मुंबई। सोनी सब के लोकप्रिय ऐतिहासिक और पौराणिक धारावाहिकों तेनाली रामा और वीर हनुमान के कलाकारों ने साझा किया कि पारंपरिक भारतीय परिधान उनके अभिनय को गहराई देने में कैसे अहम भूमिका निभाते हैं। इन परिधानों के ज़रिए न केवल किरदार में उतरना आसान होता है, बल्कि वे कहानी को और भी प्रभावशाली बनाते हैं। तेनाली रामा में तेनाली की भूमिका निभा रहे कृष्णा भारद्वाज ने कहा, “धोती, तिलक और पारंपरिक पहनावा मुझे किरदार की आत्मा से जोड़ता है। यह सिर्फ वेशभूषा नहीं, अभिनय में डूबने का जरिया बन जाता है।” कोतवाल की भूमिका निभा रहे निखिल आर्य ने कहा, “मेरी भारी पोशाक चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह किरदार को असली रूप देती है। इसमें अभिनय अधिक सहज और प्रभावशाली हो जाता है।”
वीर हनुमान में महाराज कृष्णदेव राय बने आदित्य रेडिज ने कहा कि राजसी परिधान पहनते ही भीतर एक बदलाव महसूस होता है — मानो वे सचमुच एक राजा बन जाते हों। कैकेयी का किरदार निभा रहीं हुनर हाली ने बताया कि पारंपरिक साड़ी और आभूषण पहनकर अभिनय करना शुरू में कठिन था, लेकिन अब वे इन पोशाकों को किरदार की गरिमा का प्रतीक मानती हैं। वहीं केसरी की भूमिका निभा रहे आरव चौधरी ने कहा, “मैं पोशाक पहनते ही खुद को किरदार में महसूस करने लगता हूं। ये वस्त्र मेरे अभिनय का अभिन्न हिस्सा हैं।”
इन अनुभवों से साफ है कि पारंपरिक परिधान कलाकारों के लिए सिर्फ दृश्यात्मक साधन नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव का हिस्सा बन जाते हैं, जो उनकी प्रस्तुति को गहराई और सच्चाई से भर देते हैं।

