यूपी सहित छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ी, नया शेड्यूल जारी

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की समयसीमा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। यह संशोधन तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पर लागू होगा। संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) द्वारा समय सीमा बढ़ाने के अनुरोध के बाद आयोग ने नया शेड्यूल जारी किया है।

🔹 विभिन्न राज्यों के लिए नई समयसीमा

चुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार:

  • तमिलनाडु और गुजरात
    नई अंतिम तिथि: 19 दिसंबर 2025 (शुक्रवार)
    पूर्व तिथि: 14 दिसंबर 2025 (रविवार)

  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
    नई अंतिम तिथि: 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
    पूर्व तिथि: 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार)

  • उत्तर प्रदेश
    नई अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2025 (बुधवार)
    पूर्व तिथि: 26 दिसंबर 2025 (शुक्रवार)

🔹 SIR प्रक्रिया: दूसरा चरण जारी

भारत निर्वाचन आयोग इन दिनों 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का दूसरा चरण चला रहा है।

SIR का पहला चरण बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर 2025 में पूरा किया गया था।
दूसरे चरण में शामिल राज्य हैं:
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
असम में भी 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं, जहां मतदाता सूची का ‘विशेष संशोधन’ अलग से जारी किया गया है।

🔹 SIR क्यों महत्वपूर्ण?

अधिकांश राज्यों में अंतिम पूर्ण SIR वर्ष 2002 से 2004 के बीच हुआ था। वर्तमान SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और विशेष रूप से जन्मस्थान की जांच के माध्यम से अवैध विदेशी प्रवासियों की पहचान करना है।
हाल के महीनों में बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध प्रवासियों के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच यह प्रक्रिया और भी अहम हो जाती है।

🔹 निष्कर्ष

चुनाव आयोग द्वारा SIR की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय यह दर्शाता है कि मतदाता सूची को सटीक, पारदर्शी और अद्यतन रखने के लिए आयोग गंभीरता से कार्य कर रहा है। विशेषकर 2026 के महत्वपूर्ण चुनावों से पहले यह कदम चुनावी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने में सहायक होगा।

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