टार्गेटेड थेरेपी से कज़ाख़स्तान की एक 69 वर्षीय महिला ने पाया नया जीवन, रोज़ाना केवल एक गोली लेने की आवश्यकता

नई दिल्ली। कज़ाख़स्तान की रहने वाली 69 वर्षीय मिस माया को सांस लेने में लगातार तकलीफ होने की शिकायत थी, जबकि वे एक जोशीली दादी और सैर करने की शौकीन महिला थीं। वे पहले धूम्रपान किया करती थीं, अब उन्हें स्टेज IV नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) होने का पता चला। निदान के बाद उन्होंने स्थानीय अस्पताल से दो राउंड कीमोथेरेपी करवाया, लेकिन उसके बाद भी उनके लक्षण बिगड़ते चले गए। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उनके परिवार वालों ने उन्नत उपचार के लिए 2,500 किलोमीटर दूर भारत की यात्रा करने का फैसला लिया।

भारत पहुंचने पर उनकी चिकित्सा जांच की गई, जिसमें पता चला कि कैंसर उनके दोनों फेफड़ों, प्लूरा, लिम्फ नोड्स और मस्तिष्क तक फ़ैल चुका है। चिकित्सकों ने तंत्रिका संबंधी जटिलताएं विकसित होने की संभावना का जिक्र करते हुए ब्रेन रेडियोथेरेपी या आक्रामक प्रक्रियाओं सहित कुछ आक्रामक उपचारों का सुझाव दिया, जिससे उनके परिवार वाले बड़ी चिंता में पड़ गए।

एक बायोप्सी के माध्यम से उनके ट्यूमर टिश्यू का व्यापक जीनोमिक प्रोफाइलिंग किया गया। टिश्यू बायोप्सी के व्यापक जीनोमिक प्रोफाइलिंग से EML4-ALK फ्यूजन की पहचान हुई, टार्गेटेड थेरेपी से इस परिवर्तन का उपचार संभव हो सकता था। कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के बजाय, उन्हें टार्गेटेड थेरेपी का उपचार दिया गया जिसमें प्रतिदिन केवल एक गोली लेनी पड़ती थी।

उपचार के प्रति बेहतरीन सहनशीलता और सु-नियंत्रित जैव रासायनिक मापदंडों के साथ, कुछ ही सप्ताह में मिस माया के स्वास्थ्य में सुधार दिखने लगा। उनकी सांस लेने की तकलीफ काफी हद तक कम हो गई और उनकी ऊर्जा वापस आने लगी।

उनके हालिया स्कैन से पता चला कि उनके मस्तिष्क सहित अन्य अंगों में भी उपचार का अच्छा असर हुआ है, जो रेडियोथेरेपी के बिना ही प्राप्त हुआ था।

इस मामले के बारे में बात करते हुए, अपोलो एथेना विमेंस कैंसर सेंटर में मेडिकल एवं प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की प्रमुख डॉ. ज्योति वाधवा ने कहा, “मिस माया की कहानी इस बात का सबूत है कि प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी किस प्रकार कैंसर उपचार में बदलाव ला रहा है। उपचार योग्य आनुवंशिक परिवर्तनों की पहचान करके, हम अत्यधिक प्रभावी, व्यक्तिगत उपचार प्रदान करने में सक्षम हैं, जो आक्रामक हस्तक्षेपों की आवश्यकता को काफी हद तक कम करता है। प्रतिदिन केवल एक टार्गेटेड गोली देकर उनकी अच्छी रिकवरी देखी गई, जो इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक कैंसर देखभाल से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। यह एक ऐसा उपचार है जो वैज्ञानिक रूप से अधिक उन्नत, कम विषाक्त और अत्यंत करुणामय है।”

मिस माया ने कहा, “जब मैं दिल्ली आई तो मैं काफी डरी हुई थी। लेकिन उस निराशा भरे समय में डॉ. ज्योति वाधवा और अपोलो एथेना की टीम ने मेरा हौंसला बाँधा। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक गोली रोज़ लेने से मेरी सांस की तकलीफ चली जाएगी, मैं दुबारा सैर कर पाउंगी और मेरी ताकत वापस आ जाएगी। मुझे ऐसा लग रहा है मानो मैंने एक नया जीवन पा लिया हो।”

एक ही टार्गेटेड गोली के उपचार से उनका ठीक होना आधुनिक कैंसर उपचार में हुई असाधारण प्रगति को दर्शाता है। यह अपोलो एथेना की अत्याधुनिक, करुणापूर्ण उपचार प्रदान करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि है, जो रोगियों को स्वास्थ्य तथा आशा दोनों वापस पाने में मदद करता है।

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