उम्मीद जगाती एक किताब: वो सुबह कभी तो आएगी

कुमार पंकज

हरियाणा कहने को तो देश का छोटा राज्य है। लेकिन इस राज्य के अपने कई किस्से भी हैं जिसे चंद शब्दों में ही सीमित कर दिया गया। आज हरियाणा को केवल हम औद्योगिक और बहुराष्ट्रीय कं​पनियों के मुख्यालय या उनके केंद्रों के तौर पर देखते हैं। लेकिन इस हरियाणा का एक पहलू और भी है जो कि यहां के लोगों के अस्मिता के मुद्दे, जमीनी स्तर के आंदोलन और वैकल्पिक प्रयास के तौर दिखाई पड़ते हैं।
कामगार प्रकाशन से प्रकाशित तरुण कान्ति बोस की पुस्तक ‘वो सुबह कभी तो आयेगी’ हरियाणा राज्य के हर पहलुओं को उजागर करती है। तरुण बोस एक बहुआयामी व्यक्तित्व के सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और लेखक है साथ ही जमीनी मुद्दों पर उनकी पकड़ है। पुस्तक को पढ़कर यह प्रतीत हो रहा है कि लेखक ने पूरी बारीकी के साथ विषय का अध्ययन किया है और उसमें से निकले तथ्य को पुस्तक का हिस्सा बनाया है। पुस्तक का सबसे रोचक तथ्य प्रथम स्वाधीनता संग्राम और हरियाणा के योद्धा हैं। जिस पर लेखक ने पूरा एक अध्याय लिखा है। लेखक के शब्दों में, अंबाला में सिपाहियों का विद्रोह भले ही असफल रहा लेकिन हरियाणा की जनता को उद्वेलित कर दिया। 1857 के विद्रोह की लपटें हरियाणा के जिलों—जिलों में फैल गई थी। जिसका जिक्र इस पुस्तक में विस्तार से किया गया है।
पुस्तक की प्रस्तावना में वीरेन लोबो ने लिखा है, ‘अध्ययनकर्ता तरुण बोस की चार केस स्टडीज यह दर्शाती है कि जब जन संघर्ष का गंभीर और प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट नेतृत्व मौजूद होता है, तो जनता में एक नया उद्देश्य और प्रेरणा विकसित की जा सकती है। हालांकि हर संगठन की प्राथमिकताएं और नेतृत्व की क्षमता और विचारधारा पर निर्भर करती है।’

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक में लेखक ने हरियाणा की भौगोलिक और जनसांख्यिकी विशेषताओं के बारे में तो बताया ही है साथ ही दलितों दमन, दुल्हन तस्करी और वैवाहिक विसंगतियां, फरीदाबाद का क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा, मजदूरों द्वारा मजदूरों के लिए मजदूरों का अस्पताल, जन संघर्ष मंच का राम रहीम के विरुद्ध कठिन संघर्ष जैसे अध्यायों के माध्यम से राज्य की विसंगतियों को भी उजागर किया है। विकास के साथ जो विसंगतियां है उसी को इंगित करते हुए लेखक ने यह बताने का प्रयास किया है कि ‘वो सुबह तो आएगी’। मूल रुप से पुस्तक अंग्रेजी में​ लिखी गई है जिसका अनुवाद एवं संपादन इंंद्र चन्द रजवार ने किया है। कामगार प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक का मूल्य 300 रुपये है।

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