नई दिल्ली। नॉर्थ दिल्ली में लगभग 90 लाख की आबादी के लिए बिजली वितरण करने वाली अग्रणी पावर यूटिलिटी टाटा पावर-डीडीएल अपने परिचालन इलाके में कांवड़ यात्रा के निर्धारित मार्गों पर चौबीसों घंटे पब्लिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के समुचित उपाय किए हैं।
हर साल कांवड़ यात्रा के लिए लाखों श्रद्धालु दूरदराज के इलाकों से आते हैं, और इनकी भारी संख्या के मद्देनज़र, खासतौर से मानसून के मौसम में बिजली संबंधी दुर्घटनाओं के खतरे भी बढ़ जाते हैं।
कांवड़ यात्रा 2025 के दौरान, ऐसी किसी भी दुर्घटना की आशंका से बचने के लिए, टाटा पावर-डीडीएल की ज़ोनल टीमों को संबंधित इलाकों में सभी कांवड़ शिविरों की पहचान करने और इनमें सुरक्षा के मानकों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत्, यात्रा मार्गों पर बिजली के सभी खंभों, ट्रांसफार्मरों आदि से रिसाव तथा सबस्टेशनों की जांच शामिल हैं।
टीमों को अधिक ट्रैफिक वाले इलाकों या अस्थायी शिविरों को प्राथमिकता देने, सभी केबल ज्वॉइंट्स तथा/या क्षतिग्रस्त जम्पर आदि की रिपेयर करने के साथ-साथ सभी फीडर और सर्विस पिलर को ढकने और सही तरीके से उन्हें बंद करने एवं ताला लगाकर रखने के लिए भी कहा गया है। अर्थिंग रोकने तथा सभी स्ट्रीटलाइटों के ठीक से काम करने पर भी ध्यान देने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा, खतरों के बारे में लोगों को चेतावनी देने के लिए उपयुक्त स्थानों पर साइनबोर्ड लगाने, और फील्ड टीमों के लिए सभी पीपीई एवं टूल्स का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।
शिविरों में बिजली से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, टाटा पावर-डीडीएल ने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय किए हैंः
• सभी कांवड़ शिविरों में समुचित रेटिंग वाले एमसीबी और ईएलसीबी इंस्टॉल किए गए हैं।
• अच्छी क्वालिटी और समुचित रेटिंग वाली इंसुलेटेड वायर (कनेक्टेड लोड के अनुसार) का इस्तेमाल किया गया है ताकि कोई ओपन ज्वॉइंट्स न हो।
• किसी खतरनाक इंस्टॉलेशन या ओपन पैनल्स यदि कवर क्षतिग्रस्त हैं या लॉकिंग संभव नहीं हैं, की फेन्सिंग की गई।
• मानसून सीज़न के मद्देनज़र, उन निचले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा जहां पानी जमाव की समस्या हो।
टाटा पावर-डीडीएल ने आम जनता और तीर्थयात्रियों से भी इस संबंध में सहयोग करने का अनुरोध किया है ताकि कांवड़ियों के लिए सुरक्षित माहौल और सुरक्षा के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित किए जा सकें।

