फीडिंग इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट जारी: सात वर्षों में 23 करोड़ से अधिक भोजन परोसे, 1.4 लाख बच्चों तक रोजाना पोषण

नई दिल्ली। भूख और कुपोषण के खिलाफ काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था फीडिंग इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, संस्था ने पिछले सात वर्षों में देशभर के वंचित समुदायों को 23 करोड़ से अधिक भोजन उपलब्ध कराए हैं। 150 से अधिक शहरों में सक्रिय फीडिंग इंडिया अपने साझेदार नेटवर्क के माध्यम से प्रतिदिन 1,40,000 से अधिक बच्चों को पोषण सहायता दे रही है।

“A Year of Nourishing Dreams” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कक्षा में भूख खत्म करने से लेकर आंगनवाड़ियों के पुनरोद्धार के जरिए प्रारंभिक बाल विकास तक के विस्तार का उल्लेख है।

डेली फीडिंग प्रोग्राम:
संस्था का प्रमुख कार्यक्रम अब 1,097 साझेदार स्कूलों और 726 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच चुका है। इसके तहत 275 औपचारिक स्कूल, 720 अनौपचारिक शिक्षण केंद्र, दिव्यांग बच्चों के 58 स्कूल और 32 अनाथालय शामिल हैं। स्थानीय स्वाद के अनुसार भोजन (जैसे उत्तर भारत में राजमा-चावल और दक्षिण में इडली-सांभर) उपलब्ध कराया जाता है, ताकि भोजन पौष्टिक, विविध और स्वीकार्य हो। भोजन या तो स्थल पर सूखे राशन से पकाया जाता है या केंद्रीकृत रसोईघरों से पहुंचाया जाता है।

आंगनवाड़ी परिवर्तन पहल:
स्कूल जाने से पहले ही कुपोषण की समस्या को देखते हुए संस्था ने गुरुग्राम, कुशीनगर और वाराणसी जैसे जिलों में 726 आंगनवाड़ी केंद्रों में हस्तक्षेप किया है, जिससे 0-6 वर्ष आयु के लगभग 27,000 बच्चों को लाभ मिला है। 30 से अधिक आंगनवाड़ियों में “Building as Learning Aid (BaLA)” मॉडल के तहत बुनियादी ढांचे में सुधार, स्वच्छता और बाल-मैत्रीपूर्ण वातावरण बनाया गया है। वाराणसी में पायलट प्रोजेक्ट के तहत बच्चों को अब पूरक नाश्ते के बजाय पूरा नाश्ता और दोपहर का भोजन दिया जा रहा है।

आपदा राहत कार्य:
वर्ष 2024-25 के दौरान फीडिंग इंडिया ने असम बाढ़ और केरल भूस्खलन के दौरान लगभग 2,000 राशन किट वितरित किए। उत्तराखंड में बादल फटने की घटना के बाद 1,90,000 से अधिक गर्म भोजन परोसे गए। राहत कार्य बिहार, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चक्रवात फेंगल के बाद भी चलाए गए।

सामुदायिक सहभागिता और पारदर्शिता

रिपोर्ट में सामुदायिक सहभागिता की भूमिका को रेखांकित किया गया है। वर्ष 2024 में आयोजित जोमैटो फीडिंग इंडिया कॉन्सर्ट (दुआ लीपा की प्रस्तुति के साथ) में 28,000 लोग इस उद्देश्य से जुड़े। वाराणसी में टीबी मरीजों के लिए ‘पोषण पोटली’ जैसी पहल भी चलाई गई।

रिपोर्ट के अनुसार, जोमैटो ग्राहकों ने कुल फंड का लगभग 80% (₹74 करोड़) योगदान दिया, जबकि ब्लिंकिट ग्राहकों ने 15% (₹14 करोड़) का योगदान किया। संस्थागत दानदाताओं, कर्मचारियों और वेबसाइट के माध्यम से लगभग 5% धनराशि जुटाई गई। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दानदाता जोमैटो और ब्लिंकिट ऐप पर ‘Feeding India’ खोजकर देख सकते हैं कि उनके योगदान से कितने भोजन परोसे गए और किन स्कूलों तक सहायता पहुंची।

रिपोर्ट में गुजरात के मालवी एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट का उदाहरण दिया गया है, जहां रोजाना पौष्टिक भोजन शुरू होने के बाद छात्रों के औसत BMI में 9.50% की वृद्धि दर्ज की गई। फीडिंग इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, “हर भोजन एक ऐसे बच्चे के लिए उम्मीद, सम्मान और अवसर का प्रतीक है, जो अन्यथा भूखा रह सकता था। हम अपने प्रयासों को बढ़ाते हुए केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बच्चों की क्षमता को पोषण, बुनियादी ढांचे और देखभाल के माध्यम से विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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