मुंबई। भारत के छोटे किसान लगातार मौसम में अप्रत्याशित बदलाव, सूखे दिन, बढ़ते तापमान और तेज बारिश जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बायर के ‘फार्मर वॉयस सर्वे – इंडिया 2024’ में सामने आया कि 10 में से लगभग 9 किसान अपनी खेती पर जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों का अनुभव कर रहे हैं। 72 प्रतिशत किसानों ने उपज में कमी, 62 प्रतिशत ने फसल के नुकसान की आशंका जताई और आधे से अधिक ने हाल के वर्षों में सूखा, गर्म हवाओं या अत्यधिक वर्षा जैसी स्थितियों का सामना करने की बात कही।
इनसे निपटने के लिए किसान ऐसे उपाय चाहते हैं, जिनसे उनकी आजीविका सुरक्षित रहे। वित्तीय नुकसान से बचाने वाले बीमा जैसे विकल्प भविष्य की बड़ी जरूरतों में शामिल हैं। साथ ही डिजिटल एवं मौसम-आधारित समाधानों में भी किसानों को बड़ी संभावनाएं नजर आ रही हैं। 51 प्रतिशत किसानों ने बेहतर डिजिटल तकनीक तक पहुंच को अपने खेतों के लिए अधिक लाभदायक माना है। यह इंटीग्रेटेड समाधानों की बढ़ती मांग को दर्शाता है, जिनसे समय पर जानकारी और जोखिम सुरक्षा दोनों मिल सकें। हालांकि, बीमा को महत्वपूर्ण समाधान मानने के बावजूद बहुत से किसान मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। क्लेम प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता और पेआउट राशि को लेकर अस्पष्टता उनके बीच आम चिंताएं हैं। इसके अलावा, भुगतान अक्सर वास्तविक नुकसान की तुलना में बहुत कम होता है।
किसानों को केंद्र में रखकर तैयार हो रहा है डिजिटल युग का सशक्त कृषि मॉडल
इस स्थिति को समझते हुए बायर ने अपना डिजिटल समाधान ‘अलिवियो’ लॉन्च किया है। यह स्पेनिश शब्द है, जिसका अर्थ है ‘राहत’। इसमें नुकसान को कम करने की प्रक्रिया को नए सिरे से डिजाइन किया गया है। किसानों को ‘अलिवियो’ मोबाइल एप के माध्यम से इंटीग्रेटेड, वैल्यू-एडिंग सेवा के रूप में ऐसी जानकारियां प्रदान की जाती हैं, जिनके आधार पर वे तत्काल कदम उठा सकते हैं। पारंपरिक बीमा उत्पादों से अलग, इंश्योरेंस इकोसिस्टम एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के साथ मिलकर लॉन्च किए गए ‘अलिवियो’ में हाई-रेज़ॉल्यूशन सैटेलाइट डेटा और एडवांस्ड क्रॉप मॉडलिंग का प्रयोग किया जाता है। इससे फसल की वृद्धि अवस्था और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा मिलती है।
इसमें प्लॉट-बेस्ड एग्रोनॉमिक पैरामीटर के हिसाब से ‘एश्योरेंस बेनिफिट’ मिलता है, जिसे किसान नजदीकी बायर चैनल पार्टनर के पास जाकर तुरंत रिडीम कर सकते हैं। इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज और फसल सुरक्षा के लिए आवश्यक उत्पाद तुरंत मिल जाते हैं, जिससे फसल चक्र के दौरान आने वाली चुनौतियों से बचाव संभव होता है।
व्यावहारिक तौर पर देखा जाए तो ‘अलिवियो’ किसानों के वास्तविक नुकसान को पहचानते हुए उसके अनुरूप सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे फूल आने के समय लंबे सूखे की स्थिति या दाना बनने के समय अत्यधिक गर्मी। जगह और फसल की अवस्था के अनुसार कवरेज देते हुए ‘अलिवियो’ सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी वास्तविक चुनौतियों के आधार पर सार्थक मदद मिले।
अपने ऑपरेटिंग मॉडल में रिटेलर्स को जोड़ते हुए ‘अलिवियो’ ने उस भरोसेमंद नेटवर्क को शामिल किया है, जिस पर किसान इनपुट खरीदने और सुझावों के लिए निर्भर रहते हैं। यह नेटवर्क किसानों को नए डिजिटल उत्पाद अपनाने में सक्षम बनाता है और सुनिश्चित करता है कि उन्हें हर स्तर पर पूरा लाभ मिले।
यह पारंपरिक बीमा में पारदर्शिता की कमी को भी दूर करता है। इंस्टेंट, डेटा-आधारित ट्रिगर्स और स्पष्ट संचार के माध्यम से किसानों को यह पता होता है कि कब वे संरक्षित हैं और कब लाभ सक्रिय है। इससे सीजन के दौरान चिंता कम होती है।
डेटा से जानकारी और राहत तक: किसानों को पहले ही दिखती है वैल्यू
पहले चरण में कर्नाटक के दावणगेरे और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में वर्षा-आधारित मक्का फसल को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश की कमी से उपज प्रभावित होती है। ‘अलिवियो’ प्लॉट-आधारित परिस्थितियों पर नजर रखेगा और यदि फसल की वृद्धि अवस्था में मिट्टी में नमी की कमी पाई गई,
तो यह ‘एश्योरेंस बेनिफिट’ को ट्रिगर करेगा। ये लाभ किसान को उनके ‘अलिवियो’ मोबाइल एप में मिलेंगे और इन्हें नजदीकी चैनल पार्टनर स्टोर पर रिडीम किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त, किसानों को उनकी भूमि के अनुसार मिट्टी की नमी का पूर्वानुमान, स्प्रे प्लानिंग सपोर्ट और फसल से जुड़ी सलाह जैसी डेटा-आधारित जानकारियां भी मिलेंगी। इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है, लॉन्च के दो सप्ताह में कई किसानों ने ‘अलिवियो’ को खरीदा है।
दावणगेरे तालुका के मक्का उत्पादक किसान नागराजा हुचापला ने कहा, “पहले जब बारिश नहीं होती थी, तो पूरे सीजन में कोई उम्मीद नहीं रहती थी। लेकिन अब ‘अलिवियो’ से मैं अपने खेत की मिट्टी की नमी खुद देख सकता हूँ। जैसे ही नमी कम होती है, मुझे तुरंत लाभ मिल जाता है। इससे फसल के लिए ज़रूरी चीज़ें बिना देर खरीदी जा सकती हैं।”
भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में बायर के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिविजनल हेड साइमन वीबुश ने कहा, “‘अलिवियो’ से सबसे जरूरतमंद किसानों तक डिजिटल इनोवेशन पहुंचाने की बायर की प्रतिबद्धता झलकती है। एग्रोनॉमिक इंटेलिजेंस को बेहतर डिजाइन और भरोसेमंद स्थानीय नेटवर्क के साथ मिलाकर हम छोटे किसानों की मदद कर रहे हैं। इस पहल से आत्मनिर्भरता को न केवल संभव, बल्कि व्यवहारिक बनाया गया है।”
एडमे इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के सीईओ श्री संजय राधाकृष्णन ने कहा, “लंबे समय से फसल बीमा में किसानों की अनिश्चितता को पर्याप्त ध्यान नहीं मिला। इस लॉन्च के साथ हम किसानों को अपने नवाचार के केंद्र में रख रहे हैं। सैटेलाइट इंटेलिजेंस, प्लॉट-स्तर की जानकारी, फसल अवस्था के अनुरूप कवरेज और इकोसिस्टम साझेदारी के माध्यम से हम ऐसा समाधान दे रहे हैं, जो किसानों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करता है। बायर और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के साथ मिलकर कृषि बीमा क्षेत्र में इस व्यापक बदलाव की शुरुआत करने पर हमें गर्व है।”
फसलों और क्षेत्रों में विस्तार
आगामी महीनों में ‘अलिवियो’ को प्याज, मिर्च, आलू, अंगूर, टमाटर और चुनिंदा फलों तक विस्तार करते हुए देश के अन्य हिस्सों में उपलब्ध कराया जाएगा।
यह 2030 तक 10 करोड़ छोटे किसानों तक पहुंचने और उनकी उत्पादकता, रेजिलिएंस एवं सस्टेनेबिलिटी बढ़ाने के लिए बायर के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘अलिवियो’ इस प्रतिबद्धता को सशक्त बनाने वाला कदम है, जिसमें डेटा इंटेलिजेंस, इकोसिस्टम साझेदारी और किसान-केंद्रित डिजाइन का संगम है, जिससे वास्तविक प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

