने कहा कि अपने ग्लोबल सोर्सिंग मिशन (जीएसएम) प्रोग्राम के तहत हमने केवल ऐसे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए होटल में रहने की व्यवस्था की थी, जिन्होंने अपना टिकट स्वयं खरीदा था। यह नीति कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाले सभी सदस्य देशों के मामले में अपनाई गई थी, न कि केवल भारत के लिए। आईआरजीसीई के साथ मिलकर आयोजित जीएसएम प्रोग्राम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं मलेशियाई मैन्यूफैक्चरर्स के बीच कारोबारी अवसरों को बढ़ाना है, जिससे पारदर्शी एवं नैतिक तरीके से वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा मिले। एमआरसी पर लगाए गए किसी भी तरह के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। इसमें हिस्सा लेना स्वैच्छिक था और भारत या किसी भी देश से आए लोगों को कोई नकद लाभ नहीं दिया गया था।

 

 

उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल ग्लव्स के मामले में मलेशिया की भरोसेमंद निर्यातक के रूप में पहचान है और एमआरसी इस मानक को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मलेशिया के ग्लव मैन्यूफैक्चरर्स सभी अंतरराष्ट्रीय एवं स्थानीय नियमनों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम करते हैं। इन मसलों को हल करने के लिए एमआरसी साझा प्रयासों को समर्थन देगा और लगातार भारतीय अधिकारियों के संपर्क में रहेगा। हमें भरोसा है कि गठजोड़ एवं बातचीत से मलेशिया एवं भारत के बीच कारोबारी रिश्ते पारदर्शी, नैतिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बनेंगे।

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